हनुमानगढ़। नगर पालिका चुनाव के दौरान वार्ड 23 में उस समय मामला सामने आया, जब मतदान करने पहुंचे मतदाता रमेश पुत्र रामस्वरूप के नाम से पहले ही वोट डाले जाने की जानकारी मिली। रमेश ने इस पर नाराजगी जताते हुए नायब तहसीलदार राजदीप कौर से शिकायत की। इसके बाद उन्हें चुनाव अधिकारी एवं जनरल मजिस्ट्रेट डॉ. अवि गर्ग के पास ले जाया गया। मामले की जानकारी लेने के बाद चुनाव अधिकारी ने नियमानुसार टेंडर वोट की अनुमति दी। इसके बाद कृषि उपज मंडी समिति स्थित मतदान केंद्र पर रमेश ने टेंडर वोट के जरिए अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। बाद में रमेश ने वीडियो जारी कर प्रशासन की त्वरित कार्रवाई के लिए आभार जताया।
गोलूवाला में पहली बार नगर पालिका चुनाव
ग्राम पंचायत से नगर पालिका बनने के बाद गोलूवाला में पहली बार निकाय चुनाव हो रहे हैं। शहर का दर्जा मिलने के बाद पहले नगर पालिका बोर्ड के गठन को लेकर नागरिकों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। चुनाव प्रचार के अंतिम दिन प्रत्याशियों ने भी पूरी ताकत झोंक दी। प्रत्याशी और उनके समर्थक सुबह से शाम तक मतदाताओं के घर-घर पहुंचे और अपने पक्ष में मतदान की अपील की। अब चुनावी मैदान में उतरे प्रत्याशियों की किस्मत मतदाताओं के हाथ में है।
25 वार्डों में 13,200 मतदाता, 88 प्रत्याशियों का फैसला
गोलूवाला के 25 वार्डों में कुल 13,200 मतदाता 11 सितंबर को मतदान कर रहे हैं। इन मतदाताओं के वोट से 88 प्रत्याशियों के चुनावी भाग्य का फैसला होगा। पहला नगर पालिका चुनाव होने के कारण यह मतदान बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। चुनाव परिणाम से गोलूवाला के पहले निर्वाचित नगर पालिका बोर्ड की तस्वीर भी साफ होगी।
वार्ड 23 और 24 में सबसे ज्यादा प्रत्याशी
गोलूवाला के वार्ड 23 और 24 में सबसे अधिक सात-सात प्रत्याशी मैदान में हैं। यहां मुकाबला बहुकोणीय हो गया है। वहीं वार्ड 4, 9, 12, 15 और 16 में भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला है। कई वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशी भी दोनों प्रमुख दलों के उम्मीदवारों के लिए चुनौती बने हुए हैं। बागी और आजाद प्रत्याशियों की मौजूदगी ने कई वार्डों में चुनावी समीकरण को और दिलचस्प बना दिया है।
14 सितंबर को आएगा चुनाव परिणाम
मतदान समाप्त होने के साथ ही सभी प्रत्याशियों की किस्मत EVM में कैद हो जाएगी। अब सभी की नजर 14 सितंबर को होने वाली मतगणना पर है। इसी दिन पता चलेगा कि गोलूवाला का पहला नगर पालिका बोर्ड किस दल के पक्ष में जाता है।
क्या होता है टेंडर वोट?
अगर कोई वास्तविक मतदाता मतदान केंद्र पहुंचता है और उसे पता चलता है कि उसके नाम से पहले ही किसी अन्य व्यक्ति ने मतदान कर दिया है, तो ऐसी स्थिति में वह सामान्य तरीके से EVM पर वोट नहीं डाल सकता। पहचान सत्यापित होने के बाद पीठासीन अधिकारी उसे विशेष बैलेट पेपर के जरिए टेंडर वोट डालने की अनुमति दे सकता है। टेंडर वोट को अलग से सुरक्षित रखा जाता है और यह सामान्य मतगणना में शामिल नहीं होता। इसका उद्देश्य वास्तविक मतदाता के मताधिकार की रक्षा करना है।



