नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को कहा कि केंद्र सरकार ने साल 2029 तक भारत को नशामुक्त बनाने के लिए तीन साल का रोडमैप तैयार किया है। उन्होंने कहा कि जिस रणनीति के जरिए नक्सलवाद और आतंकवाद के खिलाफ अभियान चलाया गया, उसी तरह अब देश में मादक पदार्थों के पूरे नेटवर्क को खत्म करने पर फोकस किया जाएगा।
गोवा में नशीले पदार्थों को लेकर उच्चस्तरीय बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में शाह ने कहा कि ड्रग्स के खिलाफ लड़ाई अब केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं रही, बल्कि इसे राष्ट्रीय सुरक्षा की प्राथमिकता बनाया गया है। उनका कहना था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लक्ष्य है कि देश की युवा शक्ति नशे से मुक्त होकर 2047 तक विकसित भारत के निर्माण में योगदान दे।
शाह के मुताबिक सरकार की रणनीति केवल छोटे स्तर के आरोपियों को पकड़ने तक सीमित नहीं रहेगी। ड्रग्स की तस्करी, उसकी फंडिंग, अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन, अवैध उत्पादन और सप्लाई चेन को एक साथ निशाना बनाया जाएगा। इसके लिए राज्यों और केंद्र की एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल पर जोर दिया जा रहा है।
सरकार के तीन साल के रोडमैप में चार प्रमुख स्तंभ रखे गए हैं। इनमें खुफिया जानकारी के आधार पर कार्रवाई, सिंथेटिक ड्रग्स और उनके कच्चे माल पर नियंत्रण, नशे की मांग को कम करने और नुकसान घटाने के उपाय तथा एजेंसियों की क्षमता और आपसी समन्वय बढ़ाना शामिल है। सरकार ने मार्च 2029 तक 100 बड़े अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क को खत्म करने का लक्ष्य रखा है। साथ ही 100 फरार आरोपियों को भारत लाने और 100 गुप्त ड्रग लैब को नष्ट करने की योजना है।
अमित शाह ने बताया कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स बनाई गई हैं। NCB को भी मजबूत किया गया है। इसके अलावा NIDAN डेटाबेस और ड्रग हॉटस्पॉट की डेटा आधारित मैपिंग के जरिए तस्करी के पैटर्न पर नजर रखी जा रही है। सरकार का जोर कार्रवाई के साथ-साथ जागरूकता, इलाज, काउंसलिंग और पुनर्वास पर भी है।
शाह ने कहा कि सरकार ने नक्सलवाद के खिलाफ लंबे समय तक चलाए गए अभियान में सफलता हासिल की है और अब उसी दृढ़ता के साथ नशे के खिलाफ लड़ाई आगे बढ़ाई जाएगी। उन्होंने इसे देश के युवाओं और आंतरिक सुरक्षा से जुड़ा बड़ा राष्ट्रीय अभियान बताया।



