Saturday, August 1, 2026
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वृक्षारोपण और वन संरक्षण को जन आंदोलन का स्वरूप देना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता : सीएम भजनलाल शर्मा

Rajasthan News: उदयपुर/जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि आज पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन की गंभीर चुनौती का सामना कर रही है। उन्होंने कहा कि बढ़ता समुद्री जलस्तर, लगातार बढ़ता तापमान, प्रदूषित वायु, दूषित जल और तेजी से घटती जैव विविधता आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के लिए गंभीर खतरा है। ऐसे में वृक्षारोपण और वन संरक्षण को जन आंदोलन का स्वरूप देना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

मुख्यमंत्री शनिवार को उदयपुर के दूधतलाई वन परिक्षेत्र में आयोजित राज्य स्तरीय वन महोत्सव शुभारंभ समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि वन मानव जीवन का आधार हैं और पर्यावरण संरक्षण प्रत्येक नागरिक का साझा दायित्व है। यदि हमें आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित भविष्य देना है तो वृक्षारोपण और वन संरक्षण को जन आंदोलन बनाना होगा।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर शुरू किए गए ’एक पेड़ मां के नाम’ अभियान से आमजन की पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ी है। यह अभियान पर्यावरण के प्रति दायित्व निभाने के साथ-साथ माताओं के प्रति श्रद्धा और समर्पण की भावना का भी प्रतीक है। उन्होंने कहा कि नगर वन योजना, कैंपा फंड, ग्रीन इंडिया मिशन एवं राष्ट्रीय वनरोपण कार्यक्रम जैसी पहलों के माध्यम से देश में पर्यावरण संरक्षण को नई गति मिली है। प्रधानमंत्री की पर्यावरण संरक्षण पहलों के लिए उन्हें यूएन चैंपियन्स ऑफ अर्थ से भी सम्मानित किया गया है।

चंदन वन परियोजना का किया शुभारंभ

मुख्यमंत्री ने दूधतलाई वन परिक्षेत्र में 33 करोड़ रुपये की लागत की चंदन वन परियोजना का चंदन का पौधारोपण कर शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि यह परियोजना पर्यावरण संरक्षण के साथ ग्रामीण आजीविका, जैव विविधता संरक्षण तथा हरित अर्थव्यवस्था को नई दिशा प्रदान करेगी। प्रथम चरण में उदयपुर, सिरोही, बांसवाड़ा और प्रतापगढ़ में चार चंदन वन विकसित किए जाएंगे, जो भविष्य में पूरे देश के लिए एक अनुकरणीय पहल बनेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि केन्द्र सरकार की इन पहलों से प्रेरणा लेकर प्रदेश सरकार द्वारा ’मिशन हरियालो राजस्थान’ प्रारंभ किया गया है। यह अभियान प्रदेश को हरित और समृद्ध बनाने की दिशा में कार्य कर रहा है। उन्होंने बताया कि मिशन के तहत पांच वर्षों में 50 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसमें से लगभग दो वर्षों में करीब 20 करोड़ पौधे लगाए जा चुके हैं। इस मानसून सीजन में भी 10 करोड़ पौधारोपण का लक्ष्य रखा गया है।

उन्होंने कहा कि अभियान के तहत लगाये गए पौधों के संरक्षण और वृक्ष बनने तक की सतत निगरानी के लिए पौधों की जियो-टैगिंग तथा इनकी वन मित्र और वृक्ष मित्रों के माध्यम से नियमित देखरेख सुनिश्चित की जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक जिला मुख्यालय पर नमो नर्सरी तथा पंचायत समिति स्तर पर नमो वन विकसित किए जा रहे हैं। इनसे ग्रामीण क्षेत्रों में हरित क्षेत्र का विस्तार हो रहा है और ग्रामीण पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भागीदारी निभा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्थान में पर्यावरण संरक्षण की ऐसी परंपराएं और मिसाल मिलती हैं, जो दुनिया में कहीं और नहीं मिलतीं। मां अमृता देवी ने अपनी तीन बेटियों समेत 363 लोगों के साथ वृक्षों को बचाने के लिए प्राणों की आहूति दी थी। विश्व इतिहास में पर्यावरण एवं वृक्ष संरक्षण का ऐसा कोई दूसरा उदाहरण नहीं मिलता।

मुख्यमंत्री की आमजन से मुलाकात

मुख्यमंत्री ने एक बार फिर आमजन के प्रति आत्मीयता और सादगी की मिसाल पेश की। उदयपुर में राज्य स्तरीय वन महोत्सव के शुभारंभ के बाद मुख्यमंत्री उदयपुर के बाजार में पैदल घूमे। इस दौरान उन्होंने बुजुर्गों से उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली तथा बच्चों को दुलार किया। मुख्यमंत्री का अपनापन देखकर आमजन में उत्साह नजर आया।

उन्होंने स्कंदपुराण का उल्लेख करते हुए कहा कि दस कुओं के बराबर एक बावड़ी, दस बावड़ियों के बराबर एक तालाब, दस तालाबों के बराबर एक पुत्र तथा दस पुत्रों के बराबर एक वृक्ष होता है। भारत की संस्कृति में प्रकृति को सदैव पूजनीय माना गया है। यहां पृथ्वी को माता, नदियों को देवी और वृक्षों को देवतुल्य मानने की परंपरा रही है। उन्होंने कहा कि पीपल, अशोक, आम, बिल्व जैसे वृक्ष और हरियाली तीज, बसंत पंचमी, महाशिवरात्रि जैसे पर्व प्रकृति एवं पर्यावरण के प्रति हमारी आस्था और संवेदनशीलता के प्रतीक हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज में यह सुखद परिवर्तन दिखाई दे रहा है कि लोग अब जन्मदिन, विवाह वर्षगांठ, स्मृति दिवस और अन्य विशेष अवसरों पर पौधारोपण को अपनी परंपरा बना रहे हैं। यह परिवर्तन बताता है कि वृक्षारोपण अब केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं रहकर सामाजिक संस्कार बनता जा रहा है। उन्होंने कहा कि जब हम एक पौधा लगाते हैं, तब हम केवल एक वृक्ष नहीं लगाते, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की सांसों, पर्यावरण और भविष्य को सुरक्षित करते हैं।

इस दौरान उन्होंने प्रदेशवासियों से इस मानसून सीजन में ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के अंतर्गत अधिक से अधिक पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण एवं मिशन हरियालो राजस्थान की दिशा में अपनी सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया।

समारोह में मुख्यमंत्री ने राजस्थान वानिकी एवं जैव विविधता परियोजना के अंतर्गत 13 जिलों के 600 स्वयं सहायता समूहों को कुल 6 करोड़ रुपये की आजीविका प्रोत्साहन राशि का प्रतीकात्मक चैक दिया। इससे पहले उन्होंने चंदन पेड़, वन एवं वन उपज तथा पंच गौरव पर आधारित प्रदर्शनी का अवलोकन किया तथा ड्रोन सीडिंग प्रक्रिया का शुभारम्भ किया और वॉच टावर से दूरबीन के जरिए वन क्षेत्र का निरीक्षण किया।

इस दौरान जनजाति क्षेत्रीय विकास मंत्री बाबूलाल खराड़ी, वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संजय शर्मा, सांसद मन्नालाल रावत, चुन्नीलाल गरासिया, विधायक श्रीचंद कृपलानी, फूलसिंह मीणा, ताराचन्द जैन, उदयलाल डांगी, शांता अमृतलाल मीणा, स्थानीय जनप्रतिनिधिगण, वरिष्ठ अधिकारीगण एवं आमजन उपस्थित रहे।

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Premanshu Chaturvedi
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