नई दिल्ली |अगर किसी पैकेज्ड फूड में तय सीमा से ज्यादा शुगर, नमक या सैचुरेटेड फैट हुआ, तो उसके पैकेट के सामने लाल रंग का चेतावनी लेबल लगाया जा सकता है। इसमें छह कोनों वाला षटकोण (Hexagon) होगा, ताकि ग्राहक पैकेट देखते ही समझ सके कि प्रोडक्ट में इन पोषक तत्वों की मात्रा ज्यादा है।फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने यह प्रस्ताव सुप्रीम कोर्ट के सामने रखा है। इसका उद्देश्य लोगों को ज्यादा शुगर, नमक और फैट वाले खाद्य पदार्थों के बारे में खरीदारी के समय ही सचेत करना है।
दो चरणों में लागू करने का प्रस्ताव
FSSAI ने इस व्यवस्था को दो फेज में लागू करने का प्रस्ताव दिया है, ताकि फूड इंडस्ट्री को नए नियमों के मुताबिक अपने प्रोडक्ट्स में बदलाव करने का समय मिल सके।
फेज 1: पहले चरण में उन प्रोडक्ट्स पर लाल चेतावनी लेबल लगाने का प्रस्ताव है, जिनमें शुगर, नमक या फैट में से कम से कम दो चीजें तय सीमा से ज्यादा होंगी। ज्यादा शुगर वाली कोल्ड ड्रिंक्स भी इसके दायरे में आएंगी।
फेज 2: दूसरे चरण में नियम को और सख्त करते हुए उन प्रोडक्ट्स पर भी चेतावनी लेबल लगाने का प्रस्ताव है, जिनमें इनमें से कोई एक चीज भी तय सीमा से ज्यादा होगी।
जनहित याचिका के बाद सामने आया प्रस्ताव
दरअसल, 3S एंड अवर हेल्थ सोसाइटी नाम के पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर पैकेज्ड और डिब्बाबंद खाद्य पदार्थों पर अनिवार्य चेतावनी लेबल लगाने की मांग की थी।13 अगस्त को हुई पिछली सुनवाई में जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने नियम बनाने में देरी को लेकर FSSAI से सवाल किए थे। कोर्ट ने यह भी पूछा था कि क्या सरकार नहीं चाहती कि उसके लोग स्वस्थ रहें। इसके बाद FSSAI ने सुप्रीम कोर्ट में अपना हलफनामा पेश किया।
किन प्रोडक्ट्स को मिल सकती है छूट?
FSSAI के प्रस्ताव में कुछ खाद्य पदार्थों को फ्रंट-ऑफ-पैक चेतावनी लेबल से बाहर रखने की बात कही गई है।इसमें सिंगल-इंग्रीडिएंट यानी एक ही सामग्री से बने प्रोडक्ट्स और ऐसे खाद्य पदार्थ शामिल हैं, जिनमें प्राकृतिक रूप से शुगर, नमक या फैट की मात्रा ज्यादा होती है।उदाहरण के तौर पर घी, खाद्य तेल, सामान्य नमक, चीनी, गुड़ और शहद को इस चेतावनी लेबल से छूट देने का प्रस्ताव है।
किस आधार पर तय होगी ‘हाई शुगर-फैट-साल्ट’ की श्रेणी?
किसी प्रोडक्ट को High Fat, Sugar and Salt (HFSS) की कैटेगरी में रखा जाएगा या नहीं, यह तय करने के लिए ICMR-National Institute of Nutrition (ICMR-NIN) की ‘Dietary Guidelines for Indians, 2024’ में दिए मानकों को आधार बनाया जाएगा।Front of Pack Labelling (FOPL) यानी पैकेट के सामने दी जाने वाली न्यूट्रिशन संबंधी जानकारी। इसका उद्देश्य ग्राहक को बिना पैकेट के पीछे लिखी लंबी न्यूट्रिशन टेबल पढ़े यह समझने में मदद करना है कि किसी प्रोडक्ट में शुगर, नमक, फैट या कैलोरी कितनी है।
मौजूदा समय में ज्यादातर पैकेज्ड फूड की न्यूट्रिशन संबंधी जानकारी पैकेट के पीछे या साइड में टेबल के रूप में दी जाती है। इसमें आमतौर पर कैलोरी, फैट, प्रोटीन, शुगर और सोडियम जैसी जानकारी होती है।इसके मुकाबले FOPL में जरूरी जानकारी सरल ग्राफिक्स, रंगों या चेतावनी संकेतों के जरिए पैकेट के सामने दिखाई जाती है, ताकि ग्राहक खरीदारी के समय तुरंत फैसला ले सके।
इसका फायदा क्या होगा?
FSSAI के मुताबिक, आसान और स्पष्ट चेतावनी लेबल से लोगों को खाने-पीने की चीजें चुनते समय ज्यादा जानकारी मिल सकेगी। खास तौर पर बच्चों और संवेदनशील वर्गों को ज्यादा शुगर, नमक और फैट वाले प्रोडक्ट्स के अत्यधिक सेवन से बचाने में मदद मिल सकती है।इसका उद्देश्य पैकेज्ड और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड के सेवन को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ाना और हेल्दी विकल्प चुनना आसान बनाना है।



