Vijay’s journey :“मुझे ढूंढने की कोशिश मत करना।”कहा जाता है कि एक समय थलापति विजय ने अपने घर में यही चिट्ठी छोड़ दी थी। वजह थी उनका सपना। जहां उनके पिता चाहते थे कि वे डॉक्टर बनें, वहीं विजय फिल्मों में अपना करियर बनाना चाहते थे।आज वही विजय अपना 52वां जन्मदिन मना रहे हैं और उनकी कहानी सिर्फ एक सफल अभिनेता की नहीं, बल्कि संघर्ष, जुनून और बदलाव की मिसाल मानी जाती है।थलापति विजय का जन्म 22 जून 1974 को चेन्नई में हुआ था। उनके पिता एस. ए. चंद्रशेखर तमिल फिल्मों के जाने-माने निर्देशक थे। परिवार चाहता था कि विजय पढ़-लिखकर डॉक्टर बनें, लेकिन विजय का मन अभिनय में था।बताया जाता है कि इसी बात को लेकर एक समय घर में तनाव बढ़ गया और विजय घर छोड़कर चले गए। हालांकि बाद में परिवार ने उनके सपनों को समझा और फिल्मों में आने की अनुमति दी।विजय की शुरुआती फिल्मों को अपेक्षित सफलता नहीं मिली। उनकी एक्टिंग और लुक्स को लेकर आलोचना भी हुई। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।धीरे-धीरे उनकी फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर सफलता हासिल करनी शुरू की। इसके बाद विजय ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और तमिल सिनेमा के सबसे बड़े सितारों में शामिल हो गए।
अपने करियर में विजय ने कई सुपरहिट और ब्लॉकबस्टर फिल्में दीं। उनकी फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर नए रिकॉर्ड बनाए और उनकी लोकप्रियता सिर्फ दक्षिण भारत तक सीमित नहीं रही, बल्कि देशभर में फैल गई।फैंस ने उन्हें प्यार से ‘थलापति’ नाम दिया, जिसका अर्थ होता है- सेनापति या नेता।जब विजय अपने फिल्मी करियर के शिखर पर थे, तब उन्होंने राजनीति में कदम रखने का फैसला किया। यह फैसला कई लोगों के लिए चौंकाने वाला था, क्योंकि उस समय वे इंडस्ट्री के सबसे बड़े सितारों में गिने जाते थे।हालांकि विजय ने राजनीति को अपनी नई पारी के रूप में चुना और जनता के बीच अपनी अलग पहचान बनाई।घर से भागने वाले एक युवा से लेकर सुपरस्टार और फिर राजनीति के बड़े चेहरे बनने तक का विजय का सफर संघर्ष, आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प की कहानी है।52वें जन्मदिन पर उनके फैंस सिर्फ एक अभिनेता को नहीं, बल्कि उस शख्स को सेलिब्रेट कर रहे हैं जिसने अपने सपनों को सच करने के लिए हर चुनौती का सामना किया और सफलता की नई मिसाल कायम की।



