(प्रज्ञा पांडे)। दुनिया के सबसे बड़े खेल आयोजनों में से एक, फीफा वर्ल्ड कप 2026 फाइनल में जब मैडोना, शकीरा, बीटीएस और जस्टिन बीबर जैसे सुपरस्टार्स ने मंच संभाला, तो हर कोई उनके शानदार प्रदर्शन की चर्चा कर रहा था। लेकिन अब इस शो से जुड़ी एक और खबर सुर्खियों में है। मीडिया रिपोर्ट्स का दावा है कि इन चारों कलाकारों ने इस ऐतिहासिक हाफटाइम शो के लिए पारंपरिक परफॉर्मेंस फीस नहीं ली। यानी उन्हें किसी सामान्य कॉन्सर्ट की तरह तय रकम का भुगतान नहीं किया गया। बताया जा रहा है कि यह हाफटाइम शो फीफा ग्लोबल सिटिजन एजुकेशन फंड के समर्थन में आयोजित किया गया था। इस पहल का उद्देश्य दुनिया भर के बच्चों की शिक्षा और फुटबॉल कार्यक्रमों के लिए 10 करोड़ डॉलर (100 मिलियन डॉलर) जुटाना है। इसी मकसद से कई कलाकारों ने अपना समय और प्रदर्शन दान करने का फैसला किया।
शकीरा ने इस पहल को आगे बढ़ाते हुए वर्ल्ड कप के आधिकारिक गीत “दाई दाई” से मिलने वाली अपनी रॉयल्टी भी इस फंड को दान करने की घोषणा की। वहीं, सोनी म्यूजिक ने भी इस गाने से जुटाई गई शुरुआती 2.5 लाख डॉलर की राशि के बराबर योगदान देने की बात कही। हालांकि, यहां एक अहम बात ध्यान देने वाली है। फीफा ने अभी तक कलाकारों के कॉन्ट्रैक्ट, भुगतान या अन्य खर्चों से जुड़ी कोई आधिकारिक जानकारी जारी नहीं की है। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि कलाकारों को किसी भी तरह का भुगतान नहीं मिला। फिलहाल रिपोर्ट्स में सिर्फ इतना कहा गया है कि उन्हें पारंपरिक परफॉर्मेंस फीस नहीं दी गई।
इस हाफटाइम शो ने भी खूब सुर्खियां बटोरीं क्योंकि यह फीफा वर्ल्ड कप फाइनल के इतिहास का पहला आधिकारिक हाफटाइम शो था। करीब 11 मिनट के इस कार्यक्रम में मैडोना, बीटीएस, जस्टिन बीबर और शकीरा के अलावा बर्ना बॉय ने भी प्रस्तुति दी। वहीं, पूरे हाफटाइम ब्रेक को मंच तैयार करने और हटाने सहित लगभग 27 मिनट का रखा गया था। फीफा के अनुसार, फाइनल से पहले फीफा ग्लोबल सिटिजन एजुकेशन फंड के लिए 6 करोड़ डॉलर (60 मिलियन डॉलर) से अधिक राशि जुटाई जा चुकी थी। संगठन ने टूर्नामेंट के हर टिकट से 1 डॉलर इस फंड में देने का भी वादा किया था। ऐसे में अगर रिपोर्ट्स सही हैं, तो यह शो सिर्फ मनोरंजन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि दुनिया भर के बच्चों की शिक्षा के लिए जागरूकता और फंड जुटाने का भी एक बड़ा मंच बन गया। अगर ये सच हैं, तो यह वर्ल्ड कप इतिहास के सबसे चर्चित संगीत आयोजनों में से एक होगा, जहां दुनिया के कुछ सबसे बड़े कलाकारों ने फीस से ज्यादा एक सामाजिक उद्देश्य को प्राथमिकता दी।



