Saturday, May 30, 2026
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फास्ट फूड खाने की लत पड़ी भारी, 10 साल की बच्ची का लिवर फेल, डॉक्टरों ने ऐसे बचाई जान

दिल्ली के बुराड़ी में सामने आया यह मामला चेतावनी देता है कि जंक फूड बच्चों के लिए कितना खतरनाक हो सकता है। 10 साल की बच्ची तान्या की हालत लगातार फास्ट फूड खाने से इतनी बिगड़ी कि उसका लिवर फेल हो गया और दिमाग में सूजन आ गई, जिसके बाद उसे ICU में भर्ती करना पड़ा।

Fast Food Effects On Health: दिल्ली के बुराड़ी से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां 10 वर्षीय बच्ची तान्या की हालत अत्यधिक फास्ट फूड खाने के कारण गंभीर हो गई. लिवर फेल हो गया है. दिमाग में सूजन आ गई. याददाश्त कमजोर होने लगी. उसकी स्थिति इतनी बिगड़ गई कि उसे ICU में भर्ती करना पड़ा.

रोजाना फास्ट फूड का सेवन बना वजह

परिवार के मुताबिक, तान्या के माता-पिता दोनों वर्किंग हैं. दिनभर घर पर अकेले रहने के दौरान वह अपने दादा से पैसे लेकर बाहर से मोमोज, चिप्स और अन्य फास्ट फूड लाकर खाती थी. शुरुआत में उसे छोटी-छोटी बातें भूलने की समस्या होने लगी और वह लगातार थकान महसूस करने लगी.

धीरे-धीरे बिगड़ने लगी हालत

समय के साथ उसकी हालत और खराब होती गई, ठीक से खड़े होने में दिक्कत,अत्यधिक कमजोरी महसूस होने लगी. जांच में पता चला कि उसे गंभीर पीलिया हो गया है और उसका लिवर फेल हो चुका है। शरीर में विषाक्त पदार्थ बढ़ने के कारण दिमाग में सूजन (ब्रेन स्वेलिंग) भी हो गई. इसके बाद बच्ची को यथार्थ अस्पताल, मॉडल टाउन में भर्ती कराया गया.

प्लाज्माफेरेसिस तकनीक से बची जान

शुरू में डॉक्टरों ने बच्ची के लिवर ट्रांसप्लांट की सलाह दी थी, लेकिन बाद में एक खास तकनीक से उसकी हालत में सुधार हो गया. बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. शैलेश शर्मा के अनुसार, बच्ची का इलाज प्लाज्माफेरेसिस तकनीक से किया गया. यह एक उन्नत चिकित्सा प्रक्रिया है, जिसमें शरीर से दूषित (टॉक्सिक) प्लाज्मा निकाला जाता है और उसकी जगह शुद्ध प्लाज्मा चढ़ाया जाता है. डॉक्टरों ने बच्ची को दो यूनिट प्लाज्मा दिया, जिसके बाद उसकी स्थिति में धीरे-धीरे सुधार होने लगा. सबसे बड़ी राहत की बात यह रही कि इस उपचार के बाद लिवर ट्रांसप्लांट की जरूरत टल गई.

यथार्थ अस्पताल के गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी एवं हेपेटोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. अपूर्व पांडे ने बताया कि अस्पताल की ओपीडी में आने वाले 30 से 40 प्रतिशत मरीज फैटी लिवर से पीड़ित होते हैं. चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें अधिकांश मरीजों की उम्र 20 से 50 वर्ष के बीच होती है, यानी यह समस्या अब युवाओं में तेजी से बढ़ रही है.

पानी की कमी बड़ा कारण

लोग दिनभर में मुश्किल से 1 से 1.5 लीटर पानी पी रहे हैं जबकि शरीर के बेहतर मेटाबॉलिज्म के लिए कम से कम 2.5 लीटर पानी रोज पीना जरूरी है. पानी की कमी शरीर में टॉक्सिन्स बढ़ाती है, जिससे लिवर पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है.

फास्ट फूड का बढ़ता खतरा

डॉक्टरों का कहना है कि आजकल खानपान में फास्ट फूड की मात्रा तेजी से बढ़ रही है—ज्यादा तेल और मसाले, प्रोसेस्ड और जंक फूड अनियमित खाने की आदतें ये सभी फैक्टर्स मिलकर लिवर को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचाते हैं.

क्या बरतें सावधानी?

रोजाना पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं

जंक फूड और बाहर के खाने को सीमित करें

संतुलित और घर का बना खाना प्राथमिकता दें

नियमित हेल्थ चेकअप कराएं

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Premanshu Chaturvedi
Premanshu Chaturvedihttp://jagoindiajago.news
खबरों की दुनिया में हर लफ्ज़ को जिम्मेदारी और जुनून के साथ बुनने वाला। मेरा मानना है कि एक अच्छी खबर केवल सूचना नहीं देती, बल्कि समाज को सोचने, सवाल करने और बदलने की ताकत भी देती है। राजनीति से लेकर मानवता की कहानियों तक, हर विषय पर गहराई से शोध कर निष्पक्ष और सटीक रिपोर्टिंग करना ही मेरी पहचान है। लेखनी के जरिए सच्चाई को आवाज़ देना मेरा मिशन है।
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