RK Family Trust Dispute : नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय में दिवंगत उद्योगपति संजय कपूर (Sanjay Kapoor) के परिवार से जुड़ा ‘आरके फैमिली ट्रस्ट’ विवाद लगातार गहराता जा रहा है। अब इस मामले में अदालत ने 14 मई को सुनवाई करने पर सहमति जताई है। यह सुनवाई रानी कपूर द्वारा दायर उस आवेदन पर होगी, जिसमें उन्होंने अपनी बहू प्रिया कपूर (Priya Kapoor) और अन्य लोगों को मध्यस्थता प्रक्रिया पूरी होने तक ट्रस्ट के कामकाज में हस्तक्षेप से रोकने की मांग की है। दरअसल, सात मई को सुप्रीम कोर्ट ने रानी कपूर (Rani Kapoor) और प्रिया कपूर के बीच चल रहे पारिवारिक ट्रस्ट विवाद को सुलझाने के लिए भारत के पूर्व प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ को मध्यस्थ नियुक्त किया था। अदालत ने सभी पक्षों से मामले को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने की अपील भी की थी।
‘महाभारत’ जैसा बना कपूर परिवार का विवाद
मंगलवार को यह मामला न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और उज्जल भुइयां की पीठ के सामने पेश किया गया। सुनवाई के दौरान अदालत ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि यह विवाद इतना बढ़ चुका है कि इसके सामने ‘महाभारत’ भी छोटी लग सकती है। रानी कपूर ने अपने आवेदन में आरोप लगाया है कि प्रिया कपूर और अन्य लोग विवादित पारिवारिक संपत्तियों और कंपनियों पर नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं। साथ ही यह आशंका भी जताई गई है कि मध्यस्थता प्रक्रिया के दौरान संपत्तियों को बेचने या हस्तांतरित करने की कोशिश हो सकती है।
रानी कपूर ने बहू प्रिया कपूर के खिलाफ खोला कानूनी मोर्चा
रानी कपूर ने अदालत से अनुरोध किया है कि मध्यस्थता प्रक्रिया पूरी होने तक प्रिया कपूर और अन्य लोगों को ट्रस्ट और परिवार से जुड़ी कुछ कंपनियों के कामकाज में हस्तक्षेप करने से रोका जाए। शीर्ष न्यायालय ने सात मई को कहा था कि सभी पक्ष खुले मन से मध्यस्थता प्रक्रिया में भाग लें। पीठ ने कहा था, हम सभी पक्षों से अनुरोध करते हैं कि वे सार्वजनिक रूप से कोई बयान न दें और सोशल मीडिया पर भी कुछ न कहें। यह पारिवारिक मामला है, इसलिए सभी का प्रयास होना चाहिए कि विवाद जल्द सुलझे और पूरे मामले का अंत हो। न्यायालय ने कहा था कि यदि दोनों पक्ष मध्यस्थ के समक्ष विवाद सुलझा लेते हैं तो यह सभी के हित में होगा, अन्यथा यह मुद्दा लंबी कानूनी लड़ाई में बदल सकता है।पीठ ने स्पष्ट किया था कि यह मध्यस्थता केवल वर्तमान मामले तक सीमित रहेगी।
उच्चतम न्यायालय ने 27 अप्रैल को प्रिया कपूर और अन्य से उस मुकदमे पर जवाब मांगा था, जिसमें संजय कपूर की मां ने परिवार के ट्रस्ट को ‘‘अमान्य’’ घोषित करने की मांग की है। पीठ ने रानी कपूर की उस याचिका पर प्रिया कपूर और अन्य को नोटिस जारी किया था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि अक्टूबर 2017 में उनके नाम पर गठित ट्रस्ट ‘‘जाली, फर्जी और धोखाधड़ीपूर्ण’’ दस्तावेजों का परिणाम है। संपत्ति और परिसंपत्तियों के नियंत्रण को लेकर कानूनी कार्यवाही दिल्ली उच्च न्यायालय में लंबित है और शीर्ष अदालत में दायर याचिका में ट्रस्ट की सभी संपत्तियों के हस्तांतरण पर यथास्थिति बनाए रखने का अनुरोध किया गया है। रानी कपूर ने अपने मुकदमे में अदालत से अनुरोध किया है कि उनकी बहू और पोते पोतियों समेत प्रतिवादियों को ‘आरके फैमिली ट्रस्ट’ का किसी भी रूप में उपयोग या संचालन करने से स्थायी रूप से रोका जाए।
याचिका में कहा गया है कि वह अपने दिवंगत पति सुरिंदर कपूर की पूरी संपत्ति की इकलौती उत्तराधिकारी हैं। सुरिंदर कपूर ‘सोना ग्रुप ऑफ कंपनीज’ सहित कई व्यवसायों के प्रवर्तक थे। याचिका के अनुसार, उनकी संपत्तियों को ‘आरके फैमिली ट्रस्ट’ में स्थानांतरित करते समय उनके साथ ‘‘सुनियोजित धोखाधड़ी’’ की गई।याचिका में दावा किया गया कि अपनी मृत्यु तक संजय कपूर ने कभी रानी कपूर को यह नहीं बताया कि उनसे उनके सभी अधिकार, संपत्तियां और विरासत छीन ली गई हैं और न ही उन्हें कथित आरके फैमिली ट्रस्ट की कोई प्रति दी गई। इस बीच, अभिनेत्री करिश्मा कपूर के दोनों बच्चों द्वारा अपने दिवंगत पिता की कथित वसीयत की प्रामाणिकता को चुनौती देने वाली याचिका भी दिल्ली उच्च न्यायालय में लंबित है। बच्चों ने प्रिया कपूर पर ‘‘लालची’’ होने का आरोप लगाया है।



