नई दिल्ली। ईरान और अमेरिका के बीच जारी युद्ध को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा बयान सामने आया है। ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ बातचीत जारी है और ईरान बातचीत करना चाहता है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि ईरान इस समय गंभीर मुश्किलों का सामना कर रहा है और अपने सैनिकों तथा पुलिसकर्मियों को वेतन तक नहीं दे पा रहा है। व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, “बातचीत चल रही है। वे बात करना चाहते हैं और लगातार बात कर रहे हैं।” उन्होंने कहा कि ईरान बड़ी मुसीबत में है और अमेरिका के पास अभी पर्याप्त समय है।
ईरान युद्ध को 7 महीने होने का किया दावा
डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ जारी संघर्ष का जिक्र करते हुए कहा कि अमेरिका इस युद्ध में पिछले 7 महीने से शामिल है। उन्होंने इसे सामान्य युद्ध से अलग बताते हुए कहा कि अमेरिका तुलनात्मक रूप से इस संघर्ष पर बहुत कम पैसा खर्च कर रहा है। ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका के पास अभी जल्दबाजी करने की जरूरत नहीं है। उनके मुताबिक, ईरान बातचीत करना चाहता है और लगातार संपर्क बनाए हुए है।
वेनेजुएला से युद्ध का खर्च वसूलने का दावा
अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान युद्ध के आर्थिक खर्च को लेकर भी बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने ईरान में जो भी पैसा खर्च किया है, उसकी भरपाई वेनेजुएला में किए गए कामों से कई गुना ज्यादा हो चुकी है। ट्रंप ने कहा कि उन्होंने परमाणु हथियारों को खत्म करने के लिए काफी पैसा खर्च किया और अमेरिका ने इस दिशा में अपना लक्ष्य हासिल किया है। उन्होंने वेनेजुएला का उदाहरण देते हुए दावा किया कि वहां से अमेरिका को ईरान युद्ध में खर्च की गई रकम से 10 गुना से भी अधिक फायदा हुआ है। हालांकि, ट्रंप ने अपने इस दावे के समर्थन में कोई विस्तृत आंकड़ा पेश नहीं किया।
बातचीत के साथ सैन्य विकल्प भी बरकरार
ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत की संभावनाओं के बावजूद क्षेत्र में तनाव बना हुआ है। अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के मुताबिक, कतर सहित अन्य मध्यस्थ देश दोनों पक्षों के बीच समझौते की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, युद्ध समाप्त करने की शर्तों और परमाणु कार्यक्रम को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद बने हुए हैं। ट्रंप के ताजा बयान से संकेत मिलता है कि अमेरिका फिलहाल बातचीत का रास्ता खुला रखते हुए ईरान पर दबाव बनाए रखना चाहता है। ऐसे में पूरी दुनिया की नजर अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली अगली बातचीत और युद्ध के भविष्य पर टिकी हुई है।



