Trump Iran Ceasefire Plan: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाले प्रशासन ने ईरान को 15-सूत्रीय युद्धविराम योजना का प्रस्ताव भेजा है. सूत्रों के मुताबिक, यह प्रस्ताव पाकिस्तान के मध्यस्थों के जरिए ईरान तक पहुंचाया गया है. पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में मध्यस्थता की पेशकश की है और संभवतया बातचीत का अगला दौर वहीं होगा.
अमेरिका ने बढ़ाई सैन्य तैनाती
इस बीच अमेरिका ने क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी भी बढ़ाने के संकेत दिए हैं. जानकारी के अनुसार, अमेरिकी सेना की 82वीं एयरबोर्न डिवीजन से कम से कम 1,000 अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती की तैयारी की जा रही है. इससे पहले से तैनात करीब 50,000 सैनिकों को और मजबूती मिलेगी. इसके अलावा, Pentagon 2 मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट की तैनाती की प्रक्रिया में है, जिसके तहत लगभग 5,000 मरीन और नौसेना के हजारों अन्य जवान क्षेत्र में भेजे जा सकते हैं.
1 महीने के लिए युद्ध विराम की घोषणा कर सकते हैं.
अमेरिकी मीडिया ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि 15-सूत्रीय यह योजना ईरानी अधिकारियों को सौंप दी गई है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाला प्रशासन और ईरान 1 महीने के संभावित युद्धविराम की घोषणा कर सकते हैं. इस अवधि के दौरान दोनों पक्षों के बीच प्रस्तावित 15-सूत्रीय योजना पर विस्तृत बातचीत होने की संभावना जताई जा रही है. इस योजना योजना में कई अहम बिंदु शामिल हैं:
ईरान अपनी धरती पर यूरेनियम संवर्धन पूरी तरह बंद करेगा और मौजूदा संवर्धित सामग्री को अंतरराष्ट्रीय निगरानी में सौंपेगा.
होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलकर समुद्री मार्ग को सुरक्षित और निर्बाध बनाया जाएगा, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति सामान्य हो सके.
ईरान क्षेत्र में सक्रिय अपने प्रॉक्सी समूहों को समर्थन बंद करेगा.
इस योजना के तहत ईरान को कई बड़ी राहत मिलने की संभावना भी जताई जा रही है:
ईरान पर लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को हटाया जा सकता है.
ईरान को नागरिक परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम विकसित करने में अंतरराष्ट्रीय सहायता दी जा सकती है, खासकर बुशहर परमाणु संयंत्र जैसे प्रोजेक्ट्स में।
अमेरिका के प्रस्ताव पर इजराइल की प्रतिक्रिया
ईरान के खिलाफ सख्त रुख रखने वाले इजराइली अधिकारी इस प्रस्ताव से हैरान हैं. अतिरिक्त सैनिक और मरीन भेजने की अमेरिकी तैयारियों के बीच इस कदम को ट्रंप की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि यह रणनीति अमेरिका की दोहरी तैयारी को दर्शाती है-एक तरफ कूटनीतिक समाधान की कोशिश और दूसरी ओर सैन्य विकल्प को खुला रखना. हालांकि, इस पूरे मामले पर व्हाइट हाउस की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है.




