धौलपुर। राजस्थान के धौलपुर जिले में रविवार सुबह एक धार्मिक यात्रा उस वक्त मातम में बदल गई, जब पोखर में डूब रहे भाई को बचाने के लिए उसकी तीन बहनों ने भी पानी में छलांग लगा दी। पानी गहरा होने के कारण चारों भाई-बहन डूब गए और उनकी मौत हो गई। हादसे की खबर मिलते ही मौके पर चीख-पुकार मच गई। यह दर्दनाक घटना आंगई थाना क्षेत्र की धौंध पंचायत के विरजा गांव के पास स्थित हीरामन बाबा की पोखर में हुई। मृतक परिवार गांव से जत्थे के साथ हीरामन बाबा की जात करने आया था। रविवार तड़के श्रद्धालु मंदिर के पास स्थित पोखर में स्नान करने पहुंचे थे। इसी दौरान हादसा हो गया।
नहाते समय गहरे पानी में चला गया युवक
थानाप्रभारी कृपाल सिंह के अनुसार, मोरोली गांव निवासी परिवार के लोग हीरामन बाबा की जात के लिए विरजा धाम पहुंचे थे। रविवार सुबह करीब 4 बजे 21 वर्षीय रवि उर्फ भोलू अपने तीन बहनों के साथ कुंड में नहाने गया था।
नहाने के दौरान रवि अचानक गहरे पानी में चला गया और डूबने लगा। पास में मौजूद उसकी तीन बहनों ने भाई को बचाने के लिए बिना देर किए पानी में छलांग लगा दी। लेकिन कुंड की गहराई अधिक होने के कारण वे भी पानी में फंस गईं और देखते ही देखते चारों डूब गए।

ग्रामीणों ने शुरू किया बचाव अभियान
हादसा सामने आते ही ग्रामीणों ने अपने स्तर पर पोखर में तलाश शुरू कर दी। काफी मशक्कत के बाद तीन बहनों के शव पानी से बाहर निकाल लिए गए, लेकिन रवि का पता नहीं चल सका।
मामले की सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम सुबह करीब 6 बजे मौके पर पहुंची। इसके बाद एसडीआरएफ की टीम को बुलाया गया और व्यवस्थित तरीके से रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। करीब छह घंटे की मशक्कत के बाद सुबह लगभग 10 बजे एसडीआरएफ ने रवि का शव भी पोखर से बाहर निकाल लिया।
एक ही परिवार के चार लोगों की मौत
हादसे में जान गंवाने वालों की पहचान रवि उर्फ भोलू (21), बोटो (25), मनोरमा (24) और कल्लो (18) के रूप में हुई है। चारों आपस में भाई-बहन थे और परिवार के साथ हीरामन बाबा की जात करने आए थे।
पुलिस ने सभी शवों को कब्जे में लेकर सामुदायिक अस्पताल सरमथुरा की मोर्चरी में रखवाया। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव परिजनों को सौंपे जाने की बात कही गई है।

धार्मिक यात्रा जिंदगीभर का दर्द बनी
धौलपुर के सरमथुरा क्षेत्र में धौंध-बिरजा यानी विरजा धाम लोक देवता हीरामन बाबा के आस्था स्थल के रूप में जाना जाता है। यहां होने वाली जात में आसपास के अलावा दूर-दराज के क्षेत्रों से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं।
मोरोली गांव के लोग भी इसी धार्मिक आयोजन में शामिल होने के लिए यहां पहुंचे थे। परिवार के लिए यह यात्रा खुशियों के बजाय ऐसा गहरा सदमा छोड़ गई, जिसे शायद वे जिंदगीभर नहीं भूल पाएंगे।



