नई दिल्ली। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव तथा होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका ने अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल बाजार में हलचल बढ़ा दी है। बुधवार को तेल की कीमतें करीब तीन सप्ताह के उच्चतम स्तर पर पहुंच गईं। बाजार में निवेशकों की चिंता मुख्य रूप से इस बात को लेकर है कि महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से तेल टैंकरों की आवाजाही लंबे समय तक बाधित रही तो वैश्विक आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ सकता है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत बढ़कर 91.79 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। यह 30 जुलाई के बाद इसका सबसे ऊंचा स्तर है। वहीं अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट कच्चा तेल भी करीब 85.79 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, जो 31 जुलाई के बाद का उच्चतम स्तर है। कारोबार के दौरान दोनों प्रमुख मानकों में तेजी दर्ज की गई।
होर्मुज पर टिकी दुनिया की नजर
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में शामिल है। यहां से सामान्य परिस्थितियों में वैश्विक तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस की बड़ी मात्रा का परिवहन होता है। मौजूदा तनाव के बीच इस मार्ग से व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही काफी प्रभावित हुई है। कई जहाज संचालक सुरक्षा कारणों से इस रास्ते से बचने की कोशिश कर रहे हैं। इससे बाजार में आपूर्ति को लेकर जोखिम बढ़ गया है।
हाल के दिनों में होर्मुज क्षेत्र में जहाजों की सुरक्षा को लेकर कई घटनाएं सामने आई हैं। इसके बाद समुद्री परिवहन कंपनियों की चिंता बढ़ी है। अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष विराम की स्थिति भी अनिश्चित बनी हुई है। दोनों पक्षों के बयानों में अंतर और बातचीत की स्थिति स्पष्ट नहीं होने से बाजार में आशंका बनी हुई है।
आपूर्ति में कमी का डर बढ़ा
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, यदि होर्मुज से तेल की आवाजाही लंबे समय तक सामान्य नहीं हुई तो कच्चे तेल की वैश्विक आपूर्ति पर दबाव बढ़ सकता है। ऐसी स्थिति में कीमतों में और तेजी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। कुछ विश्लेषकों ने आने वाले समय में ब्रेंट कच्चे तेल के 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर की ओर बढ़ने की संभावना भी जताई है।
अमेरिका में कच्चे तेल और आसुत ईंधन के भंडार में गिरावट ने भी बाजार को समर्थन दिया है। हालांकि पेट्रोल के भंडार में बढ़ोतरी हुई है, लेकिन निवेशक अभी मुख्य रूप से पश्चिम एशिया की घटनाओं और होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही पर नजर बनाए हुए हैं।
भारत पर भी पड़ सकता है असर
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी का असर भारत पर भी पड़ सकता है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता है। ऐसे में लंबे समय तक कीमतें ऊंची रहने पर पेट्रोलियम उत्पादों की लागत, आयात बिल और महंगाई पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है। फिलहाल बाजार की नजर ईरान-अमेरिका तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति की स्थिति पर बनी हुई है।



