Congress Meeting On Monsoon Session: संसद के आगामी मानसून सत्र से पहले कांग्रेस ने अपनी रणनीति स्पष्ट कर दी है. कांग्रेस संसदीय दल (CPP) की चेयरपर्सन सोनिया गांधी की अध्यक्षता में बुधवार को आयोजित बैठक में पार्टी ने सत्र के दौरान उठाए जाने वाले प्रमुख मुद्दों पर चर्चा की. मीटिंग में मल्लिकार्जुन खरगे,राहुल गांधी सहित कांग्रेस संसदीय दल के सदस्य मौजूद रहे.
आज CPP चेयरपर्सन श्रीमती सोनिया गांधी जी की अध्यक्षता में कांग्रेस संसदीय दल की रणनीतिक बैठक हुई।
— Congress (@INCIndia) July 16, 2026
इस बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष व राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष श्री @kharge और नेता विपक्ष श्री @RahulGandhi के साथ संसदीय दल के सदस्य मौजूद रहे।
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इन मुद्दों पर सरकार को घेरेगी कांग्रेस
कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने ‘एक्स’ पर पोस्ट में कहा कि ‘चंदा चोरी-आस्था से धोखा, प्रश्नपत्र लीक और शिक्षा व्यवस्था का सुनियोजित पतन, संस्थानों पर कब्जा, राजनीतिक दलों को तोड़ना, अनेक घोटाले और भ्रष्टाचार के आरोप, कमरतोड़ महंगाई, विदेश नीति की विफलताएं और रणनीतिक भूलें, 3.5 करोड़ वाहन मालिकों पर एथेनॉल मिश्रण (ब्लेंडिंग) थोपना, बेलगाम वनों की कटाई तथा एससी, एसटी, ओबीसी और अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर लगातार हमले’ ऐसे प्रमुख मुद्दे हैं जिन पर कांग्रेस मानसून सत्र में मोदी सरकार से जवाब मांगेगी.
कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने कही ये बात
बैठक के बाद कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने मीडिया से बातचीत में बताया कि मानसून सत्र के दौरान पार्टी सरकार को कई अहम मुद्दों पर घेरने की तैयारी कर चुकी है. उन्होंने कहा कि बैठक में यह तय किया गया कि कांग्रेस NEET परीक्षा, पेपर लीक, बढ़ती महंगाई और राम मंदिर से जुड़ा चंदा चोरी, एथनॉल से जुड़ा विषय समेत कई अन्य मुद्दों को प्रमुखता से उठाएगी.
#WATCH दिल्ली: कांग्रेस की संसदीय रणनीति समूह की बैठक खत्म होने के बाद कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने कहा, "बैठक में जो मानसून सत्र के जो मुद्दे हैं उस पर हमारा क्या स्टैंड होगा वो स्पष्ट किया गया है। NEET, पेपर लीक, जिस तरीके से महंगाई बढ़ रही है, राम मंदिर में जो चंदा चोरी हुई… pic.twitter.com/rLw1OjJOEv
— ANI_HindiNews (@AHindinews) July 16, 2026
परिसीमन बिल का करेगी विरोध
कांग्रेस वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने कहा कि सरकार यदि परिसीमन बिल लाती है, तो कांग्रेस उसका पुरजोर विरोध करेगी. उनका कहना था कि इस तरह के संवेदनशील विषय पर व्यापक राजनीतिक सहमति और सभी राज्यों के हितों को ध्यान में रखना आवश्यक है.
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