Friday, July 24, 2026
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सीएम भजनलाल शर्मा बोले- रामजल सेतु और यमुना जल समझौते से बनेगा जल आत्मनिर्भर राजस्थान

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने राजस्थान वाटर कॉन्क्लेव में कहा कि रामजल सेतु लिंक परियोजना, यमुना जल समझौता और जल संरक्षण अभियानों से प्रदेश जल आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से बढ़ रहा है। सरकार जल प्रबंधन, सिंचाई और पेयजल योजनाओं को राष्ट्रीय मॉडल बनाने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रही है।

Rajasthan Water Conclave : जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा (CM Bhajan Lal Sharma) ने कहा कि सरकार गठन के तुरंत बाद से ही राजस्थान को जल आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए गए। इन प्रयासों के सकारात्मक परिणाम अब धरातल पर दिखाई देने लगे हैं और जल संरक्षण को नई गति मिली है। उन्होंने कहा कि रामजल सेतु लिंक परियोजना से लेकर यमुना जल समझौते जैसे अभूतपूर्व कार्यों को मूर्त रूप देकर जल आपूर्ति के क्षेत्र में एक नए राजस्थान की आधारशिला रखी जा रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (PM Narendra Modi) के नेतृत्व में डबल इंजन सरकार के इन्हीं प्रयासों से राजस्थान आने वाले समय में जल प्रबंधन एवं जल संचयन का राष्ट्रीय माॅडल बनेगा।

मुख्यमंत्री शुक्रवार को जयपुर में ‘राजस्थान वाटर कॉन्क्लेव’ को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जल संरक्षण को राष्ट्रीय कर्तव्य मानते हैं और आने वाली पीढ़ियां हमारे जल संरक्षण के प्रयासों के आधार पर हमारा मूल्यांकन करेंगी। कैच द रेन, नमामि गंगे, जल संचय-जन भागीदारी, जल जीवन मिशन, अटल भूजल योजना, अमृत सरोवर, हर खेत को पानी तथा प्रति बूंद अधिक फसल जैसे दूरदर्शी कार्यक्रमों ने देश में जल सुरक्षा को नई दिशा प्रदान की है।

जल संरक्षण पर संवाद, अनुभव और नवाचारों पर बात

मुख्यमंत्री ने जल संरक्षण के क्षेत्र में कार्यरत विभिन्न संस्थाओं एवं विषय विशेषज्ञों से संवाद कर उनके अनुभव, नवाचारों एवं सुझावों की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण वर्तमान और भावी पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। सरकार के प्रयासों, संस्थाओं के सहयोग, विशेषज्ञों के अनुभव और आमजन की सक्रिय भागीदारी से राजस्थान जल आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

उन्होंने संस्थाओं एवं विशेषज्ञों से आह्वान किया कि वे स्थानीय स्तर की जल चुनौतियों को समझते हुए आधुनिक तकनीक आधारित मॉनिटरिंग, नवाचारपूर्ण समाधानों और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ जल संचयन, संरक्षण एवं प्रबंधन के क्षेत्र में अपना योगदान दें।

प्रदेश के हर कोने को मिलेगा पानी

उन्होंने कहा कि रामजल सेतु लिंक परियोजना राजस्थान के जल इतिहास का नया अध्याय है। इस परियोजना से प्रदेश के 17 जिलों में पेयजल सुरक्षा सुनिश्चित होने के साथ ही लगभग 4 लाख 84 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। वहीं, यमुना जल समझौते के तहत लगभग 295 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन से 1,917 क्यूसेक यमुना जल शेखावाटी पहुंचेगा, जिससे सीकर, झुंझुनूं और चूरू जिले के लगभग 75 लाख लोगों को स्थायी पेयजल राहत मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उदयपुर शहर की पेयजल आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए 1 हजार 691 करोड़ रुपये की लागत से देवास तृतीय एवं देवास चतुर्थ परियोजनाओं पर तेजी से कार्य किया जा रहा है। इसी प्रकार पश्चिमी राजस्थान के लिए आइजीएनपी के नहरी क्षेत्रों का सुदृढ़ीकरण किया जा रहा है। वहीं, नर्मदा के पानी को रानीवाड़ा और भीनमाल तक पहुंचाने और ब्राह्मणी नदी के पानी को बीसलपुर तक लाने की कार्ययोजना को अंतिम रूप दिया जा रहा है। साथ ही, परवन बहुउद्देशीय सिंचाई परियोजना कोटा, बारां और झालावाड़ जिलों की जीवनरेखा साबित होगी। इस परियोजना पर राज्य सरकार अब तक 1 हजार 164 करोड़ रुपये व्यय कर चुकी है। इन सभी प्रयासों से पेयजल, कृषि और उद्योग सहित अन्य सभी क्षेत्रों में राजस्थान जल आत्मनिर्भर बनेगा।

जल संरक्षण में जन भागीदारी की अहम भूमिका

उन्होंने कहा कि जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने के लिए कर्मभूमि से मातृभूमि अभियान संचालित किया जा रहा है। इसके तहत भामाशाहों, प्रवासी राजस्थानियों तथा सीएसआर सहयोग से जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण करवाया जा रहा है। जिससे प्रदेश के कई क्षेत्रों के भूजल स्तर में सुधार हुआ है। इसी प्रकार, वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान के माध्यम से जल स्रोतों की सफाई, पौधारोपण, जनजागरूकता तथा जल संरक्षण गतिविधियों को व्यापक जनभागीदारी के साथ संचालित किया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अमृत 2.0 योजना के तहत 178 शहरी निकायों में पेयजल व्यवस्था मजबूत करने के लिए 5 हजार 100 करोड़ रुपये की स्वीकृतियां जारी की गई हैं, जिनमें से 109 निकायों के लिए कार्यादेश जारी किए जा चुके हैं। वहीं, जल जीवन मिशन के तहत 15 लाख से अधिक ग्रामीण परिवारों को नल से शुद्ध पेयजल उपलब्ध करवाया जा रहा है। इसी प्रकार, अटल भू-जल योजना के अंतर्गत 485 करोड़ रुपये के जल संरक्षण एवं संवर्धन कार्य करवाए गए हैं। सिंचाई परियोजनाओं की नियमित निगरानी और समयबद्ध क्रियान्वयन के लिए मुख्यमंत्री सिंचाई टास्क फोर्स का गठन किया गया है तथा किसान साथी एप के माध्यम से किसानों को घर बैठे सिंचाई जल उपलब्धता की जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है।

बिजली प्रदाता बन रहा राजस्थान

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के 26 जिलों में किसानों को दिन में बिजली दी जा रही है और 2027 तक सभी जिलों में किसानों को इसका लाभ मिलने लगेगा। वहीं, आम उपभोक्ताओं और उद्योगों को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। यह सरकार के सकारात्मक प्रयासों का ही परिणाम है कि आज हम दूसरे राज्यों को भी बिजली देने का कार्य कर रहे हैं।

जीरो टाॅलरेंस नीति और सकारात्मक प्रयासों के सार्थक परिणाम

उन्होंने कहा कि सरकार की जीरो टाॅलरेंस नीति के चलते ढाई साल में एक भी पेपर लीक नहीं हुआ है, जिससे सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं का विश्वास लौटा है। हमारी सरकार ने एक लाख 78 हजार युवाओं को सरकारी नौकरी देने के साथ ही लगभग साढ़े चार लाख युवाओं को निजी क्षेत्र में रोजगार उपलब्ध करवाए हैं। उन्होंने राइजिंग राजस्थान का जिक्र करते हुए कहा कि 35 लाख करोड़ रुपये के एमओयू में से 9 लाख करोड़ रुपये के एमओयू धरातल पर उतर चुके हैं। मुख्यमंत्री ने प्रदेश के पर्यटन और खनन क्षेत्र को अपार संभावनाओं वाला बताते हुए कहा कि सरकार इन क्षेत्रों के विकास एवं संवर्द्धन के लिए लगातार कार्य कर रही है। 

मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से आह्वान करते हुए कहा कि पानी का कोई विकल्प नहीं है, ऐसे में जल संचयन को जन आंदोलन बनाकर आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित करने का पुनीत कार्य करें। साथ ही, उन्होंने किसानों से भी कम पानी में अधिक उत्पादन के लिए माइक्रो इरिगेशन अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि विकसित राजस्थान के संकल्प को साकार करने में जल संसाधनों का संरक्षण अत्यंत महत्वपूर्ण है। सामूहिक प्रयासों, जनसहभागिता और विशेषज्ञों के मार्गदर्शन से प्रदेश में जल सुरक्षा का मजबूत आधार तैयार किया जा सकता है। सरकार की नीतियां और समाज की भागीदारी मिलकर ऐसा राजस्थान बनाएंगे, जिसकी पहचान जल समृद्धि की होगी। 

जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने कहा कि राजस्थान की संस्कृति में जल केवल प्राकृतिक संसाधन नहीं, बल्कि सभ्यता, समृद्धि और सुरक्षित भविष्य का आधार है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार ने जल सुरक्षा को विकास की सर्वाेच्च प्राथमिकताओं में शामिल किया है तथा वर्षों से लंबित जल परियोजनाओं को गति प्रदान की है। उन्होंने कहा कि आज जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों के बीच जल संरक्षण केवल सरकार का नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का साझा दायित्व है। कार्यक्रम में मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास, पद्मश्री लक्ष्मण सिंह सहित कई जल संरक्षण विशेषज्ञ उपस्थित रहे।

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Mukesh Kumar
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