India China Relations : बीजिंग। चीन में भारत के राजदूत विक्रम दोरईस्वामी ने कहा है कि यदि चीन भारतीय उत्पादों, विशेषकर दवाइयों के लिए अपना बाजार खोले और भारत में चीनी निवेश को बढ़ावा मिले, तो इससे दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंध और अधिक मजबूत होंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत अपनी प्रतिस्पर्धी क्षमता वाले क्षेत्रों में चीन को अधिक निर्यात करना चाहता है और इसमें कुछ भी असामान्य नहीं है।
दोरईस्वामी ने यह टिप्पणी चीन की सिंघुआ यूनिवर्सिटी में आयोजित ‘वर्ल्ड पीस फोरम’ के दौरान ‘संरक्षणवाद और वैश्विक आर्थिक शासन’ विषय पर हुई परिचर्चा में की। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया के सबसे बड़े दवा निर्यातकों में शामिल है और विशेष रूप से विकसित देशों में भारतीय जेनेरिक दवाओं की मजबूत मांग है। ऐसे में चीन यदि भारतीय दवा कंपनियों के लिए अपना बाजार खोलता है, तो इससे दोनों देशों को समान रूप से लाभ होगा।

उन्होंने कहा कि भारत लंबे समय से चीन से सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी), फार्मास्यूटिकल्स और कृषि जैसे क्षेत्रों में बाजार खोलने की मांग करता रहा है। ये ऐसे क्षेत्र हैं, जहां भारत को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त हासिल है और दोनों देशों के बीच व्यापार संतुलन बेहतर बनाया जा सकता है।
राजदूत ने बताया कि हाल ही में उन्होंने चीन के वाणिज्य मंत्रालय के एशियाई मामलों के विभाग के महानिदेशक वांग लिपिंग के साथ व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने उम्मीद जताई कि चीनी साझेदार भारतीय कंपनियों को उच्च गुणवत्ता वाली जेनेरिक दवाओं के लिए अपने बाजार में प्रवेश का अवसर देंगे। ये वही दवाएं हैं, जिनका निर्यात भारत अमेरिका समेत दुनिया के कई देशों में करता है।



