नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने पेट्रोल, डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल के निर्यात पर लगने वाली विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क में संशोधन किया है। नई दरें 1 जुलाई से लागू होंगी। सरकार का कहना है कि यह फैसला अंतरराष्ट्रीय बाजार की परिस्थितियों और घरेलू ईंधन उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
सरकारी अधिसूचना के अनुसार, पेट्रोल के निर्यात पर शुल्क बढ़ाकर 4 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। वहीं, डीजल के निर्यात पर लगने वाली ड्यूटी को घटाकर 8.5 रुपये प्रति लीटर और एटीएफ के निर्यात शुल्क को 7.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। इन संशोधित दरों का उद्देश्य निर्यात और घरेलू आपूर्ति के बीच संतुलन बनाए रखना है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस फैसले का असर देश के भीतर बिकने वाले पेट्रोल और डीजल की मौजूदा एक्साइज ड्यूटी पर नहीं पड़ेगा। यानी आम उपभोक्ताओं के लिए घरेलू ईंधन कर व्यवस्था में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है।
संशोधन केवल निर्यात किए जाने वाले ईंधन पर लागू होगा। नई व्यवस्था के तहत सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों द्वारा नेपाल, भूटान, बांग्लादेश, श्रीलंका, मॉरीशस और मालदीव को किए जाने वाले पेट्रोल, डीजल और एटीएफ के निर्यात को इस ड्यूटी से छूट दी गई है। पहले यह राहत चार पड़ोसी देशों तक सीमित थी, जिसे अब दो अतिरिक्त देशों तक बढ़ा दिया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में हालिया नरमी और पश्चिम एशिया में तनाव कम होने के बाद सरकार ने कर ढांचे में यह बदलाव किया है।
इससे घरेलू बाजार में ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ-साथ निर्यात नीति को भी मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के अनुरूप बनाया जा सकेगा। गौरतलब है कि सरकार समय-समय पर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों, रिफाइनिंग मार्जिन और घरेलू मांग की समीक्षा के आधार पर निर्यात शुल्क में संशोधन करती रही है। इस बार भी समीक्षा के बाद नई दरें तय की गई हैं, ताकि ऊर्जा सुरक्षा और राजस्व के बीच संतुलन बनाए रखा जा सके।



