जयपुर (प्रज्ञा पांडे)। हरियाणा के भिवानी जिले के रहने वाले 50 वर्षीय नरेंद्र यादव अपने जज्बे और देशभक्ति से लोगों को प्रेरित कर रहे हैं। वे जम्मू-कश्मीर के रेजांगला (अहीर धाम) से लेकर कन्याकुमारी तक साइकिल यात्रा पर निकले हैं। इस यात्रा का उद्देश्य सिर्फ हजारों किलोमीटर का सफर तय करना नहीं, बल्कि शहीदों के सम्मान और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देशभर तक पहुंचाना है। नरेंद्र यादव अपने साथ रेजांगला के शहीदों की पावन मिट्टी लेकर चल रहे हैं और लोगों से अपील कर रहे हैं कि ‘एक पेड़ शहीदों के नाम’ जरूर लगाएं। नरेंद्र यादव अपनी यात्रा के दौरान रोजाना करीब 100 से 150 किलोमीटर साइकिल चलाते हैं। इसी अभियान के तहत वह गुरुवार को जयपुर पहुंचे, जहां स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने उनका स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह सफर आसान नहीं है, लेकिन देश के वीर जवानों के सम्मान का संकल्प उन्हें लगातार आगे बढ़ने की ताकत देता है।
नरेंद्र यादव की जिंदगी में एक ऐसा दौर भी आया, जब लगा कि शायद अब वह कभी साइकिल नहीं चला पाएंगे। उन्होंने बताया कि साल 2020 में दूसरी मंजिल से गिरने के कारण उनके हाथ और पैर की हड्डियां टूट गई थीं। लंबे समय तक उन्हें बिस्तर पर रहना पड़ा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। स्वस्थ होने के बाद उन्होंने फिर से साइकिल उठाई और अपने सपनों की राह पर निकल पड़े। उनका कहना है कि “शरीर की चोटें समय के साथ ठीक हो जाती हैं, लेकिन देश के लिए कुछ करने का जज्बा कभी खत्म नहीं होना चाहिए।” आज जहां लंबी यात्राओं के लिए लोग आधुनिक रेसिंग साइकिल का इस्तेमाल करते हैं, वहीं नरेंद्र यादव एक साधारण 24 इंच की साइकिल से हजारों किलोमीटर का सफर तय कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि भविष्य में उन्हें एक रेसिंग साइकिल मिलने की उम्मीद है, लेकिन फिलहाल वे अपनी पुरानी साइकिल से ही इस मिशन को पूरा कर रहे हैं।
नरेंद्र यादव अब तक करीब 24 हजार किलोमीटर की साइकिल यात्रा पूरी कर चुके हैं। उनके इसी जुनून के कारण लोग उन्हें ‘साइकिलिस्ट मैन’ के नाम से भी जानते हैं। सामाजिक कार्यों में योगदान के लिए उन्हें हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी भी सम्मानित कर चुके हैं। इतना ही नहीं, नरेंद्र यादव ने मृत्यु के बाद देहदान करने का भी संकल्प लिया है। उनका कहना है कि जीवन के बाद भी उनका शरीर समाज के काम आए, यही उनकी इच्छा है। जयपुर पहुंचने पर झोटवाड़ा स्थित बोरिंग चौराहे पर अखिल भारतीय यादव महासभा की ओर से नरेंद्र यादव का स्वागत किया गया। उन्हें शॉल और दुपट्टा पहनाकर सम्मानित किया गया। नरेंद्र यादव की यह साइकिल यात्रा केवल एक सफर नहीं, बल्कि साहस, देशभक्ति और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश है। उन्होंने साबित किया है कि यदि इरादे मजबूत हों, तो न उम्र मायने रखती है और न ही रास्ते की मुश्किलें। उनकी कहानी हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणा है, जो समाज और देश के लिए कुछ सकारात्मक करने का सपना देखता है।



