पटना। बिहार के चर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में परिवार को सुप्रीम कोर्ट से तत्काल राहत नहीं मिली है। शीर्ष अदालत ने मामले में सीबीआई जांच की मांग वाली जनहित याचिका पर सुनवाई से इनकार करते हुए याचिकाकर्ता को संबंधित हाई कोर्ट का रुख करने की अनुमति दे दी। अदालत के इस फैसले के बाद अब परिवार न्याय की मांग को लेकर पटना हाई कोर्ट में याचिका दायर करने की तैयारी कर रहा है।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस तरह के मामलों पर संबंधित हाई कोर्ट अधिक प्रभावी ढंग से विचार कर सकता है। अदालत ने याचिका के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी किए बिना याचिकाकर्ता को उचित कानूनी मंच पर जाने की छूट प्रदान की। भरत भूषण तिवारी की मौत जून महीने में बिहार के भोजपुर जिले में पुलिस मुठभेड़ के दौरान हुई थी। पुलिस का दावा है कि कार्रवाई आत्मरक्षा में की गई, जबकि परिवार का आरोप है कि भरत तिवारी ने आत्मसमर्पण कर दिया था और इसके बावजूद उन्हें गोली मार दी गई।
इसी आरोप के आधार पर परिवार लगातार निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की मांग कर रहा है। याचिका में सीबीआई से जांच कराने के अलावा घटना की परिस्थितियों की पड़ताल के लिए एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति गठित करने की भी मांग की गई थी। याचिकाकर्ता का कहना था कि मामले की निष्पक्ष जांच और पुलिस कार्रवाई की सत्यता सामने लाने के लिए स्वतंत्र एजेंसी की जांच आवश्यक है। इस बीच बिहार सरकार पहले ही इस पूरे मामले की न्यायिक जांच कराने की घोषणा कर चुकी है। घटना के बाद कई स्तरों पर सवाल उठे थे, जिसके चलते संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई शुरू की गई।
हालांकि परिवार का कहना है कि उन्हें राज्य स्तर की जांच पर भरोसा नहीं है और वे स्वतंत्र एजेंसी से जांच चाहते हैं। परिवार के सदस्यों ने कहा कि अब वे पटना हाई कोर्ट में विस्तृत याचिका दाखिल करेंगे और पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच की मांग करेंगे। उनका कहना है कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा विश्वास है और उम्मीद है कि अदालत मामले की सभी परिस्थितियों की गहन समीक्षा करेगी।
यह मामला बिहार में पुलिस कार्रवाई, मानवाधिकार और कानून व्यवस्था को लेकर व्यापक चर्चा का विषय बना हुआ है। अब सभी की नजरें पटना हाई कोर्ट पर होंगी, जहां इस मामले की अगली कानूनी लड़ाई लड़ी जाएगी और आगे की दिशा तय होगी।



