Bengal Elections 2026 : कोलकाता। सीएम ममता बनर्जी और सुवेंदु अधिकारी बुधवार सुबह भवानीपुर के चक्रबेड़िया इलाके में एक ही मतदान केंद्र से जुड़े क्षेत्र में पहुंचे, जहां बिना आमने-सामने आए ही दोनों नेताओं के बीच तीखी सियासी तकरार देखने को मिली। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी स्थानीय तृणमूल नेताओं को कथित रूप से डराने-धमकाने की शिकायत मिलने के बाद वार्ड नंबर 70 के मतदान केंद्र के बाहर मौजूद थीं। इसी दौरान शुभेंदु अधिकारी भी वहां पहुंच गए, जिससे इलाके का राजनीतिक तापमान और बढ़ गया। हालांकि दोनों नेताओं का सीधा सामना नहीं हुआ, लेकिन उनके बयानों और तंजों ने यह साफ कर दिया कि भवानीपुर में प्रतिष्ठा की यह लड़ाई बेहद अहम और हाई-वोल्टेज हो चुकी है।
ममता बनर्जी-शुभेंदु अधिकारी आमने-सामने
बनर्जी जब पार्टी कार्यालय के बरामदे में बैठी थीं, तभी अधिकारी केंद्रीय बलों के कर्मियों की एक बड़ी टुकड़ी के साथ ठीक सामने वाली सड़क पर पहुंचे और मुख्यमंत्री पर हमला बोलते हुए दावा किया कि उन्हें (ममता बनर्जी) को एहसास हो गया है कि ‘एक भी वोट‘ उनके पक्ष में नहीं आ रहा है। बनर्जी ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर केंद्रीय बलों, पुलिस पर्यवेक्षकों और चुनाव अधिकारियों के जरिए चुनाव में ‘‘धांधली’’ करने की कोशिश करने का आरोप लगाया जबकि अधिकारी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे ‘‘हताशा’’ का संकेत बताया। बनर्जी ने कहा कि ममता ‘घबराई’ हुई हैं क्योंकि चुनाव प्रक्रिया पर अब राज्य पुलिस का कोई नियंत्रण नहीं है।
नंदीग्राम और भवानीपुर से भाजपा उम्मीदवार अधिकारी ने कहा, ममता बनर्जी डरी हुई हैं। उनकी पुलिस को केंद्रीय बलों से बदल दिया गया है, इसलिए वह घबराई हुई हैं। निर्वाचन आयोग ने यहां केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल के कर्मी तैनात किए हैं, तो अगर उन्हें कोई समस्या है तो उन्हें निर्वाचन आयोग के पास जाना चाहिए। उनके साथ 40-50 लोग क्यों आए हैं? उन्होंने दावा किया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी उन्हें फोन किया था। अधिकारी ने बनर्जी पर धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू होने के बावजूद ‘50-60 गुंडों’ के साथ घूमने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा, बनर्जी उम्मीदवार हैं। वह बूथ पर जा सकती हैं। लेकिन यह ‘गुंडागर्दी’ क्यों? मैंने कोलकाता के कानून प्रवर्तन अधिकारी से शिकायत की है। इस बार किसी को भी धमकाने की इजाजत नहीं दी जाएगी।
लोगों को स्वतंत्र रूप से वोट देने की अनुमति मिलनी चाहिए : ममता बनर्जी
चक्रबेड़िया में अधिकारी ने बनर्जी के खिलाफ प्रचार करते हुए कहा, कोई भी उन्हें वोट नहीं दे रहा है। लोगों को स्वतंत्र रूप से वोट देने की अनुमति मिलनी चाहिए। मैं भवानीपुर में कम से कम 30,000 वोटों के अंतर से जीतूंगा। तृणमूल कांग्रेस प्रमुख आमतौर पर मतदान के दिन दोपहर में अपने कालीघाट स्थित आवास से निकलकर मित्रा इंस्टीट्यूशन स्कूल में वोट डालने जाती हैं लेकिन इस बार परंपरा को तोड़ते हुए वह सुबह आठ बजे से पहले ही भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न मतदान केंद्रों का दौरा करने निकल पड़ीं, जिससे इस सीट और दक्षिण बंगाल की बड़ी राजनीतिक लड़ाई का संकेत मिला। दूसरे और अंतिम चरण में 142 विधानसभा क्षेत्रों में मतदान शुरू होने के साथ ही बनर्जी चेतला, पद्मपुकुर और चक्रबेड़िया क्षेत्रों में घूमती रहीं, मतदान केंद्रों का दौरा किया, स्थानीय नेताओं से बात की और वार्ड नंबर 70 के मतदान केंद्र के बाहर बैठ गईं, जहां शिकायत थी कि स्थानीय पार्षद को घर से बाहर निकलने से रोका जा रहा है।
बनर्जी ने पत्रकारों से कहा, भाजपा इस चुनाव में धांधली करना चाहती है। पश्चिम बंगाल में चुनाव आमतौर पर शांतिपूर्ण होते हैं। क्या यहां गुंडा राज है? उन्होंने आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक मानकों से गंभीर समझौता किया गया है। उन्होंने केंद्रीय बलों और चुनाव पर्यवेक्षकों पर भाजपा के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया और कहा कि तृणमूल कार्यकर्ताओं और नेताओं को जिलों में चुन-चुनकर निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया, कई पर्यवेक्षक बाहर से आए हैं और भाजपा के निर्देशों पर काम कर रहे हैं। वे थानों में जाकर दबाव बना रहे हैं। वे सभी तृणमूल एजेंटों को गिरफ्तार करने को कह रहे हैं। मेरी पार्टी की युवा इकाई के अध्यक्ष को आज सुबह पकड़ लिया गया और बाद में छोड़ा गया।
बंगाल में अत्याचार हुए, हम पूरी रात जागते रहे : ममता बनर्जी
बनर्जी ने दावा किया कि वह और तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी पूरी रात स्थिति पर नजर रखने के लिए जागते रहे। मुख्यमंत्री ने कहा, कल रात पूरे पश्चिम बंगाल में अत्याचार हुए। हम पूरी रात जागते रहे। हमारे कार्यकर्ता मरने के लिए तैयार हैं, लेकिन हम लोकतंत्र की हत्या नहीं होने देंगे। बनर्जी ने यह भी आरोप लगाया कि बाहरी लोगों को निर्वाचन क्षेत्र में लाया जा रहा है और मतदान शुरू होने से पहले तृणमूल के सभी झंडे हटा दिए गए। पत्रकारों को वीडियो दिखाते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्रीय बल के जवान वार्ड नंबर 70 के पार्षद के घर गए, जब वहां केवल उनकी पत्नी मौजूद थीं। उन्होंने पूछा, जब केंद्रीय बल वहां गए, तो घर में उनकी पत्नी अकेली थीं। उन्हें धमकाया गया और यहां तक कहा गया कि उनका फोन भी ले लिया जाएगा। क्या इसी तरह चुनाव कराए जाते हैं?
इससे पहले बनर्जी चेतला इलाके में गईं और कोलकाता पोर्ट से तृणमूल उम्मीदवार एवं राज्य मंत्री फिरहाद हाकिम के आवास के पास रुकीं, जहां उन्होंने केंद्रीय बलों और चुनाव पर्यवेक्षकों द्वारा कथित उत्पीड़न का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, देर रात वे हाकिम के घर गए और दरवाजा खटखटाया। वहां उनकी पत्नी थीं। महिलाएं डर गई थीं। उन्होंने भांगड़ में कथित अशांति का मुद्दा भी उठाया और चुनाव आयोग पर निष्पक्षता सुनिश्चित करने में विफल रहने का आरोप लगाया। बनर्जी ने कहा, ये लोग यह सब कर रहे हैं और फिर वोट मांग रहे हैं। क्या लोग इन्हें वोट देंगे? ये बलपूर्वक जीतना चाहते हैं। बहरहाल, भाजपा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि बनर्जी सत्तारूढ़ पार्टी के खिलाफ जनता के गुस्से को भांपकर भ्रम फैलाने की कोशिश कर रही हैं।
कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने भवानीपुर में सुबह से लगातार दौरा करने को लेकर ममता बनर्जी पर निशाना साधा और दावा किया कि बूथों पर उनका इस तरह का पहला दौरा उनकी ‘बेचैनी’ और जीत को लेकर आत्मविश्वास की कमी को दर्शाता है। कांग्रेस नेता और ब्रह्मपुर से उम्मीदवार चौधरी ने मुर्शिदाबाद में पत्रकारों से कहा, यह पहली बार है जब हम बनर्जी को मतदान के दिन अपने निर्वाचन क्षेत्र में एक बूथ से दूसरे बूथ पर जाते हुए देख रहे हैं। वह बेचैन और अपनी जीत को लेकर आश्वस्त नहीं लग रही हैं। अधिकारी ने कहा कि मुख्यमंत्री का सुबह-सुबह मतदान केंद्रों का दौरा करना उनकी हताशा को दर्शाता है। उन्होंने कहा, उन्हें एहसास हो गया है कि उन्हें एक भी वोट नहीं मिल रहा। उनकी हताशा चरम पर है।
बनर्जी के सुबह-सुबह मतदान केंद्रों पर पहुंचने पर तंज कसते हुए अधिकारी ने कहा, ‘‘वह कहीं भी जाएं, वह हारेंगी।’’ अधिकारी ने कहा कि निर्वाचन आयोग ने स्वतंत्र और निष्पक्ष मतदान के लिए उचित व्यवस्थाएं की हैं। कोलकाता, हावड़ा, उत्तर और दक्षिण 24 परगना, नदिया, हुगली और पूर्व बर्दवान जिलों की 142 सीटों पर मतदान जारी है। ये जिले राज्य की राजनीति और चुनावी समीकरण का केंद्र माने जाते हैं और तृणमूल का पारंपरिक दक्षिणी गढ़ हैं। इस चरण का परिणाम सत्तारूढ़ तृणमूल और भाजपा दोनों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भाजपा 2021 में इन 142 सीटों में से केवल 18 सीटों तक सीमित रही थी, जबकि तृणमूल ने 123 और इंडियन सेक्युलर फ्रंट (आईएसएफ) ने एक सीट जीती थी। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के लिए 23 अप्रैल को हुए पहले चरण के मतदान में 93.19 प्रतिशत लोगों ने अपने मताधिकार का उपयोग किया था। यह राज्य के इतिहास में अब तक का सबसे अधिक मतदान प्रतिशत था। मतदान शाम छह बजे तक जारी रहेगा और मतगणना चार मई को होगी।



