भरतपुर। राजस्थान के भरतपुर जिले में पूर्व भाजपा विधायक अतर सिंह भड़ाना की हत्या के मामले में पुलिस ने जांच तेज कर दी है। शनिवार को तीन और आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इसके साथ ही मामले में गिरफ्तार आरोपियों की कुल संख्या नौ हो गई है। दूसरी ओर, पुलिस विभाग ने वैर थाने में तैनात टीआई कांस्टेबल पवन कुमार को भी निलंबित कर दिया है। उस पर समय रहते जरूरी सूचना नहीं देने और पुलिस गतिविधियों से जुड़ी जानकारी प्रदर्शनकारियों तक पहुंचाने सहित अन्य आरोप लगे हैं। इन आरोपों की विभागीय स्तर पर जांच होनी बाकी है।
पुलिस के मुताबिक, हालिया कार्रवाई में कपिल (35), लाखन (41) और जितेंद्र (27) को गिरफ्तार किया गया है। यह कार्रवाई भरतपुर रेंज की आईजी प्रीति चंद्रा और जिला पुलिस अधीक्षक राजेश मीणा के निर्देश पर की गई। इससे पहले पांच आरोपी भागमल, सोनी, शेरसिंह, बलदेव और कुंवरसिंह गिरफ्तार किए गए थे। दो दिन के पुलिस रिमांड के बाद उन्हें अदालत में पेश किया गया, जहां से न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया।
इस मामले में नामजद मुख्य आरोपी मुकेश फौजी को भी 16 अक्टूबर को करौली-धौलपुर सीमा के पास डांग के जंगलों से गिरफ्तार किया गया था। पुलिस को उम्मीद है कि उससे और अन्य आरोपियों से पूछताछ के दौरान घटना की साजिश, विवाद की पृष्ठभूमि और दूसरे लोगों की भूमिका से जुड़े नए तथ्य सामने आ सकते हैं।
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फरारी के दौरान कई जगह बदले ठिकाने
पुलिस के अनुसार, मुकेश फौजी गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार अपने ठिकाने बदल रहा था। बताया गया है कि फरारी के शुरुआती दिनों में उसने रिश्तेदारों के यहां शरण ली। पुलिस ने जब वहां दबिश देनी शुरू की तो वह डांग के जंगलों की तरफ चला गया। इसके बाद गढ़ी बाजना, करौली और धौलपुर के आसपास अलग-अलग जगहों पर रहने की जानकारी सामने आई।
पुलिस ने तकनीकी निगरानी और लोकेशन के आधार पर उसकी तलाश की और आखिरकार उसे गिरफ्तार कर लिया। अब उससे पूछताछ के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि वारदात से पहले किन लोगों से संपर्क किया गया था और घटना के दौरान किसकी क्या भूमिका रही।
मुकेश फौजी सेना की पांचवीं राजपूत रेजिमेंट में नायब सूबेदार के पद पर सेवाएं दे चुका है। रिपोर्टों के मुताबिक, उसने सेना में करीब 24 साल तक सेवा दी थी। सेवानिवृत्ति के बाद वह अपने गांव में रह रहा था और स्थानीय लोगों के बीच कानूनी तथा सरकारी मामलों में सलाह देने के लिए भी जाना जाता था।
करीब दो साल से चल रहा था क्रशर और रास्ते का विवाद
पूर्व विधायक अतर सिंह भड़ाना की हत्या का मामला भरतपुर जिले के वैर थाना क्षेत्र के भौंडा गांव में क्रशर प्लांट और खनन लीज तक पहुंचने वाले रास्ते को लेकर चल रहे विवाद से जुड़ा है। ग्रामीणों और भड़ाना पक्ष के बीच इस मुद्दे पर लंबे समय से टकराव की स्थिति बनी हुई थी। ग्रामीणों ने चरागाह भूमि के इस्तेमाल और कथित अवैध खनन को लेकर कई बार विरोध किया था। इस मुद्दे पर धरने और अन्य प्रदर्शन भी हुए थे।
पुलिस की जांच के मुताबिक, मुकेश फौजी ग्रामीणों की ओर से लीज तक जाने वाला रास्ता बंद कराने के आंदोलन में सक्रिय था। करीब दो साल तक चले इस विवाद में धरने-प्रदर्शन से लेकर अदालत में कानूनी लड़ाई तक का दौर चला। इसी दौरान दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ता रहा।
11 अक्टूबर की शाम विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। आरोप है कि क्रशर प्लांट पर हुए टकराव के दौरान अतर सिंह भड़ाना पर हमला किया गया। वह गंभीर रूप से घायल हो गए और इलाज के लिए जयपुर ले जाते समय उनकी मौत हो गई। उनके साथ मौजूद गनमैन गगन शर्मा भी घायल हुए थे। घटना के बाद पुलिस ने कई आरोपियों की पहचान कर उनकी गिरफ्तारी के लिए टीमें गठित की थीं।
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कांस्टेबल पवन कुमार पर कार्रवाई, पहले SHO भी हो चुके हैं सस्पेंड
हत्याकांड के बाद पुलिस विभाग ने आंतरिक स्तर पर भी कार्रवाई की है। वैर थाने के थानाधिकारी को पहले ही निलंबित किया जा चुका है, जबकि दो आरपीएस अधिकारियों को एपीओ किया गया था। अब टीआई कांस्टेबल पवन कुमार को भी सस्पेंड कर दिया गया है।
रिपोर्टों के अनुसार, कांस्टेबल की जिम्मेदारी क्षेत्र में आसूचना जुटाने की थी। उस पर आरोप है कि उसने समय पर अधिकारियों को जरूरी जानकारी नहीं दी। साथ ही ट्रैक्टर चालकों और प्रदर्शनकारियों से कथित अवैध वसूली करने तथा पुलिस की गतिविधियों की जानकारी प्रदर्शनकारियों तक पहुंचाने के आरोप भी सामने आए हैं। इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही होगी।
पुलिस विभाग की कार्रवाई का उद्देश्य घटना से पहले और उसके दौरान हुई संभावित चूक की पड़ताल करना है। जांच में यह भी देखा जाएगा कि विवाद और विरोध-प्रदर्शनों के बारे में पुलिस को पहले से कितनी जानकारी थी तथा उस जानकारी के आधार पर क्या कदम उठाए गए थे।
जिला परिषद चुनाव लड़ने की तैयारी भी कर रहा था मुकेश फौजी
पुलिस जांच से जुड़ी रिपोर्टों में यह भी बताया गया है कि मुकेश फौजी पिछले कुछ महीनों से जिला परिषद सदस्य का चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहा था। उसने वार्ड संख्या आठ से चुनाव लड़ने के पोस्टर भी लगाए थे। रिपोर्ट के मुताबिक, वह कांग्रेस से टिकट मांगने की तैयारी में था।
हालांकि, चुनाव लड़ने की तैयारी और किसी राजनीतिक दल से संपर्क होने की बात अपने आप में हत्याकांड से जुड़ी किसी राजनीतिक साजिश का प्रमाण नहीं है। इस पहलू को घटना की जांच से अलग रखकर देखना जरूरी है। फिलहाल पुलिस का मुख्य ध्यान आरोपियों की भूमिका, घटना की परिस्थितियों और पुराने विवाद के कारणों को स्पष्ट करने पर है।
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आगे क्या होगी कार्रवाई?
पूर्व विधायक की मौत के मामले में अब तक नौ आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस जांच के अगले चरण में पहुंच गई है। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ, घटनास्थल से जुड़े साक्ष्यों की पड़ताल और विवाद की पुरानी शिकायतों की समीक्षा इस जांच के अहम हिस्से हैं। साथ ही, थाने के स्तर पर संभावित लापरवाही को लेकर विभागीय कार्रवाई भी जारी है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच में घटना की पूरी साजिश, हमले में शामिल लोगों की भूमिका और पुलिस व्यवस्था में संभावित चूक के बारे में क्या तथ्य सामने आते हैं।



