जयपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर जयपुर के अल्बर्ट हॉल को 33 लाख दीयों से रोशन कर रिकॉर्ड बनाने वाली बीजेपी सरकार अब दीपावली पर मंदिरों में दीपदान के बजट को लेकर विपक्ष के निशाने पर है। प्रदेश के करीब 460 मंदिरों में पंचपर्व दीपावली के आयोजनों के लिए बजट जारी होने में देरी का मामला सामने आने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने इसे आस्था से जुड़ा मामला बताते हुए बीजेपी सरकार की धार्मिक प्राथमिकताओं पर निशाना साधा।
460 मंदिरों में दीपोत्सव के बजट का इंतजार
विपक्ष का आरोप है कि दीपावली नजदीक आने के बावजूद देवस्थान विभाग के अंतर्गत आने वाले करीब 460 मंदिरों में दीपोत्सव के लिए राशि जारी नहीं हुई है। बजट में देरी के चलते मंदिरों में भगवान के विशेष शृंगार, भोग, फूल बंगला, दीपदान, रंगोली और अन्नकूट जैसे आयोजनों की तैयारियां प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। अशोक गहलोत ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर 33 लाख दीये जलाकर रिकॉर्ड बनाने वाली बीजेपी सरकार के राज में राजस्थान के मंदिरों में दीपावली पर दीपदान के लिए बजट अटका हुआ है। उन्होंने सवाल उठाया कि सनातन धर्म और आस्था की बात करने वाली सरकार मंदिरों में दीपक जलाने के लिए समय पर राशि क्यों उपलब्ध नहीं करा पा रही है।
पांच दिन के दीपदान के लिए दो लीटर तेल और 50 दीपक!
गहलोत ने दीपदान के लिए निर्धारित व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि पांच दिन के दीपदान के लिए महज दो लीटर तेल और 50 दीपक देने की व्यवस्था है। विपक्ष का कहना है कि दीपोत्सव के आयोजनों के लिए निर्धारित राशि पर्याप्त नहीं है और बजट जारी होने में देरी से मंदिरों की तैयारियों पर असर पड़ सकता है।
देवस्थान विभाग ने जल्द बजट जारी होने की कही बात
वहीं, देवस्थान विभाग के असिस्टेंट कमिश्नर महेंद्र कुमार के अनुसार, दीपोत्सव के बजट का प्रस्ताव सरकार को भेजा जा चुका है। उन्होंने बताया कि राशि आज शाम या अगले दिन तक जारी होने की उम्मीद है। साथ ही उन्होंने भरोसा दिलाया कि मंदिरों को दीपोत्सव के आयोजन के लिए पर्याप्त बजट उपलब्ध कराया जाएगा।
पिछले साल दीपावली से 25 दिन पहले जारी हुआ था बजट
देवस्थान विभाग के अंतर्गत जयपुर में राजकीय प्रत्यक्ष प्रभार श्रेणी के 32 मंदिर हैं, जबकि प्रदेशभर में ऐसे मंदिरों की संख्या करीब 460 बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार, इन मंदिरों में दीपोत्सव के लिए लगभग 1.25 लाख रुपये के बजट का प्रावधान है। आमतौर पर दीपावली से करीब एक महीने पहले बजट जारी होने के बाद मंदिरों में तैयारियां शुरू हो जाती हैं। पिछले साल भी दीपोत्सव का बजट करीब 25 दिन पहले जारी किया गया था, लेकिन इस बार राशि का इंतजार बना हुआ है। बजट जारी होने में देरी और निर्धारित राशि की पर्याप्तता को लेकर अब राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। विपक्ष ने सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं, जबकि देवस्थान विभाग ने जल्द राशि जारी होने का भरोसा दिया है।



