जयपुर। राजस्थान विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव बहाल करने और राजस्थानी भाषा विभाग की स्थापना की मांग को लेकर आमरण अनशन पर बैठे छात्र नेता शुभम रेवाड़ के आंदोलन ने अब राजनीतिक रूप ले लिया है। आंदोलन के 15वें दिन पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत जयपुर के सवाई मानसिंह (SMS) अस्पताल पहुंचे और आईसीयू में भर्ती शुभम रेवाड़ का हालचाल जाना। इस दौरान उन्होंने डॉक्टरों से छात्र नेता की स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी ली और शुभम से बातचीत कर उनका हौसला बढ़ाया।
करीब 48 घंटे से पानी और चिकित्सा सहायता लेने से इनकार कर रहे शुभम रेवाड़ ने अशोक गहलोत के आग्रह के बाद जल ग्रहण करने पर सहमति जताई। गहलोत ने स्वयं अपने हाथों से उन्हें पानी पिलाया। हालांकि छात्र नेता ने स्पष्ट किया कि उनका आमरण अनशन और दोनों मांगों को लेकर सत्याग्रह जारी रहेगा।
23 जुलाई से जारी है आमरण अनशन
शुभम रेवाड़ ने 23 जुलाई को राजस्थान विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर अनिश्चितकालीन आमरण अनशन शुरू किया था। उनकी प्रमुख मांगों में प्रदेश के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में छात्रसंघ चुनावों की बहाली तथा राजस्थान विश्वविद्यालय में राजस्थानी भाषा विभाग की स्थापना शामिल है।
अनशन के दौरान लगातार बिगड़ती सेहत के कारण प्रशासन ने उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया था। बाद में उन्होंने सरकार की ओर से वार्ता नहीं होने पर दवाइयां, ड्रिप और पानी तक लेने से इनकार कर दिया था, जिससे उनकी स्थिति गंभीर हो गई।
अशोक गहलोत ने सरकार पर उठाए सवाल
अस्पताल पहुंचने से पहले पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया के माध्यम से राज्य सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि छात्र नेता पिछले कई दिनों से आमरण अनशन पर हैं, लेकिन सरकार की ओर से न तो कोई प्रतिनिधि उनसे मिलने पहुंचा और न ही उनकी मांगों पर गंभीरता दिखाई गई।
गहलोत ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में छात्रों की आवाज को अनसुना नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार छात्रसंघ चुनाव कराने के मुद्दे पर अनावश्यक हठधर्मिता दिखा रही है।
मध्य प्रदेश का भी दिया उदाहरण
पूर्व मुख्यमंत्री ने मध्य प्रदेश का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां न्यायालय के निर्देशों के बाद विश्वविद्यालयों में छात्रसंघ चुनाव कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब दूसरे राज्यों में छात्रसंघ चुनाव संभव हैं तो राजस्थान में इन्हें शुरू करने में क्या बाधा है।
बढ़ा राजनीतिक तापमान
शुभम रेवाड़ के आंदोलन को लेकर प्रदेश की राजनीति भी गरमा गई है। विपक्ष लगातार सरकार पर छात्रों की उपेक्षा का आरोप लगा रहा है, जबकि छात्र संगठनों का कहना है कि यदि जल्द कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।
फिलहाल छात्र नेता का अनशन जारी है और उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर डॉक्टरों की निगरानी बनी हुई है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार इस पूरे मामले में क्या रुख अपनाती है।



