Saturday, October 17, 2026
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लोकतांत्रिक आंदोलनों को अराजकता बताने पर अशोक गहलोत का भाजपा पर पलटवार, बोले— सत्ता परिवर्तन की मांग करना अपराध नहीं

कथित वोट चोरी और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी दलों के आंदोलनों को भाजपा नेताओं द्वारा अराजकता करार दिए जाने पर राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पलटवार किया है।

जयपुर। कथित वोट चोरी और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी दलों के आंदोलनों को भाजपा नेताओं द्वारा अराजकता करार दिए जाने पर राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में चुनाव के माध्यम से सत्ता परिवर्तन की मांग करना न तो अपराध है और न ही कोई साजिश। विपक्ष का काम सरकार से सवाल पूछना, जनहित के मुद्दे उठाना और लोकतांत्रिक तरीके से सरकार की नीतियों का विरोध करना है।

गहलोत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर भाजपा नेताओं के बयानों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भाजपा के नेता विपक्ष पर बांग्लादेश जैसी अराजकता फैलाने और सड़कों पर आंदोलन के जरिए सत्ता बदलने की कोशिश करने के आरोप लगा रहे हैं। भाजपा को बताना चाहिए कि राहुल गांधी के नेतृत्व में चल रहे आंदोलन में हिंसा कहां दिखाई दी?

दिल्ली में शांतिपूर्ण मार्च का किया उल्लेख
पूर्व मुख्यमंत्री ने 12 अक्टूबर को दिल्ली में आयोजित मार्च का उल्लेख करते हुए कहा कि लंबे समय बाद राजधानी में इतना अनुशासित, शांतिपूर्ण और उत्साहपूर्ण मार्च देखने को मिला। इसमें इंडिया गठबंधन के विभिन्न दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ सामाजिक कार्यकर्ता, आम नागरिक और जेन-जी के युवा भी शामिल हुए। गहलोत के अनुसार, लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन जनता की आवाज उठाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। ऐसे आंदोलनों को अराजकता बताना लोकतांत्रिक अधिकारों और विपक्ष की भूमिका पर सवाल खड़े करने जैसा है।

अन्ना आंदोलन और 2014 के चुनाव का दिया उदाहरण
गहलोत ने कहा कि वर्ष 2014 से पहले देश में लोकपाल की मांग को लेकर अन्ना हजारे ने आंदोलन किया था। वहीं, कालेधन के मुद्दे पर बाबा रामदेव ने आंदोलन किया और 2जी स्पेक्ट्रम तथा कोयला आवंटन से जुड़े विवादों को लेकर भी बड़े स्तर पर विरोध-प्रदर्शन हुए थे। इन आंदोलनों में दिल्ली सहित देश के विभिन्न हिस्सों में बड़ी संख्या में लोग जुटे थे। उन्होंने कहा कि इन आंदोलनों के बाद हुए 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा, लेकिन पार्टी ने जनता के जनादेश को स्वीकार किया। गहलोत ने इन उदाहरणों के जरिए कहा कि लोकतंत्र में आंदोलन करना और चुनाव के माध्यम से सत्ता परिवर्तन होना राजनीतिक व्यवस्था का स्वाभाविक हिस्सा है।

‘लोकतांत्रिक विरोध को कभी अराजकता नहीं बताया’
गहलोत ने कहा कि कांग्रेस ने लोकतांत्रिक धरने-प्रदर्शनों को कभी देशविरोधी साजिश या सत्ता परिवर्तन के लिए अराजकता फैलाने की कोशिश नहीं बताया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष की जिम्मेदारी है कि वह जनहित के मुद्दों पर सरकार को घेरने के साथ उसकी नीतियों और कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी भी लोकतंत्र में विपक्ष की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर देते थे। राहुल गांधी के राजनीतिक संदेश ‘नफरत के बाजार में मोहब्बत की दुकान’ का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इस विचार में अराजकता के लिए कोई स्थान नहीं है।

उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस ने देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था की नींव मजबूत करने और डॉ. भीमराव अंबेडकर के नेतृत्व में निर्मित संविधान के माध्यम से लोकतांत्रिक मूल्यों को स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

‘सवाल पूछना जनता का अधिकार’
गहलोत ने कहा कि लोकतंत्र में सरकार से सवाल पूछना अराजकता नहीं, बल्कि जनता का अधिकार है। जनहित के मुद्दों पर सवाल उठाना, सरकार की जवाबदेही तय करना और अपनी असहमति शांतिपूर्ण तरीके से व्यक्त करना लोकतांत्रिक व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा विपक्ष और जनता की आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है। गहलोत ने कहा कि सरकार और सत्तारूढ़ दल को यह समझना चाहिए कि लोकतंत्र में असहमति के स्वर को दबाने के बजाय उनका जवाब देना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि विपक्ष और जनता की आवाज को जितना दबाने की कोशिश की जाएगी, वह उतनी ही बुलंद होकर सामने आएगी।

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