Anti Paper Leak Bill: लोकसभा में बुधवार को ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026’ को ध्वनिमत से पारित हो गया. नीट प्रश्नपत्र लीक समेत विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और अनुचित साधनों के मामलों पर सख्त कार्रवाई के उद्देश्य से लाए गए इस विधेयक पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली.

नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की कुछ टिप्पणियों को लेकर सदन में हंगामा हुआ, जिसके चलते लोकसभा की कार्यवाही पहले करीब 40 मिनट के लिए और बाद में फिर 3 बजे तक स्थगित करनी पड़ी। दोबारा कार्यवाही शुरू होने पर कांग्रेस सांसद “एलओपी को बोलने दो” के नारे लगाते रहे. इसी बीच प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने चर्चा का जवाब दिया, जिसके बाद सदन ने ध्वनिमत से विधेयक को मंजूरी दे दी. विधेयक पारित होने के बाद अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित कर दी.
NEET पेपर लीक मामलें चार्जशीट दाखिल, सुनवाई शुरू
चर्चा का जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि NEET प्रश्नपत्र लीक मामले में सरकार ने तत्काल कार्रवाई करते हुए 12 जुलाई को जांच सीबीआई को सौंप दी थी. उन्होंने बताया कि मामले में आरोपपत्र दाखिल किया जा चुका है और सुनवाई भी शुरू हो गई है. उन्होंने कहा कि संशोधित कानून लागू होने के बाद ऐसे मामलों की सुनवाई फास्ट ट्रैक अदालतों में होगी और लक्ष्य है कि 5 महीने के भीतर फैसला हो जाए.

विपक्ष के आरोपों का दिया जवाब
जितेंद्र सिंह ने चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई द्वारा छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर लगाए गए आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि सरकार ने “सर्वोच्च संयम” के साथ कार्रवाई की और किसी प्रकार की जनहानि नहीं होने दी. शायद वह (गोगोई) अपने अनुभव से बोल रहे थे. क्योंकि असम में 1979 से 1984 तक छात्रों के आंदोलन पर पुलिस कार्रवाई में 860 लोग मारे गए थे जिनमें अधिकतर छात्र थे. उस समय असम में कांग्रेस की सरकार थी.
लोकसभा में केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा, "जब इतने अहम बिल पर चर्चा हो रही हो, तो सुझाव देने के बजाय इस पर राजनीति की जा रही है। विपक्ष के नेता ने जिस असंसदीय भाषा का इस्तेमाल किया, वह हैरान करने वाली है; मुझे हैरानी होती है कि क्या उन्हें संसदीय कामकाज के बुनियादी नियमों… pic.twitter.com/sZeLHrHuhg
— ANI_HindiNews (@AHindinews) July 29, 2026
उन्होंने कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी के उस दावे पर भी सवाल उठाया, जिसमें पिछले कुछ वर्षों में 152 पेपर लीक और करोड़ों छात्रों के प्रभावित होने की बात कही गई थी. उन्होंने कहा, पता नहीं प्रियंका गांधी यह आंकड़ा कहां से लाईं. प्रियंका गांधी ने 2024 का कानून लागू होने के बाद कोई कार्रवाई नहीं होने की बात कही, जबकि ऐसे मामलों में 52 प्राथमिकियां दर्ज हो चुकी हैं. उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शिक्षा सुधार की प्रतिबद्धता का परिणाम है.
क्या हैं नए कानून के प्रमुख प्रावधान?
संशोधन विधेयक में परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित बनाने और पेपर लीक के मामलों में त्वरित एवं कठोर कार्रवाई के लिए कई नए प्रावधान किए गए हैं.
1.प्रश्नपत्र लीक या अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने पर कम से कम 5 वर्ष और अधिकतम 10 वर्ष तक की जेल, 50 लाख तक जुर्माने की सजा हो सकती है.
2.संगठित अपराध से जुड़े मामलों में कम से कम 7 वर्ष की सजा और 10 करोड़ तक जुर्माने का प्रावधान.
3.सभी जांच 2 महीने के भीतर पूरी करना अनिवार्य.
4.राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में फास्ट ट्रैक अदालतें स्थापित करने का प्रावधान.
5.आरोपपत्र दाखिल होने के तीन महीने के भीतर मुकदमे की सुनवाई पूरी करने का लक्ष्य.
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