Anna Hazare Silent Protest : मुंबई। दिल्ली के जंतर-मंतर पर सीजेपी के बैनर तले चल रहे छात्र आंदोलन को सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे का समर्थन मिला। महाराष्ट्र के अहिल्यानगर (पूर्व अहमदनगर) स्थित वाडिया पार्क में उन्होंने दो घंटे का मौन आंदोलन किया। इस दौरान उन्होंने सरकार से प्रदर्शनकारी छात्रों के साथ संवाद स्थापित कर उनकी समस्याओं का समाधान निकालने की अपील की।
छात्रों की पीड़ा सुन छलक पड़े आंसू
मौन आंदोलन के दौरान जब छात्रों की समस्याओं और उनके भविष्य पर पड़ रहे असर का जिक्र हुआ तो अन्ना हजारे भावुक हो गए। छात्रों के संघर्ष और उनकी चिंताओं को सुनते हुए उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। यह दृश्य वहां मौजूद लोगों के लिए भी भावनात्मक क्षण बन गया।

लोकतंत्र में संवाद को बताया सबसे बड़ा समाधान
अन्ना हजारे ने कहा कि छात्रों के भविष्य से जुड़े मुद्दों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उनका मानना है कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से अपनी बात रखने वाले छात्रों की मांगों पर सरकार को बातचीत के जरिए समाधान निकालना चाहिए। उन्होंने कहा कि टकराव की बजाय संवाद हर लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत होता है।
प्रधानमंत्री को लिखा था पत्र
इससे एक दिन पहले अन्ना हजारे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा और पुलिस कार्रवाई पर चिंता जताई थी। उन्होंने इसे बेहद दुखद बताते हुए कहा कि सरकार को प्रदर्शनकारी छात्रों से बातचीत करनी चाहिए। उनके अनुसार, लोकतंत्र में संवाद हमेशा टकराव से बेहतर विकल्प होता है।
जवाबदेही का दिया संदेश
अपने पत्र में अन्ना हजारे ने यह भी कहा कि यदि किसी मंत्री की जवाबदेही तय करते हुए उसका इस्तीफा लिया जाता है तो इससे सरकार कमजोर नहीं होती। बल्कि इससे शासन व्यवस्था में जवाबदेही मजबूत होती है और अन्य मंत्रियों को भी अपनी जिम्मेदारियों के प्रति गंभीर रहने का संदेश मिलता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार छात्रों की चिंताओं को संवेदनशीलता से सुनेगी और बातचीत के जरिए समाधान का रास्ता निकालेगी।



