जयपुर (प्रज्ञा पांडे)। उम्र सिर्फ 12 साल, लेकिन हौसले और सपने किसी बड़े खिलाड़ी से कम नहीं। राजस्थान के चित्तौड़गढ़ के रहने वाले एकांश ने अपनी मेहनत और जुनून के दम पर अंतरराष्ट्रीय मंच पर शानदार उपलब्धि हासिल की है। एकांश ने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक (गोल्ड) अपने नाम किया और जिले के साथ-साथ देश का नाम भी रोशन किया। हर खिलाड़ी की तरह एकांश को भी बड़े मुकाबले से पहले थोड़ी घबराहट होती है, लेकिन भारत के लिए खेलने और तिरंगे को ऊंचा करने का सपना उसे आगे बढ़ने की ताकत देता है। एकांश का कहना है कि मुकाबले से पहले डर जरूर लगता है, लेकिन देश के लिए गोल्ड जीतने का लक्ष्य उसे आत्मविश्वास देता है। उसका सपना है कि वह आने वाली प्रतियोगिताओं में भी भारत का प्रतिनिधित्व करे और देश के लिए और बड़ी उपलब्धियां हासिल करे।
एकांश की इस सफलता के पीछे उसकी लगातार मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास की बड़ी भूमिका है। वह नियमित अभ्यास, फिटनेस और अपने खेल को बेहतर बनाने पर लगातार ध्यान देता है। उसके परिवार ने भी उसके सपनों को समझा और हर कदम पर उसका साथ दिया। वहीं कोच के मार्गदर्शन ने उसकी प्रतिभा को निखारने और उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर के लिए तैयार करने में अहम भूमिका निभाई। एकांश की कहानी उन बच्चों के लिए प्रेरणा है, जो खेल के क्षेत्र में अपना नाम बनाना चाहते हैं। उसने साबित कर दिया कि सफलता हासिल करने के लिए उम्र नहीं, बल्कि मेहनत, लगन और विश्वास जरूरी होता है। अंतरराष्ट्रीय मंच पर तिरंगे के साथ गोल्ड मेडल जीतना एकांश के लिए सिर्फ एक उपलब्धि नहीं, बल्कि बड़े सपनों की शुरुआत है। चित्तौड़गढ़ के इस युवा खिलाड़ी की जीत उन सभी बच्चों के लिए उम्मीद की किरण है, जो छोटे शहरों से निकलकर दुनिया के मंच पर अपनी पहचान बनाना चाहते हैं।



