Tuesday, July 14, 2026
HomeUser Interest CategoryEntertainmentराजस्थानी लोकसंगीत का एक युग खत्म, नहीं रहे वीणा कैसेट के मालिक...

राजस्थानी लोकसंगीत का एक युग खत्म, नहीं रहे वीणा कैसेट के मालिक केसरी चंद मालू

गांवों की मिट्टी से निकली लोकधुनों को देश-दुनिया तक पहुंचाने वाले केसी मालू ने 80 साल की उम्र में अंतिम सांस ली। केसरी मालू ने लोकगीतों को सिर्फ रिकॉर्ड नहीं किया बल्कि उन्हें आने वाली पीढ़ियों के लिए सदा संरक्षित कर दिया।

जयपुर। राजस्थान के लोकसंगीत को गांवों की चौपाल से निकालकर देश-दुनिया तक पहुंचाने वाले, हजारों लोकगीतों को हमेशा के लिए सहेजने वाले और अनगिनत कलाकारों को पहचान दिलाने वाले वीणा म्यूजिक के संस्थापक केसी मालू अब हमारे बीच नहीं रहे। सोमवार देर रात करीब 1:30 बजे जयपुर में हार्ट अटैक से उनका निधन हो गया। वे 80 वर्ष के थे। मंगलवार शाम 4:30 बजे उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। उनकी अंतिम यात्रा निर्माण नगर स्थित मालू हाउस से पुरानी चुंगी मोक्षधाम के लिए निकलेगी। उनके निधन के साथ राजस्थान ने सिर्फ एक संगीत निर्माता नहीं, बल्कि अपनी लोक विरासत का ऐसा संरक्षक खो दिया है, जिसने पूरी जिंदगी राजस्थानी भाषा, लोकसंगीत और लोक कलाकारों को समर्पित कर दी।

राजस्थानी लोकसंगीत को कैसेट से इतिहास बना दिया

आज डिजिटल प्लेटफॉर्म का दौर है, लेकिन एक समय ऐसा था जब राजस्थानी लोकगीतों की पहचान वीणा कैसेट्स हुआ करती थी। गांव-गांव, शहर-शहर, शादी-ब्याह से लेकर त्योहारों तक जो गीत सुनाई देते थे, उनमें से बड़ी संख्या के पीछे केसी मालू की मेहनत थी। उन्होंने हजारों लोकगीत, भजन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों को रिकॉर्ड कर देश-विदेश तक पहुंचाया। सिर्फ रिकॉर्डिंग ही नहीं, बल्कि ऐसे कई लोक कलाकारों को मंच दिया, जिन्हें बाद में पूरे राजस्थान ने पहचाना। केसी मालू का सबसे बड़ा योगदान सिर्फ संगीत बनाना नहीं था, बल्कि उसे आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखना भी था। उन्होंने 5,000 से अधिक राजस्थानी लोकगीतों की पांडुलिपियां तैयार कीं, उनकी ध्वनिलिपि (नोटेशन) बनाई और ऑडियो रिकॉर्डिंग कर उन्हें संरक्षित किया। लोकसंगीत के जानकार इसे राजस्थान की सबसे बड़ी सांस्कृतिक धरोहरों में गिनते हैं। ‘घूमर’, ‘चीरमी’ और ‘कांगसियो’ जैसे कई लोकप्रिय राजस्थानी गीतों को नई पहचान दिलाने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।

राजस्थानी विवाह गीतों पर किया ऐतिहासिक शोध, ‘लता मंगेशकर नाइट’ की आयोजित

मालू ने सिर्फ संगीत रिकॉर्ड नहीं किया, बल्कि उस पर गंभीर शोध भी किया। उन्होंने 221 राजस्थानी विवाह गीतों का विशाल संकलन तैयार किया। हिंदी, अंग्रेजी और राजस्थानी भाषा में प्रकाशित यह सचित्र संग्रह विवाह गीतों पर दुनिया के सबसे बड़े संकलनों में माना जाता है। इन गीतों की 24 ऑडियो-वीडियो सीडी भी जारी की गईं, ताकि यह परंपरा हमेशा के लिए डिजिटल रूप में सुरक्षित रहे। केसी मालू के जीवन का सबसे चर्चित अध्याय 26 नवंबर 1987 का रहा। उस समय राजस्थान भीषण अकाल से जूझ रहा था। राहत कोष के लिए जयपुर के एसएमएस स्टेडियम में ‘लता मंगेशकर नाइट’ आयोजित की गई। इस कार्यक्रम का आयोजन मालू की संस्था सुरसंगम संस्थान ने किया था। लता मंगेशकर ने इस कार्यक्रम के लिए कोई फीस नहीं ली और अपनी टीम के साथ चार दिन जयपुर में रहीं। कार्यक्रम से उस समय करीब 1.01 करोड़ रुपये जुटाए गए, जो अकाल राहत कोष में दिए गए। कुछ समय पहले दैनिक भास्कर से बातचीत में केसी मालू ने उस मुलाकात का एक यादगार किस्सा सुनाया था। एयरपोर्ट पर उन्होंने लता मंगेशकर का स्वागत करते हुए कहा था- “धन्यभाग राजस्थान रा ज्यो थे पधारया।” इस पर लता जी मुस्कुराते हुए बोली थीं “अत्ता दिन थे बुलाया ही कोनी।” उन्होंने जयपुर में राजस्थानी भोजन किया, राजस्थानी में बातचीत की और मंच पर संगीतकार खेमचंद प्रकाश को भी याद किया, जिन्होंने उन्हें शुरुआती अवसर दिया था। मालू बताते थे कि लता मंगेशकर आमतौर पर 20 से ज्यादा गीत नहीं गाती थीं, लेकिन जयपुर के दर्शकों के उत्साह को देखकर उन्होंने उस रात लगातार 26 गीत गाए।

कई प्रतिष्ठित अवॉर्ड से सम्मानित हुए, राजस्थानी भाषा के लिए भी लड़े केसी मालू

संगीत के साथ-साथ केसी मालू राजस्थानी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने के आंदोलन से भी लंबे समय तक जुड़े रहे। उनका मानना था कि भाषा और लोकसंगीत एक-दूसरे के बिना अधूरे हैं। राजस्थान सरकार ने वर्ष 2022 में उन्हें राजस्थान रत्न सम्मान से सम्मानित किया। इसके अलावा उन्हें राजस्थान संगीत नाटक अकादमी का समग्र कला साधना पुरस्कार और महाराणा मेवाड़ फाउंडेशन का डागर घराना पुरस्कार भी मिला। ये सम्मान सिर्फ उनके संगीत के लिए नहीं, बल्कि राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के उनके आजीवन प्रयासों की पहचान थे। मालू ने महान संगीतकार नौशाद के साथ भी काम किया और देश के कई नामी कलाकारों के माध्यम से राजस्थानी लोकसंगीत को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने में योगदान दिया। उन्होंने सुर-संगम संस्थान और वीणा म्यूजिक के जरिए ऐसे कई कलाकारों को मंच दिया, जिनकी पहचान बाद में राजस्थान की आवाज के रूप में बनी।

दिग्गज दे रहे केसी मालू को श्रद्धांजलि

केसी मालू के निधन पर राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़, केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, ग्रैमी पुरस्कार विजेता विश्वमोहन भट्ट समेत कला, साहित्य और सामाजिक जगत की कई हस्तियों ने शोक व्यक्त किया। अशोक गहलोत ने कहा कि पिछले सप्ताह ही उनकी मुलाकात मालू से हुई थी। उन्होंने अपना पूरा जीवन संगीत जगत को समर्पित किया और राजस्थानी संगीत को देश-दुनिया में नई पहचान दिलाई। उनका निधन सभी के लिए बड़ी क्षति है। विश्वमोहन भट्ट ने कहा कि लोकसंगीत के इतने बड़े संरक्षक का अचानक चले जाना बेहद पीड़ादायक है और उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकेगा।

केसी मालू के जाने के बाद शायद वीणा कैसेट्स का वह दौर इतिहास बन चुका हो, लेकिन उनकी रिकॉर्ड की हुई आवाजें, उनके सहेजे हुए हजारों लोकगीत और उनके दिए मंच पर खड़े हुए कलाकार आने वाली पीढ़ियों को यह बताते रहेंगे कि राजस्थान का लोकसंगीत सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि एक जीवित विरासत है और उस विरासत को दुनिया तक पहुंचाने वालों में केसी मालू का नाम हमेशा सबसे आगे लिया जाएगा।

Please enable JavaScript in your browser to complete this form.

RELATED ARTICLES
- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

× Popup Image