(प्रज्ञा पांडे)। उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के हस्तिनापुर क्षेत्र से सामने आया एक मामला पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया है। पहली नज़र में यह एक सामान्य सांप के काटने से हुई मौत का मामला लगा, लेकिन कुछ ही घंटों में पुलिस की जांच ने इसे एक कथित सुनियोजित हत्या की दिशा में मोड़ दिया। हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि मामला अभी जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है। इस रिपोर्ट में जिन तथ्यों का उल्लेख पुलिस जांच, एफआईआर और मीडिया रिपोर्टों के आधार पर किया गया है, वे पुलिस के दावे हैं, जिन्हें अभी अदालत में साबित किया जाना बाकी है। पुलिस के अनुसार, मृतक अतुल और उनकी पत्नी दामिनी ने करीब छह वर्ष पहले परिवार की इच्छा के विरुद्ध प्रेम विवाह किया था। दोनों ने मिलकर अपना जीवन शुरू किया और हस्तिनापुर क्षेत्र में एक प्ले स्कूल भी संचालित करने लगे। स्थानीय लोगों के मुताबिक, बाहर से देखने पर परिवार सामान्य दिखाई देता था। लेकिन पुलिस का दावा है कि समय के साथ पति-पत्नी के संबंधों में तनाव बढ़ने लगा। जांच में पुलिस ने यह भी दावा किया है कि दामिनी के स्कूल में कार्यरत एक ड्राइवर तुषार के साथ कथित प्रेम संबंध थे। पुलिस का कहना है कि इसी रिश्ते ने आगे चलकर पूरे घटनाक्रम की नींव रखी। हालांकि, इस संबंध में अंतिम निष्कर्ष अदालत ही तय करेगी।
मौत वाली रात आखिर क्या हुआ?
पुलिस के अनुसार, गुरुवार रात अतुल को दूध में अधिक मात्रा में नींद की गोलियां मिलाकर दी गईं ताकि वे गहरी नींद में चले जाएं। इसके बाद पुलिस का आरोप है कि कमरे में एक ज़हरीला सांप छोड़ा गया, जिससे अतुल को सांप ने काट लिया। पुलिस का दावा है कि पूरी योजना का उद्देश्य मौत को प्राकृतिक दुर्घटना यानी सांप के काटने की घटना के रूप में दिखाना था। अगली सुबह दामिनी अपने पति को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचीं, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। शुरुआत में मामला सामान्य सांप के काटने से मौत का माना गया, लेकिन घटनास्थल और परिस्थितियों ने जांच अधिकारियों के मन में कई सवाल खड़े कर दिए। अतुल के परिजनों ने शुरुआत से ही इस मौत को संदिग्ध बताया। उनका आरोप था कि यह सामान्य दुर्घटना नहीं बल्कि हत्या है। परिवार की शिकायत के बाद पुलिस ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया और वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाने शुरू किए। इसी दौरान जांच का रुख बदलने लगा।
मोबाइल फोन बना जांच का अहम सुराग
पुलिस का दावा है कि तकनीकी जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण डिजिटल सबूत सामने आए। जांच अधिकारियों के अनुसार, कथित आरोपी के मोबाइल फोन से सांप की तस्वीर सहित कुछ ऐसे डिजिटल साक्ष्य मिले, जिन्होंने जांच को नई दिशा दी। पुलिस का कहना है कि कॉल डिटेल, मोबाइल डेटा और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर कथित साजिश की कड़ियां जुड़ती गईं। हालांकि, इन डिजिटल साक्ष्यों की वैधानिक पुष्टि और उनकी स्वीकार्यता पर अंतिम निर्णय अदालत करेगी। पुलिस का दावा है कि जांच में करीब 20 लाख रुपये के बीमा का पहलू भी सामने आया है। जांच एजेंसियां यह भी जांच कर रही हैं कि क्या बीमा राशि और कथित प्रेम संबंध इस हत्या के पीछे संभावित मकसद थे। फिलहाल इस संबंध में कोई न्यायिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
पुलिस का दावा, कई लोग थे शामिल
पुलिस के अनुसार, यह घटना किसी एक व्यक्ति का काम नहीं बल्कि एक कथित सुनियोजित साजिश थी। जांच के दौरान पत्नी, उसके कथित प्रेमी और अन्य लोगों की भूमिका की जांच की गई तथा कई आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस का कहना है कि मामले में वैज्ञानिक जांच, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, डिजिटल साक्ष्य और पूछताछ के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी आपराधिक मामले में पुलिस की कहानी अंतिम सच नहीं होती। जब तक अदालत सभी साक्ष्यों, फोरेंसिक रिपोर्ट, गवाहों और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करके फैसला नहीं सुनाती, तब तक किसी भी आरोपी को दोषी नहीं माना जा सकता। भारतीय कानून में हर आरोपी को निष्पक्ष सुनवाई और अपना पक्ष रखने का अधिकार है।
सोशल मीडिया पर चर्चा, लेकिन सावधानी जरूरी
इस मामले में सबसे अधिक चर्चा इस बात को लेकर हो रही है कि क्या वास्तव में किसी की हत्या के लिए सांप का इस्तेमाल किया गया। सोशल मीडिया पर इस घटना को लेकर कई तरह के दावे और कहानियां वायरल हो रही हैं। लेकिन जांच पूरी होने और अदालत में साक्ष्यों की जांच से पहले किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। अब इस मामले की अगली कड़ी अदालत में तय होगी। पुलिस को अपने सभी दावों को साक्ष्यों के साथ अदालत में साबित करना होगा, जबकि आरोपियों को अपना पक्ष रखने का पूरा अधिकार होगा। यह मामला केवल एक सनसनीखेज अपराध कथा नहीं, बल्कि इस बात की भी याद दिलाता है कि किसी भी आपराधिक मामले में सच्चाई का अंतिम फैसला अदालत ही करती है।



