Friday, April 17, 2026
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मार्च में थोक महंगाई दर 38 माह के उच्च स्तर 3.88 प्रतिशत पर पहुंची, खाने पीने की चीजें हुई महंगी

Wholesale Price Inflation: मार्च में भारत की थोक महंगाई दर बढ़कर 3.88% पर पहुंच गई, जो 38 महीने का उच्च स्तर है. यह बढ़ोतरी कच्चे तेल, गैस, धातुओं और खाद्य वस्तुओं की कीमतों में उछाल के कारण हुई.

Wholesale Price Inflation: भारत की थोक महंगाई दर बढ़कर 38 माह के उच्च स्तर 3.88 प्रतिशत पर पहुंच गई है. फरवरी में यह 2.13 प्रतिशत थी, जबकि पिछले साल मार्च 2025 में यह 2.25 प्रतिशत थी. मार्च में थोक महंगाई दर में वृद्धि मुख्य रूप से कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस, गैर-खाद्य वस्तुओं, बुनियादी धातुओं के विनिर्माण और खाद्य पदार्थों की कीमतों में उछाल के कारण हुई है.

उद्योग मंत्रालय ने बयान में कहा, ‘कच्चे पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस, अन्य विनिर्माण, गैर-खाद्य वस्तुएं, ‘मूल धातु’, विनिर्माण और खाद्य वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि इसकी मुख्य वजह रही.

WPI डेटा के अनुसार, ईंधन और बिजली श्रेणी में महंगाई मार्च में बढ़कर 1.05 प्रतिशत हो गई जबकि फरवरी में इसमें 3.78 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी. खास तौर पर क्रूड ऑयल में महंगाई मार्च में बढ़कर 51.57 प्रतिशत हो गई जबकि पिछले महीने इसमें 1.29 प्रतिशत की गिरावट थी. मैन्यूफैक्चर्ड उत्पादों की महंगाई दर भी फरवरी के 2.92 प्रतिशत से बढ़कर मार्च में 3.39 प्रतिशत हो गई.

हालांकि खाद्य वस्तुओं की महंगाई दर मार्च में घटकर 1.90 प्रतिशत रह गई जो फरवरी में 2.19 प्रतिशत थी. सब्जियों के मामले में यह घटकर 1.45 प्रतिशत हो गई जबकि फरवरी में यह 4.73 प्रतिशत थी.

अमेरिका-इजराइल के ईरान पर हमले के बाद पश्चिम एशिया में जारी संकट से वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है. 28 फरवरी से शुरू हुए इस संकट के बाद कच्चे तेल की कीमतों में 50 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है.

सरकार ने 26 मार्च को पेट्रोल तथा डीजल पर उत्पाद शुल्क में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की थी ताकि ईंधन खुदरा विक्रेता बढ़ी हुई कच्चे तेल की कीमतों का बोझ ग्राहकों पर न डालें. उत्पाद शुल्क में यह कटौती अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में तेज एवं तीव्र वृद्धि के मद्देनजर की गई जो करीब 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर करीब 122 डॉलर प्रति बैरल हो गई थी.

इससे पहले जारी आंकड़ों के अनुसार, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित खुदरा महंगाई मार्च में बढ़कर 3.4 प्रतिशत हो गई जो पिछले महीने 3.21 प्रतिशत थी. भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने इस महीने की शुरुआत में चालू वित्त वर्ष 2026-27 की अपनी पहली द्वैमासिक मौद्रिक नीति पेश करते हुए प्रमुख नीतिगत दर रेपो को 5.25 प्रतिशत पर यथावत रखा था. RBI नीतिगत दरों के निर्धारण के लिए मुख्य रूप से खुदरा महंगाई को आधार मानता है.

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Premanshu Chaturvedi
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