नई दिल्ली। भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट मुकाबले हमेशा से मैदान के बाहर भी चर्चा का विषय रहे हैं। खिलाड़ियों के बीच प्रतिद्वंद्विता के बावजूद कई क्रिकेटरों के आपसी रिश्ते काफी अच्छे रहे हैं। पाकिस्तान के पूर्व तेज गेंदबाज वसीम अकरम ने अब भारतीय ऑलराउंडर इरफान पठान से जुड़ी अपनी पुरानी याद साझा की है और साथ ही पाकिस्तान को लेकर पठान की सोशल मीडिया गतिविधियों पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी है।
अकरम ने बताया कि उनकी इरफान पठान से पहली मुलाकात करीब दो दशक पहले ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान हुई थी। उस समय पठान भारतीय टीम में अपनी पहचान बनाने की कोशिश कर रहे युवा गेंदबाज थे, जबकि अकरम अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले चुके थे और कमेंट्री से जुड़े हुए थे।
पठान की गेंदबाजी में अकरम की शैली की झलक दिखाई देती थी। इसी वजह से दोनों के बीच गेंदबाजी को लेकर बातचीत हुई। अकरम ने युवा पठान को गेंद को स्विंग कराने, कलाई की स्थिति और बल्लेबाज की कमजोरी पहचानने से जुड़े कुछ सुझाव दिए। उनका जोर पठान की तकनीक बदलने के बजाय उनकी मौजूदा क्षमता को बेहतर तरीके से इस्तेमाल करने पर था।
इरफान पठान ने बाद में भारतीय क्रिकेट में अपनी खास पहचान बनाई। बाएं हाथ के तेज गेंदबाज के साथ उपयोगी बल्लेबाज के रूप में भी उन्होंने टीम को कई मौकों पर योगदान दिया। पाकिस्तान के खिलाफ उनका प्रदर्शन भी यादगार रहा। उनके करियर का सबसे चर्चित प्रदर्शन 2006 के कराची टेस्ट में आया, जब उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में हैट्रिक लेकर इतिहास रचा।
हाल के वर्षों में इरफान पठान पाकिस्तान से जुड़े मुद्दों पर सोशल मीडिया पर अपनी राय रखते रहे हैं। उनके कुछ पोस्ट को लेकर पाकिस्तान में भी प्रतिक्रिया देखने को मिली। वसीम अकरम ने इस पूरे मामले का जिक्र करते हुए कहा कि खेल को लेकर भावनाओं को व्यक्तिगत दुश्मनी में बदलना उचित नहीं है।
अकरम का मानना है कि भारत-पाकिस्तान मुकाबलों को लेकर दोनों देशों के समर्थकों में जुनून स्वाभाविक है, लेकिन मैच खत्म होने के बाद खिलाड़ियों और प्रशंसकों को नतीजे को स्वीकार करना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि क्रिकेट अंततः एक खेल है और इसे राजनीतिक या व्यक्तिगत विवादों से अलग रखना बेहतर होगा।
उन्होंने यह भी याद दिलाया कि क्रिकेट ने दोनों देशों के खिलाड़ियों को एक-दूसरे से सीखने और सम्मान करने का मौका दिया है। इरफान पठान के साथ उनका पुराना अनुभव इसी रिश्ते का उदाहरण है।
अकरम के बयान में एक तरफ पुराने क्रिकेट रिश्ते की झलक दिखाई दी, तो दूसरी ओर भारत-पाकिस्तान क्रिकेट को लेकर एक अहम संदेश भी सामने आया। उनका कहना है कि मैदान पर कड़ी टक्कर हो सकती है, लेकिन खेल की सीमा मैदान के बाहर की नफरत तक नहीं पहुंचनी चाहिए।



