Thursday, September 3, 2026
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नॉर्वे ने जब्त किया रूस का ‘प्रोफेसर मोल्चानोव’ जहाज, भड़का मॉस्को…पुतिन ने बताया ‘समुद्री डकैती और लूट’

नॉर्वे ने आर्कटिक के स्वालबार्ड में रूसी सरकारी रिसर्च शिप ‘Professor Molchanov’ को अदालत के आदेश पर जब्त कर लिया। कार्रवाई यूक्रेनी कंपनी Naftogaz की 4.22 अरब डॉलर की कानूनी वसूली से जुड़ी है। रूस ने इसे ‘पाइरेसी’ और ‘लूट’ बताया है।

नई दिल्ली। रूस और पश्चिमी देशों के बीच बढ़ते तनाव के बीच नॉर्वे की एक कार्रवाई ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। नॉर्वे ने आर्कटिक के स्वालबार्ड स्थित बारेंट्सबर्ग बंदरगाह में रूसी सरकारी जहाज ‘Professor Molchanov’ को अदालत के आदेश पर जब्त कर लिया है। यह कार्रवाई यूक्रेन की सरकारी ऊर्जा कंपनी नाफ्टोगैज (Naftogaz) की ओर से की गई कानूनी कार्रवाई के बाद हुई। रूस ने नॉर्वे की इस कार्रवाई पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे ‘पाइरेसी’ यानी समुद्री डकैती करार दिया है। मॉस्को का कहना है कि वह इस कानूनी प्रक्रिया को चुनौती दे रहा है और उसे कार्रवाई की पहले से जानकारी नहीं दी गई थी।

4.22 अरब डॉलर के विवाद से जुड़ा है मामला

इस पूरे मामले की जड़ यूक्रेन की कंपनी नाफ्टोगैज और रूस के बीच क्रीमिया की संपत्तियों को लेकर चल रही अंतरराष्ट्रीय कानूनी लड़ाई में है। नाफ्टोगैज का आरोप है कि 2014 में रूस द्वारा क्रीमिया पर कब्जे के दौरान उसकी संपत्तियों को जब्त कर लिया गया था। कंपनी ने इसके बाद अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता प्रक्रिया का सहारा लिया। अप्रैल 2023 में हेग स्थित एक अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता न्यायाधिकरण ने रूस को नाफ्टोगैज को करीब 4.22 अरब डॉलर का भुगतान करने का आदेश दिया था। इसमें ब्याज और कानूनी खर्च भी शामिल थे। रूस ने इस फैसले को स्वीकार नहीं किया और भुगतान भी नहीं किया। इसके बाद नाफ्टोगैज ने अलग-अलग देशों में रूसी संपत्तियों की पहचान कर कानूनी तरीके से रकम वसूलने की कोशिश शुरू की।

अदालत के आदेश के बाद जहाज जब्त

नाफ्टोगैज के वकीलों ने रूसी जहाज ‘Professor Molchanov’ को लेकर नॉर्वे की अदालत का रुख किया। जहाज जब स्वालबार्ड के बारेंट्सबर्ग बंदरगाह पहुंचा, तब इस मामले में कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ी। बताया गया है कि 31 अगस्त को Nord-Troms और Senja District Court ने जहाज को जब्त करने का आदेश दिया। इसके बाद 2 सितंबर को स्वालबार्ड के गवर्नर ने अदालत के आदेश को लागू करते हुए जहाज को रोक दिया। फिलहाल जहाज बारेंट्सबर्ग में ही है और उसे मौजूदा स्थान से जाने की अनुमति नहीं है। जहाज पर मौजूद चालक दल और यात्रियों की देखभाल की जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन संभाल रहा है।

क्या है ‘Professor Molchanov’?

‘Professor Molchanov’ रूस की सरकारी रिसर्च शिप है। इसे रूस की हाइड्रोमेटियोरोलॉजिकल सर्विस Roshydromet संचालित करती है। यह जहाज वैज्ञानिक अभियानों के लिए इस्तेमाल होने के साथ-साथ स्वालबार्ड में रूस की बस्तियों के लिए यात्रियों और सामान के परिवहन में भी इस्तेमाल होता रहा है। यह वैज्ञानिकों, सरकारी कंपनी Arcticugol के कर्मचारियों, कॉन्ट्रैक्टर्स, उनके परिवारों और जरूरी सामान को रूसी बस्तियों तक पहुंचाने में भूमिका निभाता है।

आर्कटिक में जहाज की जब्ती क्यों अहम?

यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि आर्कटिक रूस के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम क्षेत्र है। इस इलाके में रूस की सैन्य, ऊर्जा और समुद्री गतिविधियां लंबे समय से महत्वपूर्ण रही हैं। ऐसे क्षेत्र में रूसी सरकारी स्वामित्व वाले जहाज को कानूनी प्रक्रिया के तहत रोकना मॉस्को के लिए संवेदनशील घटनाक्रम माना जा रहा है। नॉर्वे की कार्रवाई सैन्य कार्रवाई नहीं है, बल्कि एक अदालत के आदेश को लागू करने से जुड़ी है। इसके बावजूद इसका राजनीतिक असर रूस-पश्चिम तनाव के बीच काफी बड़ा हो सकता है।

रूस ने दी कड़ी प्रतिक्रिया

रूस के विदेश मंत्रालय ने नॉर्वे की कार्रवाई को ‘पाइरेसी’ बताया है। मॉस्को का कहना है कि वह इस कानूनी प्रक्रिया को चुनौती दे रहा है। रूस ने मध्यस्थता न्यायाधिकरण के अधिकार क्षेत्र को भी स्वीकार करने से इनकार किया है। उसका तर्क है कि क्रीमिया की संपत्तियों पर यूक्रेन के दावे को रूस मान्यता नहीं देता। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पहले ही रूसी जहाजों को रोकने और उनकी संपत्ति बेचने की योजनाओं को ‘समुद्री डकैती और लूट’ बता चुके हैं। रूस की ओर से यह चेतावनी भी दी गई है कि मॉस्को अपने हितों के मुताबिक जवाबी कार्रवाई के लिए लक्ष्य चुन सकता है।

नाफ्टोगैज ने कहा- संपत्तियों की तलाश जारी रहेगी

नाफ्टोगैज के कार्यवाहक प्रमुख सर्गेई फेडोरेंको ने इस कार्रवाई को न्याय बहाल करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है। कंपनी का कहना है कि जब तक करीब 4.22 अरब डॉलर की रकम की वसूली नहीं हो जाती, तब तक वह दुनिया के अलग-अलग देशों में रूसी संपत्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी रखेगी। इस घटनाक्रम ने रूस और पश्चिमी देशों के बीच पहले से जारी तनाव को और बढ़ा दिया है। अब नजर इस बात पर है कि नॉर्वे की अदालत में आगे की कानूनी प्रक्रिया क्या रुख लेती है और मॉस्को इसके जवाब में क्या कदम उठाता है।

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