नई दिल्ली (प्रज्ञा पांडे)। अमेरिकी राजनीति में एक नया इतिहास बनने की संभावना मजबूत हो गई है। मिशिगन से डेमोक्रेटिक सीनेट प्राइमरी जीतने वाले अब्दुल अल-सईद अब अमेरिका के पहले मुस्लिम सीनेटर बनने के बेहद करीब पहुंच गए हैं। यदि वह नवंबर में होने वाले आम चुनाव में जीत दर्ज करते हैं, तो अमेरिकी सीनेट में पहुंचने वाले पहले मुस्लिम सीनेटर बन जाएंगे।
अब्दुल अल-सईद ने मिशिगन की डेमोक्रेटिक सीनेट प्राइमरी में जीत हासिल कर अपनी पार्टी का उम्मीदवार बनने का अधिकार हासिल किया। अब आम चुनाव में उनका मुकाबला रिपब्लिकन उम्मीदवार माइक रोजर्स से होगा। उनकी जीत को अमेरिकी राजनीति में विविधता और अल्पसंख्यक प्रतिनिधित्व के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
अब्दुल अल-सईद मिशिगन के रहने वाले हैं और उनका जन्म मिस्र से आए प्रवासी परिवार में हुआ था। वह पेशे से डॉक्टर, पब्लिक हेल्थ विशेषज्ञ और राजनेता हैं। राजनीति में आने से पहले उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में काम किया और वेन काउंटी के स्वास्थ्य विभाग से भी जुड़े रहे। इससे पहले वह मिशिगन के गवर्नर पद का चुनाव भी लड़ चुके हैं, हालांकि उस चुनाव में उन्हें सफलता नहीं मिली थी। अब्दुल अल-सईद अपने प्रगतिशील विचारों के लिए जाने जाते हैं। उनके चुनाव अभियान में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं, सामाजिक सुधार, आर्थिक समानता और राजनीतिक व्यवस्था में बदलाव जैसे मुद्दे प्रमुख रहे। प्राइमरी चुनाव में उन्होंने अपनी प्रतिद्वंद्वी हेली स्टीवंस को करीबी मुकाबले में हराया। इस चुनाव को डेमोक्रेटिक पार्टी के भीतर विचारधारात्मक मुकाबले के रूप में भी देखा गया।
अब्दुल अल-सईद के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती नवंबर में होने वाला आम चुनाव है। मिशिगन को अमेरिकी राजनीति का एक महत्वपूर्ण और कड़े मुकाबले वाला राज्य माना जाता है। अगर वह रिपब्लिकन उम्मीदवार माइक रोजर्स को हराने में सफल रहते हैं, तो यह केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं होगी, बल्कि अमेरिकी राजनीति के इतिहास में भी एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जाएगा। यदि अब्दुल अल-सईद आम चुनाव जीतते हैं, तो वह अमेरिका के इतिहास के पहले मुस्लिम सीनेटर बन जाएंगे। उनकी संभावित जीत को अमेरिकी मुस्लिम समुदाय के राजनीतिक प्रतिनिधित्व और विविधता की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।



