Saturday, June 20, 2026
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भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौते का बड़ा असर, 15 साल में 3.78 लाख ब्रिटिश कारों के आयात को मिलेगी मंजूरी

India UK Trade Deal : नई दिल्ली। भारत और ब्रिटेन के बीच 15 जुलाई से लागू होने वाले व्यापार समझौते के तहत भारत अगले 15 वर्षों में ब्रिटेन से 3.78 लाख पारंपरिक यात्री कारों के आयात की अनुमति रियायती सीमा शुल्क पर देगा। इस समझौते के तहत आयात शुल्क चरणबद्ध तरीके से घटकर 10 प्रतिशत रह जाएगा, जिससे दोनों देशों के ऑटोमोबाइल क्षेत्र को लाभ मिलने की उम्मीद है। बुधवार को जारी भारत-ब्रिटेन व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (सीईटीए) के दस्तावेज के अनुसार, दोनों देशों के लिए निर्धारित कोटा व्यवस्था के तहत वाहन उत्पादों पर आयात शुल्क करीब 110 प्रतिशत से घटकर 10 प्रतिशत रह जाएगा। दस्तावेज के अनुसार, भारत को ब्रिटेन के इलेक्ट्रिक, हाइब्रिड और हाइड्रोजन चालित यात्री कार खंड में भी पहुंच मिलेगी। इसके तहत 20,000 पाउंड से 80,000 पाउंड मूल्य की इन कारों का ब्रिटेन को शुल्क-मुक्त निर्यात समझौते के छठे वर्ष से शुरू होगा। इस श्रेणी में कुल कोटा 15वें वर्ष में बढ़कर 88,000 इकाइयों पर पहुंच जाएगा और उसके बाद भी इसी स्तर पर बना रहेगा।

इस समझौते से टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स, महिंद्रा एंड महिंद्रा और मारुति सुजुकी जैसी भारतीय वाहन कंपनियों को लाभ मिलने की उम्मीद है। दोनों देशों ने सीईटीए को 15 जुलाई से लागू करने की घोषणा की है। ब्रिटेन से भारत में आयात के मामले में पारंपरिक इंजन वाली यात्री कारों का कोटा विभिन्न निर्धारित श्रेणियों में पांचवें वर्ष में बढ़कर 37,000 इकाइयों पर पहुंच जाएगा। इस अवधि तक सीमा शुल्क घटाकर अंतिम रूप से 10 प्रतिशत कर दिया जाएगा और इसके बाद इसमें कोई और कटौती नहीं होगी। पहले वर्ष में 3,000 सीसी से अधिक क्षमता वाले पेट्रोल इंजन और 2,500 सीसी से अधिक क्षमता वाले डीजल इंजन की कारों के लिए 10,000 इकाइयों का कोटा निर्धारित किया गया है। इन पर सीमा शुल्क 110 प्रतिशत से घटाकर 30 प्रतिशत कर दिया जाएगा।

वहीं, 1,500 सीसी से अधिक और 3,000 सीसी तक क्षमता वाले पेट्रोल इंजन तथा 2,500 सीसी तक क्षमता वाले डीजल इंजन की कारों के लिए 5,000 इकाइयों का कोटा तय किया गया है। इस श्रेणी में शुल्क 66 प्रतिशत से घटाकर 50 प्रतिशत किया जाएगा। दस्तावेज के अनुसार, 1,500 सीसी तक इंजन क्षमता वाली बड़े पैमाने पर बिकने वाली कारों के लिए समझौते के पहले वर्ष में 5,000 इकाइयों के आयात की अनुमति होगी और इन पर सीमा शुल्क 66 प्रतिशत से घटाकर 50 प्रतिशत किया जाएगा। समझौते के तहत पहले वर्ष में तीनों श्रेणियों में कुल 20,000 यात्री कारों के आयात की अनुमति होगी।

पांचवें वर्ष में 3,000 सीसी से अधिक क्षमता वाले पेट्रोल इंजन तथा 2,500 सीसी से अधिक क्षमता वाले डीजल इंजन की कारों का आयात कोटा 19,000 इकाइयों तक पहुंच जाएगा। वहीं 1,500 सीसी से अधिक तथा 3,000 सीसी तक क्षमता वाले पेट्रोल इंजन और 2,500 सीसी तक क्षमता वाले डीजल इंजन की कारों के लिए कोटा 9,000 इकाइयों तक सीमित रहेगा। 1,500 सीसी तक क्षमता वाली कारों के लिए भी 10 प्रतिशत रियायती शुल्क पर 9,000 इकाइयों का कोटा निर्धारित किया गया है। समझौते के तहत 15वें वर्ष से तीनों श्रेणियों में कुल वार्षिक आयात कोटा 15,000 इकाइयों पर स्थिर रहेगा और सभी पर सीमा शुल्क 10 प्रतिशत रहेगा।

भारत ने 40,000 पाउंड (सीआईएफ) से कम कीमत वाले वाहनों के लिए अपना बाजार नहीं खोला है। इससे बड़े पैमाने पर बिकने वाले इलेक्ट्रिक वाहन खंड को पूर्ण संरक्षण मिलेगा, जिसमें भारत टाटा मोटर्स, महिंद्रा एंड महिंद्रा और मारुति सुजुकी जैसी घरेलू कंपनियों के जरिये वैश्विक नेतृत्व हासिल करना चाहता है। पहले पांच वर्षों में भारत ने इलेक्ट्रिक, हाइब्रिड और हाइड्रोजन चालित यात्री कारों के लिए कोई रियायत नहीं दी है। हालांकि, छठे वर्ष से 40,000 पाउंड से 80,000 पाउंड (सीआईएफ) मूल्य वर्ग की ऐसी गाड़ियों पर शुल्क घटाकर 50 प्रतिशत किया जाएगा और इनके लिए 400 इकाइयों का कोटा होगा। वहीं 80,000 पाउंड से अधिक कीमत वाली गाड़ियों पर शुल्क घटाकर 40 प्रतिशत किया जाएगा तथा इनके आयात की सीमा 4,000 इकाइयों की होगी। दसवें वर्ष में इलेक्ट्रिक, हाइब्रिड और हाइड्रोजन चालित यात्री कारों के दोनों मूल्य वर्गों पर सीमा शुल्क घटकर 10 प्रतिशत पर स्थिर हो जाएगा।

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Mukesh Kumar
Mukesh Kumarhttps://jagoindiajago.news/
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