नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान कि बढ़ती तनातनी के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन को लेकर सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर चीन ईरान को सैन्य सहायता देता पाया गया, तो उस पर 50% तक का भारी टैरिफ लगाया जा सकता है। यह बयान ऐसे समय आया है जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा और व्यापार को लेकर तनाव लगातार बढ़ रहा है।
ट्रंप ने एक इंटरव्यू में यह टिप्पणी की। उनसे पूछा गया था कि क्या चीन उन देशों की सूची में शामिल है, जिन पर ईरान को सैन्य सामान भेजने पर टैरिफ लगाया जा सकता है। इस पर उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा, हां, और भी लोग हैं, लेकिन हां, चीन भी। हालांकि, उन्होंने ऐसी रिपोर्ट्स को ‘फेक’ बताते हुए खारिज भी किया, जिनमें दावा किया गया था कि बीजिंग ईरान को नए एयर डिफेंस सिस्टम देने की तैयारी कर रहा है।
इसके बावजूद ट्रंप ने चेतावनी दी कि यदि ये खबरें सही साबित होती हैं, तो चीन को गंभीर आर्थिक परिणाम भुगतने होंगे। उन्होंने कहा, अगर हमने उन्हें ऐसा करते हुए पकड़ लिया, तो उन पर 50% का टैरिफ लगेगा। यह बहुत बड़ी रकम है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि उन्हें नहीं लगता कि चीन ऐसा करेगा, क्योंकि उनके साथ अमेरिका के संबंध अच्छे रहे हैं, लेकिन शुरुआती स्तर पर कुछ गतिविधियों से इनकार नहीं किया जा सकता।
इस विवाद की पृष्ठभूमि में CNN की एक रिपोर्ट है, जिसमें दावा किया गया कि चीन अगले कुछ हफ्तों में ईरान को ‘MANPADS’ यानी कंधे पर रखकर चलाए जाने वाले एंटी-एयर मिसाइल सिस्टम भेज सकता है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि इन हथियारों को तीसरे देशों के जरिए भेजने की योजना हो सकती है ताकि असली स्रोत छिपाया जा सके। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए ट्रंप ने कहा कि अगर ऐसा हुआ तो चीन को बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा।
हालांकि, वॉशिंगटन स्थित चीनी दूतावास ने इन आरोपों को पूरी तरह गलत बताया है और कहा है कि चीन ने इस संघर्ष में शामिल किसी भी पक्ष को हथियार नहीं दिए हैं। इस बीच, ट्रंप ने चीन को एक वैकल्पिक प्रस्ताव भी दिया। उन्होंने कहा कि चीन अपने जहाज अमेरिका या वेनेज़ुएला भेज सकता है और वहां से तेल खरीद सकता है। उनके अनुसार, अमेरिका के पास पर्याप्त तेल भंडार है और वह चीन को प्रतिस्पर्धी कीमतों पर आपूर्ति कर सकता है।
हाल ही में चीन ने अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह के संघर्ष-विराम में मध्यस्थता करने में भी भूमिका निभाई थी, जिसे ट्रंप ने स्वीकार किया है। इन घटनाक्रमों के बीच ट्रंप का अगले महीने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिलने का कार्यक्रम भी तय है, जिससे यह स्पष्ट है कि आने वाले समय में कूटनीतिक और आर्थिक दोनों मोर्चों पर गतिविधियां तेज रह सकती हैं।



