Naxalism ideology debate : नई दिल्ली। गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को लोकसभा में कहा कि देश में नक्सलवाद का मूल कारण विकास की कमी, गरीबी और अन्याय नहीं, बल्कि विचारधारा है। उन्होंने वामपंथी उग्रवाद से देश को मुक्त बनाने के प्रयास पर चर्चा का जवाब देते हुए यह भी कहा कि नरेन्द्र मोदी सरकार के दौरान अनुच्छेद 370 हटाने, राममंदिर का निर्माण और कई बड़े काम हुए तथा अब नक्सल मुक्त भारत भी इसी सरकार के शासन काल में बनने जा रहा है।
‘नक्सल का मूल कारण विकास की मांग, गरीबी और अन्याय नहीं, बल्कि विचारधारा : शाह
शाह ने कहा कि भोले-भाले आदिवासियों के सामने यह गलत विमर्श रखा गया था कि उन्हें न्याय दिलाने और उनके अधिकार की खातिर यह लड़ाई लड़ी जा रही है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया, ‘‘नक्सल का मूल कारण विकास की मांग, गरीबी और अन्याय नहीं, बल्कि विचारधारा है।’’ गृह मंत्री ने कहा कि अन्याय होने पर हथियार उठा लेना लोकतांत्रिक तरीका नहीं है और ऐसी गतिविधि मोदी सरकार के दौरान कभी स्वीकार्य नहीं होगी। उन्होंने कहा, ‘‘बस्तर क्षेत्र के लोग सरकार की सुविधाओं से छूट गए थे क्योंकि वहां लाल आतंक की परछाई थी। आज परछाई हट गई है और बस्तर विकसित हो रहा है।’’ उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए सवाल किया कि 70 साल में आदिवासी विकास से उपेक्षित रह गए तो दोषी कौन है?
शाह ने कहा कि मोदी सरकार के दौरान नक्सल प्रभावित इलाकों में भी विकास पहुंचा। शाह ने उल्लेख किया कि कई सारे महत्ववूर्ण कार्य मोदी सरकार के दौरान हुए हैं और नक्सलवाद से मुक्त भारत की रचना भी इसी सरकार में हो रही है। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद और उग्रवाद समाप्त हो रहा है तो उसका पूरा श्रेय अर्धसैनिक बलों, विशेष कर कोबरा बटालियन, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) और राज्यों की पुलिस तथा स्थानीय आदिवासियों को जाता है।
गृह मंत्री ने कुछ विपक्षी सदस्यों पर निशाना साधते हुए कहा कि शहीद भगत सिंह और भगवान बिरसा मुंडा की तुलना नक्सलियों से करने की कोशिश की गई, जो पूरी तरह अनुचित है। शाह ने कहा कि नक्सलियों द्वारा ‘रेड कॉरिडोर’ को इसलिए चुना गया था कि वहां शासन व्यवस्था की पहुंच कम थी। गृह मंत्री ने कहा कि वामपंथी उग्रवादियों ने प्रभावित क्षेत्रों में विकास को नहीं पहुंचने दिया, जहां अब मोदी सरकार विकास को घर-घर पहुंचा रही है।



