Wednesday, May 27, 2026
HomeLatest Newsआसाराम को सामूहिक दुष्कर्म आरोप से राहत, लेकिन नाबालिग दुष्कर्म केस में...

आसाराम को सामूहिक दुष्कर्म आरोप से राहत, लेकिन नाबालिग दुष्कर्म केस में हाईकोर्ट ने उम्रकैद की सजा बरकरार रखी

आसाराम को राजस्थान हाई कोर्ट से आंशिक राहत मिली है। अदालत ने उसे सामूहिक दुष्कर्म, पॉक्सो की कुछ धाराओं और आपराधिक षड्यंत्र के आरोपों से बरी कर दिया। हालांकि नाबालिग से दुष्कर्म मामले में उम्रकैद की सजा बरकरार रखी गई है। अदालत ने आत्मसमर्पण का निर्देश देते हुए मानव तस्करी, धमकी, यौन उत्पीड़न और अन्य धाराओं में दोषसिद्धि भी कायम रखी।

Asaram Case : जोधपुर। राजस्थान हाई कोर्ट ने बुधवार को स्वयंभू बाबा आसाराम को आंशिक राहत देते हुए बड़ा फैसला सुनाया। अदालत ने भारतीय दंड संहिता और पॉक्सो एक्ट के तहत लगाए गए सामूहिक दुष्कर्म और बच्चे के सामूहिक यौन उत्पीड़न के आरोपों से उसे बरी कर दिया। हालांकि, नाबालिग से दुष्कर्म मामले में अदालत ने अधीनस्थ अदालत द्वारा सुनाई गई उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद आसाराम को कुछ आरोपों में राहत जरूर मिली है, लेकिन गंभीर अपराधों में उसकी दोषसिद्धि और सजा कायम रहेगी।

नाबालिग दुष्कर्म केस में हाईकोर्ट ने उम्रकैद की सजा बरकरार रखी

न्यायमूर्ति अरुण मोंगा और न्यायमूर्ति योगेंद्र कुमार पुरोहित की खंडपीठ ने भारतीय दंड संहिता की धारा 376(डी) और यौन अपराध संरक्षण अधिनियम की धारा 5(जी)/6 के तहत आसाराम को बरी कर दिया। अदालत ने उसे आपराधिक षड्यंत्र से जुड़ी धारा 120(बी) से भी मुक्त कर दिया। हालांकि खंडपीठ ने नाबालिग से दुष्कर्म से संबंधित भारतीय दंड संहिता की धारा 376(2)(एफ) के तहत अधीनस्थ अदालत द्वारा आसाराम को सुनाई गई सजा को बरकरार रखा। अदालत ने आसाराम को इस सजा के मद्देनजर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया। वह इस समय अस्थायी जमानत पर बाहर है, जिसे सोमवार को सात दिनों के लिए और बढ़ाया गया था।

उच्च न्यायालय ने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की अन्य कई धाराओं के तहत दोषसिद्धि को भी बरकरार रखा, जिनमें धारा 342 (गलत तरीके से बंधक बनाना), 370(4) (मानव तस्करी), 506 (आपराधिक धमकी), 509 (महिला की मर्यादा भंग करना) और 354(ए) (यौन उत्पीड़न) शामिल हैं। इसके अलावा, पॉक्सो अधिनियम की धारा 7/8 तथा किशोर न्याय अधिनियम की धारा 23 के तहत भी दोषसिद्धि को कायम रखा गया। इस बीच, अदालत ने सह-आरोपी संचिता गुप्ता उर्फ शिल्पी और शरत चंद्र को बरी कर दिया, जिन्हें पहले मानव तस्करी और षड्यंत्र की संबंधित धाराओं के तहत दोषी ठहराया गया था। खंडपीठ ने 20 अप्रैल को आसाराम और सह-आरोपियों की अपीलों पर सुनवाई पूरी करने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रखा था।

आदेश सुनाने से पहले अदालत ने कथित तौर पर टिप्पणी की कि उसके पास आरोपी के लिए ‘‘अच्छी और बुरी, दोनों तरह की खबरें’’ हैं और आरोपी पहले कौन-सी खबर सुनना चाहता है। आसाराम को अपने आश्रम में एक नाबालिग छात्रा का यौन उत्पीड़न करने के मामले में 25 अप्रैल 2018 को दोषी ठहराया गया था और भारतीय दंड संहिता, पॉक्सो अधिनियम तथा किशोर न्याय अधिनियम की कई धाराओं के तहत उसे उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी।

Please enable JavaScript in your browser to complete this form.

Mukesh Kumar
Mukesh Kumarhttps://jagoindiajago.news/
समाचार लेखन की दुनिया में एक ऐसा नाम जो सटीकता, निष्पक्षता और रचनात्मकता का सुंदर संयोजन प्रस्तुत करता है। हर विषय को गहराई से समझकर उसे आसान और प्रभावशाली अंदाज़ में पाठकों तक पहुँचाना मेरी खासियत है। चाहे वो ब्रेकिंग न्यूज़ हो, सामाजिक मुद्दों पर विश्लेषण या मानवीय कहानियाँ – मेरा उद्देश्य हर खबर को इस तरह पेश करना है कि वह सिर्फ जानकारी न बने बल्कि सोच को भी झकझोर दे। पत्रकारिता के प्रति यह जुनून ही मेरी लेखनी की ताकत है।
RELATED ARTICLES
- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

× Popup Image