Coal Gasification Scheme : नई दिल्ली। देश को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में कोयले से गैस बनाने वाली परियोजनाओं को बढ़ावा देने के लिए 37,500 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन योजना को मंजूरी दी गई। इस महत्वाकांक्षी योजना का मुख्य उद्देश्य स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ाना और एलएनजी, यूरिया तथा मेथनॉल जैसे आयातित उत्पादों पर देश की निर्भरता कम करना है। सरकार का मानना है कि इससे न केवल घरेलू उत्पादन को मजबूती मिलेगी, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा भी बेहतर होगी। यह योजना सतही कोयला और लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं को प्रोत्साहित करने के लिए तैयार की गई है। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि सरकार ने इस योजना के लिए 37,500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इसके जरिए करीब 2.5 से 3 लाख करोड़ रुपये तक का निवेश आकर्षित होने की उम्मीद है। सरकार के मुताबिक, इस योजना के तहत 7.5 करोड़ टन कोयले के गैसीकरण से जुड़ी परियोजनाएं शुरू की जाएंगी।
सरकार ने 2030 तक 10 करोड़ टन क्षमता का लक्ष्य रखा
कोयला गैसीकरण वह प्रक्रिया है, जिसमें ठोस ईंधन को ‘कृत्रिम गैस’ (सिनगैस) में बदला जाता है। इस गैस का उपयोग वैकल्पिक ईंधन के रूप में होता है और इससे कार्बन उत्सर्जन में कमी आती है। सिनगैस के जरिये मेथनॉल, उर्वरक, हाइड्रोजन और विभिन्न रसायनों का उत्पादन संभव होता है। सरकार का लक्ष्य 2030 तक 10 करोड़ टन की कोयला गैसीकरण क्षमता हासिल करने का है। यह योजना सतही कोयला और लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं में तेजी लाने, एलएनजी, यूरिया, अमोनियम नाइट्रेट, अमोनिया और कोकिंग कोयले जैसे महत्वपूर्ण आयातित संसाधनों पर निर्भरता कम करने और घरेलू संसाधनों के बेहतर उपयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लाई गई है। केंद्रीय मंत्री ने मौजूदा भू-राजनीतिक परिस्थितियों का जिक्र करते हुए कहा, आत्मनिर्भरता की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है। इस संदर्भ में कोयला गैसीकरण पर एक बड़ा फैसला लिया गया।
घरेलू उत्पादन बढ़ाकर विदेशी निर्भरता कम करने की तैयारी शुरू
वैष्णव ने कहा, फिलहाल एलएनजी का 50 प्रतिशत से अधिक आयात किया जाता है, जिसे कम किया जाएगा। जो यूरिया हम आयात करते हैं, उसका उत्पादन भी अब देश में शुरू होगा। अमोनिया का अभी 100 प्रतिशत आयात होता है, लेकिन इस पहल से इसके घरेलू उत्पादन के नए रास्ते खुलेंगे। मेथनॉल का भी 80-90 प्रतिशत आयात किया जाता है, जिसे अब देश में ही बनाया जाएगा। योजना के तहत संयंत्र एवं मशीनरी की लागत पर अधिकतम 20 प्रतिशत तक वित्तीय प्रोत्साहन दिया जाएगा। परियोजनाओं का चयन पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के जरिये किया जाएगा, जिसमें लागत, कोयले के उपयोग और सिनगैस उत्पादन जैसे मानकों का मूल्यांकन किया जाएगा। इसके तहत प्रोत्साहन राशि चार समान किस्तों में परियोजना के चरणों के अनुरूप जारी की जाएगी।
बयान के मुताबिक, किसी एक परियोजना के लिए अधिकतम 5,000 करोड़ रुपये, किसी एक उत्पाद के लिए (कृत्रिम प्राकृतिक गैस और यूरिया को छोड़कर) 9,000 करोड़ रुपये और एक इकाई समूह के लिए सभी परियोजनाओं में कुल 12,000 करोड़ रुपये की सीमा तय की गई है। सरकार के मुताबिक, देश में 7.5 करोड़ टन गैसीकरण क्षमता से प्रतिवर्ष लगभग 6,300 करोड़ रुपये के राजस्व सृजन की संभावना है। इसके अलावा माल एवं सेवा कर (जीएसटी) और अन्य करों से अतिरिक्त आय भी होगी। भारत के पास दुनिया के सबसे बड़े कोयला भंडारों में से एक है, जो लगभग 401 अरब टन है, जबकि लिग्नाइट का भंडार करीब 47 अरब टन है।
देश की ऊर्जा जरूरतों में कोयले की अहम भूमिका बनी हुई है और यह देश के कुल ऊर्जा मिश्रण में 55 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी रखता है। दुनिया में कोयले का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक और उपभोक्ता देश होने से भारत में ऊर्जा मांग बढ़ने के साथ कोयले की खपत भी बढ़ने की संभावना है। वित्त वर्ष 2024-25 में एलएनजी, यूरिया, अमोनिया और मेथनॉल जैसे उत्पादों के आयात पर देश का खर्च लगभग 2.77 लाख करोड़ रुपये रहा। यह योजना 2021 में शुरू किए गए राष्ट्रीय कोयला गैसीकरण मिशन और जनवरी, 2024 में मंजूर 8,500 करोड़ रुपये की योजना का ही विस्तार है, जिसके तहत कई परियोजनाएं पहले से क्रियान्वयन में हैं। इसके साथ ही, सरकार ने कोयला गैसीकरण परियोजनाओं के लिए कोयला आपूर्ति (लिंकेज) की अवधि 30 वर्ष तक बढ़ाकर निवेश को दीर्घकालिक स्थिरता प्रदान करने का भी निर्णय लिया है।



