US-Israel-Iran War : कोलकाता। अगर पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ता है और होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिये निर्यात खेपों पर असर पड़ता है, तो भारतीय चाय निर्यात में बड़ी रुकावट आ सकती है। भारतीय चाय संघ ने यह जानकारी दी है। संघ ने कहा कि फारस की खाड़ी क्षेत्र के मुख्य बाजार, जिनमें इराक, ईरान, कुवैत, सऊदी अरब, बहरीन, कतर और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं, में भारत की चाय खेप का एक बड़ा हिस्सा इस रणनीतिक रास्ते से होकर गुजरता है। ईरान ने कहा कि वह चीन के मालवाहक जहाज को छोड़कर इस रास्ते से अन्य जहाजों को गुजरने की अनुमति नहीं देगा।

संघ ने कहा कि वर्ष 2025 में, भारत ने लगभग 28 करोड़ किग्रा चाय का निर्यात किया, जिसमें से लगभग 41 प्रतिशत, यानी 11.5 करोड़ किग्रा, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), ईरान और इराक को इकट्ठा मिलाकर भेजी गई। भारतीय चाय संघ की अध्यक्ष, शैलजा मेहता ने बयान में कहा, ‘‘इसलिए, चल रहे युद्ध के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य के ज़रिये व्यापार में कोई भी रुकावट या रोक, भारतीय चाय के निर्यात पर गंभीर असर डालेगी।’’ संघ ने कहा कि निर्यात में हालिया उछाल मुख्य रूप से असम से पारंपरिक चाय के ज़्यादा निर्यात की वजह से हुआ है। असम से होने वाले ‘ऑर्थोडॉक्स’ चाय के निर्यात का लगभग 50 प्रतिशत भाग ईरान, इराक और यूएई जैसे बाज़ारों में जाता है।

उद्योग निकाय ने यह भी कहा कि असम सरकार के ऑर्थोडॉक्स चाय उत्पादन पर सब्सिडी को 10 रुपये प्रति किग्रा से बढ़ाकर 15 रुपये प्रति किग्रा करने के हालिया फैसले से निर्यात को बढ़ावा मिलने की उम्मीद थी, लेकिन चल रहे संघर्ष से ये फ़ायदे कम हो सकते हैं। मेहता ने कहा, ‘‘होर्मुज जलडमरूमध्य के संभावित रूप से बंद होने की खबरों के बीच, भले ही अमेरिका से बीमा कवच और रास्ता खुला रखने का भरोसा मिला हो, लेकिन भारतीय चाय निर्यात का परिदृश्य अभी के लिए खराब लग रहा है।’’




