महात्मा गांधी यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी (MGUMST) की ओर से 20 सितंबर को शाम साढे सात बजे विश्व प्रसिद्ध नाट्य ‘समुद्र-मंथन’ का मंचन होगा। श्रीरामजी लाल स्वर्णकार के 23वें पुण्य स्मृति समारोह के तहत भारतीय सिने जगत के प्रसिद्ध कलाकार एवं निर्देशक तथा डायरेक्टर नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा चितरंजन त्रिपाठी द्वारा निर्देशित एवं नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा, रेपर्टरी कंपनी की विशेष प्रस्तुति के तहत जयपुर में यह आयोजन किया जा रहा है। जो आर एल स्वर्णकार ऑडिटोरियम में आयोजित होगा।
महात्मा गांधी यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी के संस्थापक एवं एमेरिट्स चेयरमेन डॉ. एम एल स्वर्णकार ने बताया कि ‘समुद्र-मंथन केवल अमृत के खोज की ही कथा नहीं है अपितु यह उस संघर्ष की कथा है, जिसमें अमृत भी निकलता है और विष भी। आज भी हमारे चारों तरफ एक मंथन जारी है विकास, विज्ञान, तकनीक और समृद्धि का मंथन। इस मंथन ने हमें उपलब्धियों का अमृत तो दिया है, पर साथ ही प्रदूषण, असंतोष, तनाव और असंतुलन का विष भी दिया है, प्रश्न आज भी वही है कि इस विष को धारण कौन करेगा? और क्या हम अपने भीतर के देवत्व और आसुरी प्रवृत्तियों को पहचान पाएंगे?’
उन्होंने बताय कि ‘नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा की यह प्रस्तुति “समुद्र मंथन” अति विशिष्ट मंच सज्जा, दृश्य वैभव, सम्मोहक संगीत, मनोहारी नृत्यों और आधुनिक रंग-तकनीक से सजी एक भव्य नाट्य प्रस्तुति है। 100 से अधिक कलाकार मंच पर इस पौराणिक कथा को वर्तमान से जोड़ते हुए हमें अपने भीतर झाँकने और स्वयं से संवाद करने का अवसर देते हैं। देव और असुर केवल बाहर ही नहीं हैं-हमारे भीतर भी हैं, हमारे भीतर भी एक समुद्र है-इच्छाओं, महत्वाकांक्षाओं, कमजोरियों और संवेदनाओं का समुद्र, जिसमें भी प्रति पल एक मंथन चल रहा होता है। नाटक समुद्र मंथन केवल एक प्रस्तुति ही नहीं बल्कि एक प्रश्न है जो हमें आत्ममंथन की ओर उन्मुख करता है।’



