नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने नौकरीपेशा लोगों को सामाजिक सुरक्षा का दायरा बढ़ाने की दिशा में बड़ा फैसला लिया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने Employees’ Provident Fund (EPF) की अनिवार्य कवरेज के लिए वेतन सीमा को ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 प्रति माह करने को मंजूरी दे दी है। इस बदलाव से लगभग 51 लाख अतिरिक्त कर्मचारी EPFO के दायरे में आ सकते हैं। यह सीमा करीब 12 वर्षों के बाद संशोधित की गई है।
किन कर्मचारियों को मिलेगा लाभ?
अब ₹15,000 से अधिक और ₹25,000 तक की निर्धारित वेतन सीमा वाले कई कर्मचारी EPF और Employees’ Pension Scheme (EPS) की अनिवार्य कवरेज में शामिल हो सकेंगे। इससे कर्मचारियों को भविष्य निधि बचत के साथ-साथ रिटायरमेंट पेंशन और बीमा सुरक्षा का लाभ मिलने का दायरा बढ़ेगा।
हालांकि, किसी कर्मचारी पर नियम किस तरह लागू होगा, यह उसकी पात्रता, वेतन संरचना और संबंधित अधिसूचना में तय प्रावधानों पर निर्भर करेगा। केवल कुल मासिक वेतन को देखकर हर कर्मचारी की कवरेज का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
PF और Pension Contribution में क्या बदलाव?
EPF व्यवस्था में कर्मचारी और नियोक्ता का सामान्य योगदान 12-12 प्रतिशत बना रहेगा। नई वेतन सीमा के अनुसार पेंशन से जुड़े योगदान की अधिकतम राशि बढ़कर ₹2,080 प्रति माह हो सकती है। सरकार की ओर से पेंशन घटक में 1.16 प्रतिशत का योगदान भी जारी रहेगा।
वेतन सीमा बढ़ने से पात्र कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा कवरेज का विस्तार होगा। वहीं, कुछ मामलों में कर्मचारी और नियोक्ता के योगदान की राशि तथा कंपनियों की Payroll Cost पर असर पड़ सकता है।
सरकार पर बढ़ेगा वित्तीय बोझ
इस फैसले के बाद सरकार के वार्षिक खर्च में लगभग ₹1,089 करोड़ की बढ़ोतरी का अनुमान है। कुल वार्षिक व्यय करीब ₹11,339 करोड़ तक पहुंच सकता है। सरकार का उद्देश्य अधिक कर्मचारियों को संगठित क्षेत्र की सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़ना और बढ़ती आय के अनुरूप EPF की मौजूदा सीमा में बदलाव करना है।
EPF Salary Ceiling में यह बदलाव लाखों कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण है। हालांकि, इसके वास्तविक क्रियान्वयन की तारीख, पात्रता और Payroll प्रक्रिया से जुड़े विस्तृत नियम आधिकारिक अधिसूचना के जरिए स्पष्ट होंगे।



