जैसलमेर। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह जैसलमेर दौरे पर हैं। यहां रक्षा मंत्रालय की कंसल्टेटिव कमेटी की बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने भारतीय सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण, स्वदेशी हथियारों के विकास और रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य और युद्ध के नए स्वरूप को देखते हुए सेनाओं को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करना जरूरी है। रक्षा मंत्री ने रक्षा उत्पादन और निर्यात में भारत की उपलब्धियों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि देश का रक्षा उत्पादन बढ़कर 1.78 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। सरकार ने वर्ष 2029 तक इसे 3 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।
रक्षा उत्पादन 46 हजार करोड़ से बढ़कर 1.78 लाख करोड़ पहुंचा
राजनाथ सिंह ने रक्षा क्षेत्र में भारत की बढ़ती आत्मनिर्भरता का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2014 में देश का रक्षा उत्पादन करीब 46 हजार करोड़ रुपये था, जो वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर रिकॉर्ड 1.78 लाख करोड़ रुपये हो गया। रक्षा निर्यात में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वित्त वर्ष 2013-14 में भारत का रक्षा निर्यात 686 करोड़ रुपये था, जो वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 38,424 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। सरकार ने वर्ष 2029 तक रक्षा निर्यात को 50 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
स्वदेशी हथियारों और नई तकनीक पर विशेष जोर
रक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार रक्षा क्षेत्र में नई तकनीक और स्वदेशी हथियारों के विकास को प्राथमिकता दे रही है। DRDO की ओर से नई योजनाएं शुरू की जा रही हैं और आधुनिक हथियारों तथा मिसाइल प्रणालियों के परीक्षण किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि रक्षा उत्पादन में निजी क्षेत्र की भागीदारी भी लगातार बढ़ रही है। MSME से लेकर बड़ी कंपनियां तक इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के लिए सरकार ‘होल ऑफ द नेशन’ अप्रोच के साथ आगे बढ़ रही है, जिसमें सरकारी संस्थानों के साथ निजी कंपनियों और अन्य औद्योगिक इकाइयों की भागीदारी भी महत्वपूर्ण है।
बदलते युद्ध के स्वरूप के अनुसार सेनाओं का आधुनिकीकरण जरूरी
राजनाथ सिंह ने कहा कि आधुनिक युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। रूस-यूक्रेन युद्ध और इजरायल-ईरान तनाव ने युद्ध की रणनीतियों और तकनीक में आए बदलावों को सामने रखा है। आज के युद्ध में ड्रोन, मिसाइल और एयर डिफेंस सिस्टम की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे में भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना को आधुनिक तकनीक और बेहतर ऑपरेशनल क्षमताओं से लैस करना जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आधुनिकीकरण का मतलब केवल नए हथियार खरीदना नहीं है, बल्कि सेनाओं की परिचालन क्षमता, मानव संसाधन, प्रशिक्षण और स्वदेशी तकनीक को मजबूत करना भी है।
2026-27 में 7.85 लाख करोड़ रुपये का रक्षा बजट
रक्षा मंत्री ने बताया कि सरकार ने रक्षा आधुनिकीकरण के लिए बजट में लगातार वृद्धि की है। वित्त वर्ष 2026-27 में देश का रक्षा बजट 7.85 लाख करोड़ रुपये रखा गया है। इसमें आधुनिकीकरण और पूंजीगत खरीद के लिए 2.19 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। सरकार का जोर रक्षा बजट का प्रभावी इस्तेमाल करने और घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने पर है।
जैसलमेर में बैठक का क्या है उद्देश्य?
रक्षा मंत्री ने कहा कि दिल्ली से बाहर रक्षा मंत्रालय की कंसल्टेटिव कमेटी की बैठक आयोजित करने का उद्देश्य सदस्यों को चर्चा के लिए अधिक समय और सीमावर्ती क्षेत्रों की जमीनी परिस्थितियों को समझने का अवसर देना है। जैसलमेर जैसे सीमावर्ती क्षेत्र में बैठक होने से सुरक्षा चुनौतियों, सैन्य तैयारियों और सीमावर्ती इलाकों की वास्तविक स्थिति पर चर्चा का अवसर मिलता है। बैठक का मुख्य विषय भारतीय सशस्त्र बलों का आधुनिकीकरण रहा। रक्षा मंत्री ने समिति के सदस्यों के सुझावों को महत्वपूर्ण बताते हुए भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों के अनुरूप सेनाओं को तैयार करने पर जोर दिया।



