जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने दूसरे राज्यों में रजिस्टर्ड निजी वाहनों से रोड टैक्स वसूली को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल राजस्थान में 30 दिन से अधिक रहने के आधार पर निजी वाहनों पर अपने आप टैक्स नहीं लगाया जा सकता। हाईकोर्ट ने टैक्स वसूली के आदेश और जारी किए गए चालान निरस्त करते हुए जब्त वाहनों को छोड़ने और वाहन मालिकों से वसूली गई राशि 30 दिन में लौटाने के निर्देश दिए हैं। इस फैसले से दूसरे राज्यों में रजिस्टर्ड निजी कारों के मालिकों को बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि टैक्स लगाने और वसूलने के लिए कानून में स्पष्ट अधिकार होना जरूरी है।
दूसरे राज्यों की निजी कारों से टैक्स वसूली पर हाईकोर्ट की रोक
राजस्थान हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए दूसरे राज्यों में पंजीकृत निजी वाहनों से की गई टैक्स वसूली और जारी किए गए चालानों को निरस्त कर दिया। कोर्ट ने जब्त किए गए वाहनों को छोड़ने के साथ वाहन मालिकों से वसूली गई टैक्स राशि 30 दिन के भीतर वापस लौटाने के आदेश दिए हैं। राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई थी कि राजस्थान में 30 दिन से अधिक समय तक रहने पर दूसरे राज्यों में रजिस्टर्ड निजी वाहनों पर टैक्स देय होता है। हालांकि, हाईकोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया।
नियम 28 अपने आप टैक्स लगाने का अधिकार नहीं देता
हाईकोर्ट ने राजस्थान मोटर व्हीकल टैक्सेशन रूल्स के नियम 28 पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि नियम 28 अपने आप किसी वाहन पर टैक्स लगाने का अधिकार नहीं देता। कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 265 का भी हवाला दिया। इसके अनुसार कानून के अधिकार के बिना कोई टैक्स न तो लगाया जा सकता है और न ही वसूला जा सकता है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी भी वाहन मालिक से टैक्स वसूलने के लिए वैधानिक प्रावधान और कानूनी अधिकार होना जरूरी है।
90 याचिकाओं का निस्तारण करते हुए दिया फैसला
राजस्थान हाईकोर्ट ने हरपी कोर नेटवर्क इंडिया प्राइवेट लिमिटेड सहित कुल 90 याचिकाओं का निस्तारण करते हुए ये आदेश दिए। कोर्ट के फैसले के अनुसार टैक्स वसूली से जुड़े आदेश और चालान निरस्त किए जाएंगे। इसके साथ ही जब्त वाहनों को छोड़ने और वाहन मालिकों से वसूली गई राशि 30 दिन में लौटाने की कार्रवाई करनी होगी।



