जयपुर। राजस्थानी सिनेमा को नई दिशा देने और उसके पुनरुत्थान के उद्देश्य से ‘राजस्थानी फिल्म सेमिनार’ के चौथे संस्करण का आयोजन किया गया। सेमिनार में प्रदेश के प्रमुख निर्माता, निर्देशक, वितरक और फिल्म जगत से जुड़े अन्य लोगों ने भाग लिया। इस दौरान पिछले कई दशकों से राजस्थानी सिनेमा के सामने खड़ी चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की गई और इसके भविष्य को मजबूत बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण रणनीतियों पर सहमति बनी।
50 वर्षों से गिरती साख पर जताई चिंता
सेमिनार में मौजूद फिल्मकारों ने माना कि पिछले लगभग 50 वर्षों में राजस्थानी सिनेमा की साख और प्रभाव में लगातार गिरावट आई है। बदलते समय के साथ दर्शकों का रुझान अन्य भाषाओं की फिल्मों की ओर बढ़ा है, जिससे राजस्थानी फिल्मों के सामने दर्शक और बाजार दोनों स्तर पर चुनौतियां खड़ी हुई हैं। इसी स्थिति को बदलने और राजस्थानी सिनेमा को फिर से गौरवशाली बनाने के लिए सेमिनार में गंभीर मंथन किया गया।

व्यावसायिक रूप से सफल फिल्मों पर रहा जोर
सेमिनार में यह बात प्रमुखता से उठाई गई कि राजस्थानी फिल्मों को केवल सांस्कृतिक और कलात्मक पहचान तक सीमित नहीं रखा जा सकता। फिल्मों को व्यावसायिक रूप से भी सफल बनाना जरूरी है ताकि फिल्म उद्योग आर्थिक रूप से मजबूत हो सके और नए निवेशकों तथा कलाकारों को अवसर मिल सके। फिल्मकारों ने इस दिशा में बेहतर विषयों, तकनीक और प्रस्तुति पर ध्यान देने की आवश्यकता बताई।
ऑडिएंस बैंक तैयार करने पर बनी सहमति
राजस्थानी फिल्मों के लिए मजबूत दर्शक वर्ग तैयार करने के उद्देश्य से “ऑडिएंस बैंक” की रणनीति पर विशेष चर्चा हुई। सभी निर्माता और निर्देशकों ने इस मुहिम का समर्थन किया। फिल्मकारों का मानना है कि यदि राजस्थानी फिल्मों के लिए एक स्थायी और समर्पित दर्शक वर्ग तैयार किया जाता है तो सिनेमाघरों में दर्शकों की संख्या बढ़ेगी और फिल्मों को बेहतर व्यावसायिक परिणाम मिलेंगे।
‘ग्रुप रिलीज़’ मॉडल अपनाने का फैसला
सेमिनार की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक “ग्रुप रिलीज़” मॉडल को अपनाने का निर्णय रहा। इस रणनीति के तहत राजस्थानी सिनेमा से जुड़े निर्माता और निर्देशक आपसी सहयोग के साथ अपनी कई फिल्मों को एक साथ रिलीज़ करेंगे। इसका उद्देश्य एक-दूसरे का सहयोग करना, संयुक्त रूप से प्रचार-प्रसार करना और सामूहिक शक्ति के माध्यम से बाजार में मजबूत पहचान बनाना है। फिल्मकारों का मानना है कि इस मॉडल से राजस्थानी फिल्मों को अधिक स्क्रीन, बेहतर प्रचार और दर्शकों तक व्यापक पहुंच मिल सकेगी।
निर्देशक लखविंदर सिंह ने एकजुटता पर दिया जोर
सेमिनार की अगुवाई कर रहे निर्देशक लखविंदर सिंह ने कहा कि सरकार की ओर से विभिन्न स्तरों पर प्रयास किए जाने के बावजूद राजस्थानी सिनेमा को वह गति नहीं मिल पा रही है जिसकी अपेक्षा की जाती है। उन्होंने कहा कि राजस्थानी सिनेमा को संवारने और नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए अब बिखराव छोड़कर सभी निर्माता और निर्देशकों का एकजुट होना जरूरी है। सामूहिक प्रयासों के बिना उद्योग को मजबूत बनाना संभव नहीं होगा।
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भाषा और संस्कृति को बड़े पर्दे पर गरिमापूर्ण स्थान दिलाने का संकल्प
सेमिनार में शामिल सभी फिल्मकारों ने इस बात पर जोर दिया कि आने वाले समय में वे एक व्यवस्थित और दीर्घकालिक रणनीति के तहत काम करेंगे। उनका उद्देश्य राजस्थानी भाषा, संस्कृति, लोक परंपराओं और सामाजिक मूल्यों को बड़े पर्दे पर प्रभावी और सम्मानजनक स्थान दिलाना है ताकि नई पीढ़ी भी अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़ सके।
होटल आंगन में हुआ आयोजन
‘राजस्थानी फिल्म सेमिनार’ का चौथा संस्करण जयपुर स्थित होटल आंगन में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में राज्य के विभिन्न हिस्सों से आए फिल्म उद्योग से जुड़े लोगों ने भाग लिया।
इन फिल्मकारों और निर्माताओं ने लिया हिस्सा
सेमिनार में निर्माता नंद किशोर मित्तल, निर्माता लकी कपूर, सह निर्माता मुकेश भारद्वाज, डिस्ट्रिब्यूटर सारा जी, निर्देशक मोहसिन खान, निर्मात्री रेखा परिहार, निर्देशक एवं निर्माता भूपेंद्र राणा, निर्देशक दिव्यांक शर्मा, निर्मात्री टीना शर्मा, निर्माता संजय मलिक, निर्माता शाहिद कुरैशी, निर्देशक उग्रसेन तवार, निर्माता गणेश शाहू, निर्माता एवं निर्देशक माजिद खान, निर्देशक राहत कुरैशी, निर्माता चांद खान तथा निर्देशक एवं निर्माता मंसूर अली सहित अनेक फिल्मकार मौजूद रहे। इन सभी ने ऑडिएंस बैंक की रणनीति, ग्रुप रिलीज़ मॉडल और राजस्थानी सिनेमा के भविष्य को लेकर अपने विचार साझा किए।
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राजस्थानी सिनेमा दिवस पर भी हुई चर्चा
राजस्थानी सिनेमा के वरिष्ठ अध्येता एम. डी. सोनी ने भी सेमिनार में भाग लिया। वह कई वर्षों से राजस्थान सिनेमा के इतिहास और उसके संग्रह पर अध्ययन कर रहे हैं। उन्होंने राजस्थानी सिनेमा दिवस को लेकर भी अपने विचार रखे और सिनेमा के संरक्षण तथा उसके दस्तावेजीकरण की आवश्यकता पर बल दिया।
राजस्थानी सिनेमा के उज्ज्वल भविष्य का जताया विश्वास
सेमिनार के अंत में सभी प्रतिभागियों ने राजस्थानी सिनेमा के भविष्य के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। फिल्मकारों का मानना है कि यदि संगठित प्रयास, सही रणनीति, मजबूत दर्शक आधार और आपसी सहयोग के साथ काम किया जाए तो राजस्थानी सिनेमा एक बार फिर अपनी खोई हुई पहचान और गरिमा हासिल कर सकता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले वर्षों में राजस्थानी सिनेमा न केवल प्रदेश बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराएगा।



