Rajasthan Assembly 75th Anniversary: जयपुर। राजस्थान विधानसभा के 75वें स्थापना वर्ष पर आयोजित अमृत महोत्सव के दूसरे सत्र में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने संसदीय परंपराओं, लोकतांत्रिक मूल्यों और राजनीतिक संवाद को लेकर महत्वपूर्ण संदेश दिया. उन्होंने कहा कि विधानसभा के 75 वर्ष गौरवशाली रहे हैं और सभी सरकारों ने अपने-अपने समय में प्रदेश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, लेकिन सदन में भाषा के गिरते स्तर पर उन्होंने चिता जताई.
राजे ने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए विधानसभा की गरिमा बनाए रखना जरूरी है. उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, ‘दुश्मनी करो, लेकिन संवाद की एक खिड़की हमेशा खुली रखो.’ उनके अनुसार विचारों में मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन मनभेद नहीं होने चाहिए.
‘सदन की मर्यादा बनाए रखना जरूरी’
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी विधानसभा अध्यक्षों ने सदन की गरिमा बढ़ाने का कार्य किया है और उन्हें भी 2 बार मुख्यमंत्री के रूप में सदन में बैठने का अवसर मिला.उन्होंने चिंता जताई कि अब सदन में अमर्यादित शब्दों का प्रयोग बढ़ रहा है और संसदीय भाषा का स्तर लगातार गिर रहा है. उन्होंने कहा कि विधानसभा कोई सामान्य मंच नहीं, बल्कि वह स्थान है जहां लिए गए निर्णय पूरे प्रदेश की दिशा तय करते हैं. इसलिए प्रत्येक जनप्रतिनिधि को सदन की गरिमा और मर्यादा का सम्मान करना चाहिए.
‘नए विधायकों को सीखने की जरूरत’
वसुंधरा राजे ने कहा कि पहले विधायक पूरी तैयारी और गहन अध्ययन के साथ सदन में आते थे. वरिष्ठ नेताओं के भाषण सुनने और संसदीय परंपराओं को समझने के लिए सदन खचाखच भरा रहता था. उन्होंने कहा कि आज नए सदस्यों में इस परंपरा का अभाव दिखाई देता है. नियमित उपस्थिति और अध्ययन की संस्कृति को फिर से मजबूत करने की जरूरत है.
राजनीति से बड़ी इंसानियत
अपने 4 दशक से अधिक लंबे राजनीतिक जीवन का उल्लेख करते हुए राजे ने कहा कि वर्ष 1985 में धौलपुर से पहली बार विधायक बनने के बाद देखते-देखते 41 वर्ष बीत गए. उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री भैरोंसिंह शेखावत को याद करते हुए बताया कि वे सदन में अच्छा बोलने वाले विधायकों को लड्डू खिलाकर प्रोत्साहित करते थे. उन्होंने कहा कि राजनीति की लक्ष्मण रेखा से बड़ी इंसानियत होती है. अच्छे और बुरे समय में एक-दूसरे के साथ खड़े रहने से लोकतंत्र और रिश्ते दोनों मजबूत होते हैं.
योजनाओं का किया उल्लेख
राजे ने अपने कार्यकाल की अंत्योदय योजना, महिला आरक्षण, भामाशाह योजना और भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना जैसी पहल का उल्लेख करते हुए कहा कि इन योजनाओं को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली. उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की ‘वन स्टेट, वन इलेक्शन’ पहल का भी स्वागत किया.
शायरी के साथ दिया बड़ा संदेश
अपने संबोधन के अंत में वसुंधरा राजे ने शायरी के माध्यम से बड़ा संदेश दिया. उन्होंने कहा- ‘आपके हाथों से गुलाब की महक आएगी जरूर, किसी की राहों से कांटे हटाकर तो देखो.’ उन्होंने कहा कि यही भावना लोकतंत्र और जनसेवा की सबसे बड़ी पहचान है.
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