Wednesday, July 15, 2026
HomeLatest Newsअमेरिका की नाकेबंदी के बाद ईरान का बड़ा अल्टीमेटम, मध्य पूर्व से...

अमेरिका की नाकेबंदी के बाद ईरान का बड़ा अल्टीमेटम, मध्य पूर्व से तेल-गैस निर्यात रोकने की धमकी, बढ़ा वैश्विक तनाव

अमेरिका ने ईरान पर नौसैनिक नाकेबंदी दोबारा लागू कर हवाई हमले तेज कर दिए, जिसमें सात ईरानी सैनिकों की मौत और 260 से अधिक लोग घायल हुए। जवाब में ईरान ने पश्चिम एशिया से ऊर्जा निर्यात रोकने की धमकी दी। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर तनाव बढ़ने से क्षेत्र में पूर्ण युद्ध का खतरा गहरा गया।

US Iran Tensions : दुबई। अमेरिका ने बुधवार तड़के ईरान पर दोबारा नौसैनिक नाकेबंदी लागू करते हुए हवाई हमले तेज कर दिए। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, एक सैन्य बैरक पर हुए हमले में कम से कम सात सैनिक मारे गए, जबकि देशभर में 260 से अधिक लोग घायल हुए हैं। इस बढ़ते सैन्य तनाव से होर्मुज जलडमरूमध्य और पूरे पश्चिम एशिया में व्यापक संघर्ष की आशंका और गहरा गई है। अमेरिका और ईरान की ओर से पश्चिम एशिया में कई दिनों से जारी हमलों तथा होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण स्थापित करने के दोनों देशों के प्रयासों के कारण क्षेत्र के फिर से पूर्ण युद्ध की चपेट में आने का खतरा बढ़ गया है।

अमेरिका ने फिर लागू की नौसैनिक नाकेबंदी

ईरान सरकार की प्रवक्ता फातिमा मोहाजेरानी ने कोई विस्तृत जानकारी दिए बिना कहा कि ‘‘हाल के दिनों’’ में 30 से अधिक लोग मारे गए हैं। इनमें से सात लोगों की मौत ईरान के दक्षिण-पूर्वी सिस्तान और बलूचिस्तान प्रांत में सैन्य बैरक पर हुए हमले में हुई। अमेरिका ने पहली बार अप्रैल के मध्य में नाकेबंदी लागू की थी और जून के मध्य में इसे हटा लिया था। नाकेबंदी हटाने से एक दिन पहले एक अंतरिम समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे, जिसमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम जैसे मुद्दों पर बातचीत के लिए 60 दिन का समय तय किया गया था। हालांकि, होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर लड़ाई तेज होने के कारण बातचीत रुक गई है। शांतिकाल में दुनिया के कुल तेल और प्राकृतिक गैस व्यापार का पांचवां हिस्सा इस जलमार्ग से होकर गुजरता है।

नाकेबंदी के जवाब में ईरान के अर्द्धसैनिक बल ‘रिवोल्यूशनरी गार्ड’ ने पश्चिम एशिया से होने वाला समूचा ऊर्जा निर्यात रोकने की बुधवार को धमकी दी। उसने कहा, ‘‘क्षेत्र से तेल और गैस का निर्यात या तो सभी के लिए होगा या किसी के लिए नहीं।’’ अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को नाकेबंदी फिर से लागू करने की घोषणा करते समय कहा था कि वह जलडमरूमध्य से गुजरने वाले पोतों पर 20 प्रतिशत शुल्क भी लगाएंगे। हालांकि, नाकेबंदी फिर शुरू करने से कुछ घंटे पहले उन्होंने फारस की खाड़ी के सहयोगी देशों के अनुरोध का हवाला देते हुए शुल्क वसूलने की योजना छोड़ दी।

260 से अधिक लोग हमलों में घायल

‘यूएस सेंट्रल कमान’ ने बुधवार को कहा कि नाकेबंदी फिर लागू करते हुए अमेरिका ने सात घंटे तक हमले किए और ईरान के कई स्थानों को निशाना बनाया। ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता हुसैन करमानपुर ने बुधवार को बताया कि इन हमलों में 260 से अधिक लोग घायल हुए हैं। हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि कितने लोग मारे गए। करमानपुर द्वारा मुहैया कराए गए आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच हाल में हुई हिंसा के किसी भी अन्य चरण में इतनी संख्या में लोग घायल नहीं हुए जितने इस हालिया हिंसा में घायल हुए हैं।

ईरान के सरकारी टेलीविजन ने बताया कि एक हमले में सिस्तान और बलूचिस्तान प्रांत के बामपुर में स्थित ‘388वीं मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री ब्रिगेड’ के बैरक को निशाना बनाया गया। खबर के अनुसार, अमेरिका ने हमले के दौरान कम से कम 13 मिसाइलें दागीं। मरने वालों में अनिवार्य सैन्य सेवा के तहत भर्ती किए गए सैनिक और नियमित सैन्यकर्मी शामिल हैं। कई अन्य सैनिक घायल भी हुए। सरकारी टेलीविजन के अनुसार, ईरान की सेना ने कहा कि वह ‘‘अमेरिकी दुश्मन की इस आक्रामक कार्रवाई का माकूल जवाब’’ देगी। ‘388वीं मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री ब्रिगेड’ युद्धक टैंकों और बख्तरबंद वाहनों का संचालन करती है।

बहरीन और कुवैत में मिसाइल हमलों की चेतावनी जारी

बहरीन और कुवैत में बुधवार तड़के मिसाइल हमलों की चेतावनी जारी की गई। दोनों देशों को ईरान के हमलों का सामना करना पड़ा। इस तरह के हमले लगभग रोज हो रहे हैं, जिससे युद्धविराम पर और दबाव बढ़ गया है। जॉर्डन ने कहा कि उसने ईरान की ओर से दागी गई तीन मिसाइलों को मार गिराया। ईरान ने इन तीनों देशों पर हमले करने की जिम्मेदारी ली है। ‘यूएस सेंट्रल कमान’ के प्रमुख नौसेना एडमिरल ब्रैड कूपर ने एक बयान में कहा कि ईरान ने पड़ोसी खाड़ी देशों की ओर दर्जनों मिसाइल और ड्रोन दागे। कूपर ने कहा, ‘‘अमेरिकी बल ईरान को अकारण की गई उसकी उस आक्रामक कार्रवाई के लिए जवाबदेह ठहरा रहे हैं, जिससे निर्दोष लोगों का जीवन लगातार खतरे में पड़ रहा है।’’

अमेरिका और इजराइल ने 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू किया था। इसके बाद ईरान ने पोतों पर हमले करके और उन्हें धमकियां देकर होर्मुज जलडमरूमध्य को लगभग बंद कर दिया था। इससे तेल, उर्वरक और अन्य वस्तुओं की कीमतों में तेज वृद्धि हुई। ईरान ने हाल में जलडमरूमध्य से गुजर रहे उन पोतों पर हमले किए जो ओमान के निकट अमेरिकी सेना की निगरानी वाले और तेहरान के नियंत्रण से बाहर के समुद्री मार्ग से गुजर रहे थे। इन हमलों के बाद हिंसा का नया दौर शुरू हुआ। अमेरिका ने बल प्रयोग करके जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की धमकी दी है लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इसके लिए कहीं अधिक बड़ा नौसैनिक बेड़ा और संभवतः दसियों हजार जमीनी सैनिकों की जरूरत होगी।

संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत अमीर सईद इरावानी ने उनके देश को निशाना बनाकर किए जा रहे अमेरिकी हमलों की आलोचना की। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी ‘इरना’ के अनुसार, इरावानी ने संयुक्त राष्ट्र प्रमुख को लिखे पत्र में कहा, ‘‘अमेरिका हमलावर है, पीड़ित नहीं।’’ ट्रंप ने मंगलवार को कहा कि क्षेत्र के ‘‘राजाओं और अमीरों’’ ने उन्हें फोन किया था और जलडमरूमध्य से गुजरने वाले पोतों से शुल्क वसूलने के बजाय एक अन्य व्यवस्था का सुझाव दिया था। उन्होंने मंगलवार को ‘ओवल ऑफिस’ (राष्ट्रपति कार्यालय) में संवाददाताओं से कहा, ‘‘उन्होंने कहा कि हम इसे दूसरे तरीके से करना चाहेंगे। हम अमेरिका में अरबों डॉलर का निवेश करना चाहेंगे।’’

ट्रंप के फैसले से बढ़ी क्षेत्रीय बेचैनी

ट्रंप ने कहा कि उन्हें शुल्क वसूलने के बजाय यह व्यवस्था अधिक पसंद है, ‘‘क्योंकि मेरा मानना है कि किसी को भी जलडमरूमध्य से गुजरने के लिए शुल्क वसूलने की अनुमति नहीं होनी चाहिए।’’ अंतरिम समझौते के तहत ईरान इस बात पर सहमत हुआ था कि जलडमरूमध्य से 60 दिन तक बिना किसी शुल्क के आवाजाही जारी रहेगी। हालांकि, समझौते में यह स्पष्ट नहीं किया गया था कि इस अवधि के बाद क्या होगा।

ईरान का कहना है कि उसे जलडमरूमध्य में पोतों की आवाजाही का प्रबंधन करने और शुल्क वसूलने का अधिकार है। अमेरिका इस दावे को स्वीकार नहीं करता।अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत मंगलवार तड़के कुछ समय के लिए 87 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल से अधिक हो गई। हालांकि, यह युद्ध के चरम पर पहुंची करीब 120 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल की कीमत से काफी कम थी। ट्रंप द्वारा शुल्क वसूलने का फैसला बदलने की घोषणा के बाद कच्चे तेल की कीमत घटकर 78 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल हो गई थी, लेकिन बुधवार को यह फिर बढ़कर 85 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल हो गई। इस बीच, क्षेत्रीय मध्यस्थ अमेरिका और ईरान को फिर से बातचीत की मेज पर लाने का प्रयास कर रहे हैं।

Please enable JavaScript in your browser to complete this form.

Mukesh Kumar
Mukesh Kumarhttps://jagoindiajago.news/
समाचार लेखन की दुनिया में एक ऐसा नाम जो सटीकता, निष्पक्षता और रचनात्मकता का सुंदर संयोजन प्रस्तुत करता है। हर विषय को गहराई से समझकर उसे आसान और प्रभावशाली अंदाज़ में पाठकों तक पहुँचाना मेरी खासियत है। चाहे वो ब्रेकिंग न्यूज़ हो, सामाजिक मुद्दों पर विश्लेषण या मानवीय कहानियाँ – मेरा उद्देश्य हर खबर को इस तरह पेश करना है कि वह सिर्फ जानकारी न बने बल्कि सोच को भी झकझोर दे। पत्रकारिता के प्रति यह जुनून ही मेरी लेखनी की ताकत है।
RELATED ARTICLES
- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

× Popup Image