जयपुर। राजस्थान सरकार की मुख्यमंत्री वरिष्ठ नागरिक निःशुल्क तीर्थ यात्रा योजना के तहत गंगासागर गए बुजुर्ग यात्रियों ने यात्रा के दौरान अव्यवस्थाओं और सुविधाओं की कमी के गंभीर आरोप लगाए हैं। यात्रियों का कहना है कि कोलकाता पहुंचने के बाद उन्हें करीब 6 घंटे तक सड़क पर इंतजार करना पड़ा। वहीं, बस यात्रा के दौरान टॉयलेट के लिए नहीं रोके जाने, समय पर चाय-नाश्ता नहीं मिलने और खराब खाना दिए जाने की भी शिकायत की गई है।
यात्रियों ने आरोप लगाया कि ठहरने की व्यवस्था भी तय सुविधाओं के अनुरूप नहीं थी। एक कमरे में चार से आठ लोगों को ठहराया गया और कुछ जगहों पर बाथरूम में पानी तक उपलब्ध नहीं था। बुजुर्गों का कहना है कि यात्रा के दौरान मदद के लिए नियुक्त कर्मचारी जरूरत के समय मौजूद नहीं मिले।
6 घंटे सड़क पर बैठने का आरोप
यात्रा में शामिल नरपत नाम के एक यात्री ने बताया कि 10 अक्टूबर को उदयपुर और अजमेर संभाग के यात्रियों को लेकर विशेष ट्रेन कोलकाता पहुंची थी। इसके बाद धार्मिक स्थलों तक पहुंचाने के लिए बसों की व्यवस्था की गई।
नरपत के मुताबिक, बस यात्रा के दौरान टॉयलेट जाने के लिए बस रोकने की मांग की गई, लेकिन काफी देर तक बस नहीं रोकी गई। बाद में यात्रियों को सड़क पर इंतजार करना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि करीब छह घंटे तक बुजुर्ग सड़क पर बैठे रहे। बाद में पुलिसकर्मियों के पहुंचने और पूछताछ करने पर अटेंडेंट को बुलाया गया।
चाय-नाश्ता नहीं मिलने और खराब खाने की शिकायत
यात्रियों ने आरोप लगाया कि होटल में सुबह 11 बजे तक चाय-नाश्ता नहीं मिला। इसके बाद बस में खाना दिया गया, जिसे उन्होंने खराब गुणवत्ता का बताया। कुछ यात्रियों का कहना है कि पूरियां इतनी सख्त थीं कि उन्हें खाना मुश्किल हो रहा था। पीने के पानी की व्यवस्था को लेकर भी नाराजगी जताई गई।
यात्री ओमप्रकाश कुमावत ने आरोप लगाया कि भोजन के समय दो रोटी के बाद तीसरी रोटी देने से मना कर दिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि बस से करीब 130 किलोमीटर की यात्रा के दौरान टॉयलेट के लिए उचित जगह पर बस नहीं रोकी गई। यात्रियों ने देर रात तक ठहरने की व्यवस्था नहीं होने और धर्मशाला में कम सुविधाओं के साथ रुकने की शिकायत भी की।
एक कमरे में 6 से 8 लोगों को ठहराने का आरोप
यात्रियों के अनुसार, उन्हें बेहतर होटल में ठहराने की बात कही गई थी, लेकिन कुछ जगहों पर धर्मशाला में व्यवस्था की गई। एक कमरे में छह से आठ बुजुर्गों को ठहराने और बाथरूम में पानी नहीं होने के आरोप भी लगाए गए।
यात्रियों ने कहा कि सुबह जल्दी उठने के बावजूद ट्रेन में चाय के लिए कई घंटे इंतजार करना पड़ा। उन्हें मिली चाय की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए गए। कुछ यात्रियों ने आरोप लगाया कि शिकायत करने पर कर्मचारियों ने ठीक से व्यवहार नहीं किया और उन्हें धमकाया।
970 बुजुर्ग यात्रियों के साथ 30 कर्मचारियों की ड्यूटी
मुख्यमंत्री वरिष्ठ नागरिक निःशुल्क तीर्थ यात्रा योजना के तहत 10 अक्टूबर को उदयपुर के राणा प्रताप नगर रेलवे स्टेशन से गंगासागर के लिए विशेष ट्रेन रवाना हुई थी। इस यात्रा में कुल 970 वरिष्ठ नागरिक शामिल थे। कार्यक्रम के अनुसार, ट्रेन 12 अक्टूबर को गंगासागर पहुंची थी। इसके बाद कोलकाता के बेलूर मठ सहित अन्य धार्मिक स्थलों के दर्शन कराने की योजना थी। यात्रियों को 16 अक्टूबर को वापस लौटना था।
यात्रियों की सहायता के लिए 30 कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई थी। प्रत्येक कोच में दो सरकारी कर्मचारियों को तैनात करने की व्यवस्था बताई गई थी। स्वास्थ्य सेवाओं के लिए एक डॉक्टर और दो नर्सिंगकर्मियों को भी साथ भेजे जाने की जानकारी दी गई थी।
व्यवस्था पर उठे सवाल
यात्रियों की शिकायतों के बाद तीर्थयात्रा में भोजन, ठहरने, परिवहन और बुजुर्गों की सहायता से जुड़ी व्यवस्थाओं पर सवाल उठ रहे हैं। वरिष्ठ नागरिकों का कहना है कि यात्रा में उनके स्वास्थ्य और बुनियादी जरूरतों का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए था।
हालांकि, यात्रियों की ओर से लगाए गए आरोपों पर संबंधित विभाग या जिम्मेदार एजेंसी का पक्ष सामने आने के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।



