जयपुर। शहरी निकायों (नगर निगम, नगर परिषद और नगर पालिका) में अध्यक्ष व उपाध्यक्ष पद के लिए जारी सियासी खींचतान के बीच राजस्थान की ग्रामीण राजनीति को लेकर बड़ा मोड़ सामने आया है। लंबे समय से जिला परिषद, पंचायत समिति और ग्राम पंचायतों के चुनावों की राह देख रहे लाखों ग्रामीणों और भावी उम्मीदवारों का इंतजार एक बार फिर बढ़ गया है।
राज्य में 17 और 18 सितंबर को होने वाली पंचायती राज संस्थाओं की आरक्षण लॉटरी को अचानक टाल दिया गया है। प्रशासनिक व्यस्तता का हवाला देकर लॉटरी स्थगित किए जाने के बाद से ही राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं गर्म हैं।
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क्यों अटका आरक्षण लॉटरी का फैसला?
भजनलाल सरकार ‘वन स्टेट-वन इलेक्शन’ की नीति के तहत पंचायती राज चुनावों की तिथियों को व्यवस्थित करने का प्रयास कर रही है। हालांकि, राजस्थान हाईकोर्ट की सख्त हिदायत के बाद 17 और 18 सितंबर को आरक्षण निर्धारण की लॉटरी प्रस्तावित की गई थी।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार:
- निकाय चुनाव की व्यस्तता: 17 सितंबर को निकाय प्रमुखों के लिए नामांकन प्रक्रिया और 18 सितंबर को नाम वापसी व सिंबल आवंटन होना है।
- प्रशासनिक अमला व्यस्त: जिला कलेक्टर, एसडीएम और पुलिस बल पूरी तरह से शहरी चुनाव की प्रक्रिया में व्यस्त हैं।
- नई तिथियों पर अनिश्चितता: निर्वाचन आयोग ने निकाय अध्यक्ष-उपाध्यक्ष के चुनाव (21-22 सितंबर) के बाद ही पंचायत आरक्षण लॉटरी की नई तारीखें तय करने के संकेत दिए हैं।
भावी उम्मीदवारों के सामने क्या है चुनौती?
आरक्षण का पेच अटकने से जमीनी स्तर पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे पंच, सरपंच और जिला परिषद सदस्यों के सामने संकट खड़ा हो गया है।
- रणनीति बनाने में देरी: जब तक वार्ड या पंचायत का आरक्षण (सामान्य, ओबीसी, एससी/एसटी, या महिला) तय नहीं होता, तब तक प्रत्याशी अपनी प्रचार रणनीति तय नहीं कर पा रहे हैं।
- जनसंपर्क का कम समय: लॉटरी टलने की वजह से अब उम्मीदवारों को चुनाव से ठीक पहले बेहद सीमित समय मिलेगा, जिससे वे मतदाताओं तक सही तरीके से अपनी बात नहीं पहुंचा सकेंगे।
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हाईकोर्ट का अल्टीमेटम और आगे का सियासी गणित
भले ही आरक्षण लॉटरी में देरी हो रही हो, लेकिन राजस्थान हाईकोर्ट का स्पष्ट रुख है कि 15 नवंबर 2026 से पहले हर हाल में पंचायती राज चुनाव पूरे कराने होंगे। सियासी जानकारों का मानना है कि निकाय चुनावों की प्रक्रिया 22 सितंबर को खत्म होने के बाद, सितंबर के अंतिम सप्ताह में राज्य निर्वाचन आयोग नई लॉटरी तिथियों का ऐलान कर सकता है। इसके बाद ही प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में चुनावी बिसात पूरी तरह बिछ सकेगी।



