जयपुर। दीपावली के त्योहार को देखते हुए राजस्थान में प्रदूषण नियंत्रण को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है। आतिशबाजी के दौरान वायु प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण और ठोस कचरे पर नियंत्रण के लिए निगरानी बढ़ाई गई है। प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण से जुड़ी एजेंसियां पर्यावरणीय मानकों की पालना सुनिश्चित करने की तैयारी में जुटी हैं। खास तौर पर रात 10 बजे के बाद आतिशबाजी और तेज ध्वनि को लेकर निर्धारित नियमों की पालना पर जोर दिया जा रहा है।
जयपुर समेत कई शहरों में प्रदूषण बढ़ने की आशंका
दीपावली के दौरान पटाखों से निकलने वाले धुएं और जहरीले कणों के कारण वायु गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। जयपुर, जोधपुर, कोटा और अलवर में AQI 350 से 400 तक पहुंचने की आशंका जताई गई है। विशेषज्ञों के अनुसार थर्मल इनवर्जन की स्थिति में प्रदूषित हवा और धुआं जमीन के करीब जमा हो सकता है। इससे सांस लेने में परेशानी और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ने का खतरा रहता है।
ग्रीन पटाखों को बढ़ावा देने पर जोर
प्रदूषण को कम करने के लिए ग्रीन पटाखों के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जा रहा है। जानकारी के अनुसार पारंपरिक आतिशबाजी की तुलना में ग्रीन पटाखों से 30 से 35 प्रतिशत तक कम उत्सर्जन का दावा किया जाता है। इसके तहत SWAS, STAR और SAFAL श्रेणी के ग्रीन क्रैकर्स को बढ़ावा देने पर जोर है। साथ ही अवैध पटाखों की बिक्री और नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई की तैयारी है।
रात 10 बजे के बाद आतिशबाजी पर पाबंदी
दीपावली पर ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए निर्धारित ध्वनि मानकों की पालना जरूरी है। रात 10 बजे के बाद पटाखे चलाने और तेज ध्वनि पर प्रतिबंध से जुड़े नियम लागू हैं।
ध्वनि प्रदूषण के लिए अलग-अलग क्षेत्रों में निर्धारित सीमाएं इस प्रकार हैं:
- औद्योगिक क्षेत्र: दिन में 75 और रात में 70 डेसिबल।
- आवासीय क्षेत्र: दिन में 55 और रात में 45 डेसिबल।
- शांत क्षेत्र: दिन में 50 और रात में 40 डेसिबल।
अस्पतालों, शिक्षण संस्थानों और अदालतों के आसपास 100 मीटर के दायरे को साइलेंस जोन के रूप में चिह्नित करने के नियम भी लागू हैं।
PM2.5 और PM10 के मानकों पर नजर
वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए PM2.5 और PM10 के निर्धारित मानकों पर भी निगरानी रखी जा रही है। 24 घंटे के लिए PM2.5 की मानक सीमा 60 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर और PM10 की सीमा 100 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर है। प्रदूषण नियंत्रण मंडल की ओर से निगरानी, अवैध पटाखों के खिलाफ कार्रवाई और कचरा संग्रहण की व्यवस्थाओं पर जोर दिया जा रहा है।
बच्चों और बुजुर्गों के लिए विशेष एडवाइजरी
पटाखों के धुएं से बच्चों, बुजुर्गों और सांस के मरीजों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। अस्थमा, COPD और हृदय रोग से पीड़ित लोगों के लिए प्रदूषित हवा गंभीर परेशानी पैदा कर सकती है। ऐसे में लोगों से ग्रीन पटाखों को प्राथमिकता देने, अनावश्यक आतिशबाजी से बचने और पर्यावरणीय नियमों का पालन करने की अपील की जा रही है।



