Saturday, April 18, 2026
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प्रियंका गांधी ने महिला आरक्षण विधेयक की हार को संविधान और विपक्षी एकजुटता की बड़ी जीत बताया, सरकार पर गंभीर आरोप लगाए

प्रियंका गांधी ने लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक के पारित न होने को संविधान और विपक्षी एकजुटता की जीत बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह विधेयक संघीय ढांचे को बदलने और सत्ता को स्थायी बनाने की साजिश था। सरकार ने इसे 2029 से लागू करने का प्रस्ताव रखा था, लेकिन यह पास नहीं हो सका। विपक्ष ने इसे परिसीमन से जुड़ा बताते हुए समर्थन से इनकार किया।

Women Reservation Bill 2026 : नयी दिल्ली । कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा ने लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक के पारित न होने का उल्लेख करते हुए शनिवार को केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि यह विधेयक संघीय ढांचे को कमजोर करने की एक “साजिश” था, जिसे असफल कर दिया गया है और यह संविधान व विपक्षी एकजुटता की जीत है।

प्रियंका गांधी ने आगे कहा कि सरकार चाहे तो 2023 के नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों के आधार पर तुरंत लागू कर सकती है, और यदि ऐसा किया जाता है तो विपक्ष इसका समर्थन करेगा। उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा, “कल जो हुआ वह लोकतंत्र के लिए बड़ी जीत है। संघीय ढांचे को बदलने की कोशिश को जनता और विपक्षी एकता ने नाकाम कर दिया।

महिला आरक्षण मुद्दे पर प्रियंका गांधी ने सरकार को घेरा

प्रियंका गांधी ने कहा, ‘‘पूरी साजिश यही रची गई कि किसी न किस तरह स्थायी रूप से सत्ता में रहना है। यह काम महिलाओं के नाम पर करने का प्रयास किया गया। ’’उन्होंने दावा किया कि महिलाओं का ‘‘मसीहा’’ बनने की कोशिश की गई, लेकिन ऐसे नहीं होता और महिलाओं का ‘‘मसीहा’’ बनने के लिए काम करना होता है। प्रियंका गांधी ने कहा कि यह संविधान संशोधन विधेयक महिला आरक्षण के लिए नहीं था, यह परिसीमन के लिए था और यह बिल्कुल साफ था कि विपक्ष इसे समर्थन नहीं देने वाला था। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा, सरकार के लोग कह रहे हैं कि कल काला दिन था। हां, उनके लिए काला दिन इसलिए है कि उन्हें पहली बार धक्का लगा है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘अगर महिला आरक्षण लागू करना है तो 2023 के कानून को लागू कीजिए जिसमें पूरा विपक्ष साथ देगा।

लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण 2029 के लोकसभा चुनाव से लागू करने से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक शुक्रवार को संसद के निचले सदन में पारित नहीं हो पाया था। सदन में ‘संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026’, पर हुए मत विभाजन के दौरान इसके पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े। लोकसभा में किसी भी संविधान संशोधन विधेयक को पारित करने के लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत होती है। सरकार ने इस विधेयक के साथ ‘परिसीमन विधेयक, 2026’ और ‘संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026’ को भी सदन में चर्चा और पारित कराने के लिए रखा था, लेकिन उन्हें भी आगे नहीं बढ़ाया जा सका।

Mukesh Kumar
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