Thursday, July 30, 2026
HomeLatest Newsसंसद से पारित हुआ 'राष्ट्र गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक 2026', 'वंदे...

संसद से पारित हुआ ‘राष्ट्र गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक 2026’, ‘वंदे मातरम्’ के अपमान पर 3 साल तक की सजा का प्रावधान

Parliament Monsoon Session: संसद ने 'राष्ट्र गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026' पारित कर दिया है। नए प्रावधानों के तहत 'वंदे मातरम्' के अपमान या उसके गायन में जानबूझकर व्यवधान डालने पर 3 साल तक की सजा, जुर्माना या दोनों का प्रावधान किया गया है

Parliament Monsoon Session: संसद ने गुरुवार को ‘राष्ट्र गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026’ को मंजूरी दे दी. इस विधेयक के तहत राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के गायन में जानबूझकर व्यवधान डालना या उसका अपमान करना दंडनीय अपराध होगा. दोषी पाए जाने पर 3 वर्ष तक की सजा, जुर्माना या दोनों का प्रावधान किया गया है.

लोकसभा ने यह विधेयक द्रमुक समेत विपक्षी दलों के हंगामे के बीच ध्वनिमत से पारित किया. इससे पहले राज्यसभा बुधवार को इस विधेयक को मंजूरी दे चुकी थी. दोनों सदनों से पारित होने के बाद विधेयक अब आगे की संवैधानिक प्रक्रिया के लिए भेजा जाएगा.

हंगामे के बीच हुई चर्चा

लोकसभा की कार्यवाही प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई और राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी जैसे मुद्दों पर विपक्ष के हंगामे के कारण दो बार स्थगित हुई. दोपहर बाद सदन की कार्यवाही शुरू होने पर भी विपक्षी सांसद नारेबाजी करते रहे. इसी दौरान गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने विधेयक पर हुई संक्षिप्त चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि इस संशोधन के बाद ‘वंदे मातरम्’ को वही सम्मान मिलेगा, जो राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ को प्राप्त है.

उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ एक भारत, श्रेष्ठ भारत और विकसित भारत के संकल्प का प्रतीक है.’ साथ ही उन्होंने विपक्ष की आपत्तियों को खारिज करते हुए कहा कि यह किसी राज्य, व्यक्ति या विचारधारा के खिलाफ नहीं, बल्कि राष्ट्र गौरव से जुड़ा विधेयक है.

विपक्ष ने जताई आपत्ति

विधेयक पर चर्चा के दौरान डीएमके सांसद के. कनिमोई ने इसका विरोध करते हुए आरोप लगाया कि सरकार राष्ट्रवाद के नाम पर अपनी विचारधारा थोपने की कोशिश कर रही है. उन्होंने कहा कि इस तरह का कानून नागरिकों पर राष्ट्रवाद थोपने जैसा है और इसे संघीय ढांचे तथा धर्मनिरपेक्ष मूल्यों के खिलाफ बताया। उनका यह भी कहना था कि विभिन्न मुद्दों पर सदन में जारी हंगामे के बीच ऐसे महत्वपूर्ण विधेयक पारित नहीं किए जाने चाहिए. वहीं, DMK सांसद ए. राजा ने भी संशोधन प्रस्ताव पेश करते हुए विधेयक का विरोध किया. हालांकि सदन ने उनके संशोधन को खारिज कर दिया.

‘सामान्य विधेयक नहीं, बल्कि राष्ट्र के सम्मान से जुड़ा है’

बीजेपी के सांसद संबित पात्रा ने विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि यह केवल एक सामान्य विधेयक नहीं, बल्कि राष्ट्र के सम्मान से जुड़ा विषय है. उन्होंने संविधान सभा में 24 जनवरी 1950 को तत्कालीन अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद द्वारा दिए गए उस वक्तव्य का उल्लेख किया, जिसमें कहा गया था कि ‘जन गण मन’ और ‘वंदे मातरम्’ दोनों को समान सम्मान दिया जाएगा.’

क्या हैं नए प्रावधान?

इस विधेयक के तहत 1971 के मूल अधिनियम में संशोधन का प्रावधान किया गया है.

वंदे मातरम्’ के गायन में जानबूझकर व्यवधान डालना दंडनीय अपराध होगा.

राष्ट्रगीत का अपमान करने पर अधिकतम 3 वर्ष की सजा, जुर्माना या दोनों का प्रावधान होगा.

राष्ट्रगीत को राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के समान सम्मान देने का कानूनी आधार मजबूत किया गया है.

विधेयक के उद्देश्यों और कारणों में कहा गया है कि वर्तमान कानून में ‘वंदे मातरम्’ के अपमान या उसके गायन में बाधा डालने को लेकर कोई स्पष्ट दंडात्मक प्रावधान नहीं था. इस संशोधन के जरिए उस कानूनी कमी को दूर करने का प्रयास किया गया है.

ये भी पढ़ें: राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने कोटा में जैविक कृषि अनुसंधान केन्द्र का किया अवलोकन, किसानों को गोबर खाद अपनाने की दी सलाह


Please enable JavaScript in your browser to complete this form.

Premanshu Chaturvedi
Premanshu Chaturvedihttp://jagoindiajago.news
खबरों की दुनिया में हर लफ्ज़ को जिम्मेदारी और जुनून के साथ बुनने वाला। मेरा मानना है कि एक अच्छी खबर केवल सूचना नहीं देती, बल्कि समाज को सोचने, सवाल करने और बदलने की ताकत भी देती है। राजनीति से लेकर मानवता की कहानियों तक, हर विषय पर गहराई से शोध कर निष्पक्ष और सटीक रिपोर्टिंग करना ही मेरी पहचान है। लेखनी के जरिए सच्चाई को आवाज़ देना मेरा मिशन है।
RELATED ARTICLES
- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

× Popup Image